भारत के राष्ट्रीय पर्व कौन-कौन से हैं? भारत के राष्ट्रीय पर्व पर निबंध?

भारत के राष्ट्रीय पर्व (Bharat Ke Rashtriya Parv), भारत वर्ष में प्राचीन काल से ही व्रतों, पर्वों, उत्सवों और मेलों का आयोजन होता आ रहा है। कालांतर में इनका संबंध विभिन्न धर्मों, जातियों और संस्थानों से जुड़ गया। हिंदू धर्मावलंबियों में बड़ी संख्या में व्रत, पर्व, उत्सव और मेले हैं। इन सबके पीछे कोई-न-कोई परंपरागत कथा जुड़ी हुई है। भारत के राष्ट्रीय पर्व पर निबंध?

भारत के राष्ट्रीय पर्व (Bharat Ke Rashtriya Parv)

भारत के राष्ट्रीय पर्व

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भारत के राष्ट्रीय पर्व

सामान्यतः ये आयोजन कल्याण की भावना से प्रेरित होकर संपन्न किए जाते हैं। हिंदू धर्मावलंबियों के मुख्य पर्व दशहरा, होली और दीपावली हैं। इनका सार्वजनिक आयोजन होता है। इसी तरह मुसलमानों में ईद, बकरीद और मुहर्रम तथा ईसाई लोगों में क्रिसमस का विशेष महत्त्व है।

किंतु इन धार्मिक और जातीय पर्वों के अतिरिक्त आधुनिक भारत में कुछ ऐसे पर्व हैं, जिन्हें राष्ट्रीय पर्व कहा जाता है। इनका संबंध किसी एक धर्म, जाति अथवा क्षेत्र से नहीं है। ये देश की जनता और सरकार दोनों द्वारा उत्साहपूर्वक मनाए जाते हैं।

इनके पीछे समग्र देश की राष्ट्रीय भावना जुड़ी हुई है और ये पर्व हमारी राष्ट्रीय एकता को संपुष्ट करने में सहायक हैं। इसीलिए इन्हें राष्ट्रीय पर्व कहा जाता है। राष्ट्रीय पर्व तीन हैं-

  1. स्वतंत्रता दिवस
  2. गांधी जयंती
  3. गणतंत्र दिवस

स्वतंत्रता दिवस

यह बात सर्वविदित है कि भारत को अंग्रेजी राज की गुलामी से 15 अगस्त 1947 ई. को स्वतंत्रता प्राप्त हुई। उसी दिन देश के संसद भवन पर अंग्रेजों के ‘यूनियन जैक’ को हटाकर भारत का तिरंगा झंडा फहराया गया था।

किंतु यह स्वतंत्रता देश को सांप्रदायिक आधार पर दो भागों-पाकिस्तान और भारत में विभाजित करने पर प्राप्त हुई। पूरे देश में सांप्रदायिक दंगे हुए और हजारों की संख्या में लोग मारे गए तथा अपने घर-बार से हाथ धो बैठे।

भारत का स्वतंत्रता संग्राम 1857 ई. से 1947 ई. तक विभिन्न रूपों में चला। इसमें सशस्त्र क्रांतिकारियों का भी योगदान है। आजादी के लिए ही भगत सिंह, राजगुरु, सुखदेव सिंह, चंद्रशेखर आजाद, रामप्रसाद, ‘बिस्मिल’ आदि ने फांसी का फंदा चूमा। सुभाष चंद्र बोस ने ‘आजाद हिंद सेना’ का निर्माण कर अंग्रेजी राज को जर्जर किया।

सन् 1917 ई. से गांधी जी के नेतृत्व में कांग्रेस ने 1947 ई. तक सत्याग्रह, अवज्ञा आंदोलन, विदेशी वस्तु का बहिष्कार और स्वदेशी वस्तु का प्रचार आदि आंदोलन चलाया। लेखकों की संख्या में सत्याग्रहियों ने लाठी-गोली सहा और जेल की सजा भोगे।

सन् 1942 ई. के ‘करो या मरो’ के आंदोलन ने अंग्रेजों को बाध्य कर दिया और वे भारत को स्वतंत्र करने को सहमत हो गए। स्पष्ट है कि भारत को स्वतंत्रता प्राप्त करने के लिए लंबे समय तक संघर्ष करना पड़ा। देशवासियों को इस आजादी को कायम रखने के लिए सतत जागरूक रहना जरूरी हैदेश में प्रत्येक 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस समारोहपूर्वक मनाया जाता है।

इस दिन देश के प्रधानमंत्री नई दिल्ली लाल किले के मैदान में तिरंगा झंडा फहराते हैं और किले की प्राचीर से जन-समुदाय को संबोधित करते हैं। प्रत्येक सरकारी और गैर-सरकारी भवन पर तिरंगा झंडा फहराया जाता है।

शिक्षण संस्थाओं में विविध प्रकार के सांस्कृतिक आयोजन किए जाते हैं। अधिकांश स्थानों में बच्चों की प्रभातफेरी निकलती है और वे नारे लगाते हैं, ‘हम आजाद हैं।’ राज्यों की राजधानियों में मुख्यमंत्री ध्वजारोहण करते हैं और पुलिस परेड की सलामी लेते हैं।

इसी तरह जिला और तहसील स्तर पर वहां के अधिकारी ध्वजारोहण करते हैं। पूरा देश उत्सवमग्न हो जाता है। स्वतंत्रता के प्रति जागरूकता प्रत्येक भारतीय का कर्तव्य है। यह हमारे राष्ट्र के स्वाभिमान का प्रश्न है। अतः स्वतंत्रता दिवस हमारा राष्ट्रीय पर्व है।

गांधी जयंती

गांधी जयंती भारत का दूसरा राष्ट्रीय पर्व है। यह पर्व प्रतिवर्ष 2 अक्टूबर को धूमधाम से पूरे देश में मनाया जाता है। इस दिन ही सन् 1869 ई. में महात्मा गांधी का जन्म गुजरात राज्य के पोरबंदर में हुआ था।

उनका पूरा नाम मोहनदास करमचंद गांधी था। उन्होंने इंग्लैंड से बैरिस्ट्री की डिग्री ली और वकालत के संबंध में वे दक्षिण अफ्रीका गए। वहां अंग्रेज शासकों द्वारा अश्वेतों और प्रवासी भारतीयों पर घोर अमानुषिक अत्याचार किया जा रहा था। गांधी जी ने उन शोषित-पीड़ित लोगों की मुक्ति के लिए संघर्ष शुरू किया।

उनका संघर्ष सविनय अवज्ञा पर आधृत अहिंसात्मक था। इस संघर्ष गांधी जी को अश्वेतों के साथ कई बार लाठी का प्रहार सहना पड़ा और जेल भी जाना पड़ा। किंतु वे संघर्ष से विरत नहीं हुए। अंततः वे अपने मिशन में सफल हुए। अंग्रेजों का अत्याचार थम गया दक्षिण अफ्रीका में गांधी जी का अवज्ञा और अहिंसा का प्रयोग पूर्णतः सफल रहा।

वहां से वे सन् 1915 ई. में भारत लौटे। यहां आने के बाद गांधी जी ने पूरे देश का दौरा किया और सामान्य जनता से मिलकर उसकी पीड़ा और शोषण के संबंध में पूर्ण जानकारी प्राप्त की। चंपारण और गुजरात में किसानों की समस्याओं का सफलतापूर्वक समाधान किया। इसके बाद वे कांग्रेस के नेता बने।

उन्होंने विदेशी शासन से देश को स्वतंत्र बनाने के लिए कार्यक्रम बनाया। उन्होंने अहिंसा, सत्य और अवज्ञा को अपना साधन बनया प्रारंभ में लोगों के मन में शंका उठी कि शक्तिशाली ब्रिटिश शासन अहिंसा से नहीं झुकेगा। लेकिन गांधी जी ने निष्ठापूर्वक अपना अभियान जारी रखा। कालांतर में पूरे देश की जनता गांधी जी द्वारा चलाए जा रहे अहिंसात्मक आंदोलन में सम्मिलित हो गई।

गांधी जी स्वयं अनेक बार जेल गए और उनके आह्वान पर अन्य लाखों लोग भी जेल गए। सन् 1942 ई. में गांधी जी ने ‘अंग्रेजो भारत छोड़ो’ और ‘करो या मरो’ का नारा दिया। पूरे देश में विप्लव का दृश्य उपस्थित हो गया। उस समय गांधी जी सहित सभी नेता बंदी बना लिये गए। अंग्रेजों ने सेना और शस्त्र के बल पर आंदोलन को दबा दिया।

किंतु दो वर्ष बाद ही उन्होंने समझ लिया कि अब भारत को पराधीन रखना संभव नहीं है। अतः उन्होंने 15 अगस्त 1947 ई. को भारत को स्वतंत्र घोषित किया। गांधी जी के नेतृत्व में आजादी के लिए संघर्ष सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।

देश की खोई हुई प्रतिष्ठा पुनः स्थापित हुई। नए भारत का जन्म हुआ। यह कार्य संपन्न करने वाले महामानव गांधी जी को राष्ट्र ने ‘राष्ट्रपिता’ मान्य किया। भारत ही नहीं, पूरे विश्व ने गांधी जी के अहिंसा, सत्य और अवज्ञा को मानवता की मुक्ति के अभिनव मार्ग के रूप में स्वीकृत किया ।

महात्मा गांधी द्वारा राष्ट्र के प्रति की गई अपूर्व सेवा को सादर स्मरण करने के लिए ही उनकी जयंती पूरा देश मनाता है। इस दिन सार्वजनिक अवकाश रहता है। दिल्ली में राजघाट पर बापू की समाधि पर पुष्पांजलि अर्पित करने के साथ ही सर्वधर्म सम्मेलन होता है और उसमें सभी धर्मों के अंश पढ़े जाते हैं।

इस आयोजन में राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और अन्य गण्यमान्य लोग सम्मिलित होते हैं। देश भर में गांधी जयंती को विशेष श्रद्धापूर्वक मनाया जाता है। गांधी जी के प्रिय भजन गाए जाते हैं, गांधी जी के सिद्धांतों पर गोष्ठियां आयोजित होती हैं और सूत कताई का काम होता है। गांधी जी के प्रिय दलितों के साथ भोज आयोजित किया जाता है। पूरा कृतज्ञ राष्ट्र अपने राष्ट्रपिता को हार्दिक श्रद्धांजलि अर्पित 248 करता है।

गणतंत्र दिवस

भारत का तीसरा राष्ट्रीय पर्व गणतंत्र दिवस है। यह पर्व प्रतिवर्ष 26 जनवरी को मनाया जाता है। इसी दिन सन् 1950 ई. में भारत का संविधान लागू हुआ और भारत गणतंत्र घोषित हुआ। देश के स्वतंत्र होने के पूर्व सन् 1930 ई. में 26 जनवरी को लाहौर के कांग्रेस अधिवेशन में पूर्ण स्वतंत्रता की घोषणा की गई।

तब से आजादी मिलने तक प्रति वर्ष देश भर में 26 जनवरी स्वतंत्रता दिवस के रूप में मनाई जाती रही। अतः देश के लिए 26 जनवरी एक ऐतिहासिक दिन था। आजादी मिलने पर संविधान सभा ने भारत का संविधान निर्मित किया। उसे 26 जनवरी को इस दिन के महत्त्व को स्थायी बनाने के लिए 1950 में लागू किया गया।

इस संविधान ने भारतीय जनता को नागरिकता के सभी वांछित अधिकार प्रदान किए हैं। शासन को अपने मनोनुकूल बनाने के लिए वयस्क मताधिकार का विधान है। शासन को लोक कल्याणकारी बनाने का संकल्प भी घोषित किया गया है।

जाति, वर्ण, वंश अथवा लिंग के आधार भेद न करने का प्रावधान है। सभी को अपना विकास करने का समान अवसर देने का विधान किया गया है। भारत का संविधान विश्व का सबसे विशाल और जनवादी संविधान है।

प्रतिवर्ष 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस पूरे देश में राष्ट्रीय पर्व के रूप में मनाया जाता है। गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति देश की जनता के नाम संदेश प्रसारित करते हैं। 26 जनवरी को दिल्ली में परेड ग्राउंड पर राष्ट्रपति राष्ट्रीय ध्वज फहराते हैं। राष्ट्रध्वज को तोपों की सलामी दी जाती है।

देशी-विदेशी गण्यमान्य व्यक्तियों के साथ ही सामान्यजन भी लाखों की संख्या में गणतंत्र परेड को देखने के लिए एकत्र होते हैं। सेना के सभी अंगों के जवान अपने-अपने शास्त्रास्त्रों का प्रदर्शन करते हैं। सभी अंगों द्वारा राष्ट्रपति को सलामी दी जाती है। विभिन्न राज्यों द्वारा अपने-अपने राज्य से संबद्ध झांकियों का प्रदर्शन किया जाता है।

विद्यालयों के छात्र, एन. सी. सी. के कैडेट आदि भी परेड में सम्मिलित होते हैं। यह आयोजन अत्यंत आकर्षक होता है। राष्ट्रपति द्वारा समाजसेवा करने वाले विशिष्ट व्यक्तियों को भारतरत्न, पद्मविभूषण, पद्मभूषण और पद्मश्री से अलंकृत किया जाता ।

रात्रि के समय सरकारी भवनों पर आकर्षक रोशनी की जाती है। सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं। दिल्ली की तरह ही देश के सभी राज्यों की राजधानियों में भी गणतंत्र दिवस मनाया जाता है।

वहां राज्य के राज्यपाल परेड की सलामी लेते हैं और राष्ट्रध्वज फहराते हैं। विद्यालयों और अन्य संस्थाओं में भी इस दिन ध्वजारोहण के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इस प्रकार पूरे देश में गणतंत्र दिवस राष्ट्रीय पर्व के रूप में मनाया जाता है।

इन राष्ट्रीय पर्वों से देश के जीवन में नई चेतना, उमग और राष्ट्रीयता का भाव पुष्ट होता है। इन अवसरों पर देश की प्रगति से सामान्य जन परिचित होता है। पूरा देश इन अवसरों पर राष्ट्रीय समस्याओं के संबंध में चिन्तन करता है और सबसे बड़ी बात यह कि ये अवसर देश की राष्ट्रीय एकता को सुदृढ़ करते हैं। ये राष्ट्रीय पर्व हमारे लिए प्रसन्नता और समृद्धि लाने में सहायक हैं।

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