भारत के राष्ट्रपति का चुनाव कैसे होता है? राष्ट्रपति पद के लिए क्या योग्यता होनी चाहिए?

भारत के राष्ट्रपति का चुनाव कैसे होता है (Bharat Me Rashtrapati Ka Chunav Kaise Hota Hai), संघ की कार्यपालिका का प्रधान राष्ट्रपति होता है। वह भारत का प्रथम नागरिक होता है। वह भारत की तीनों सेनाओं का सर्वोच्च सेनापति होता है। समस्त कार्यपालिका शक्तियाँ राष्ट्रपति को प्राप्त है, परन्तु वास्तविक शक्तियाँ प्रधानमंत्री एवं उसकी मंत्रिपरिषद में निहित होती है। राष्ट्रपति का चुनाव कैसे होता है इसके अधिकार एवं शक्तियां बताइए हिंदी में।

भारत के राष्ट्रपति का चुनाव कैसे होता है (Bharat Me Rashtrapati Ka Chunav Kaise Hota Hai)

भारत के राष्ट्रपति का चुनाव कैसे होता है

राष्ट्रपति का चुनाव कैसे होता है

इनका चुनाव एक निर्वाचक मण्डल के द्वारा किया जाता है, जिसमें सम्मिलित होते हैं –

  • संसद के दोनों सदनों के निर्वाचित सदस्य।
  • राज्यों की विधानसभाओं तथा दिल्ली एवं पुदुच्चेरी संघ राज्य क्षेत्र की विधान सभाओं के निर्वाचित सदस्य।

राष्ट्रपति का कार्यकाल

राष्ट्रपति का कार्यकाल पाँच वर्ष होता है लेकिन राष्ट्रपति की मृत्यु होने त्यागपत्र देने पर पद रिक्त हो सकता है। वह अपना त्यागपत्र उपराष्ट्रपति को देता है।

इसके अतिरिक्त यदि राष्ट्रपति संविधान के प्रावधानों का उल्लंघन करे तो उसे संसद द्वारा महाभियोग की प्रक्रिया से हटाया जा सकता है। उसे हटाने का प्रस्ताव संसद के किसी भी सदन में रखा जा सकता है।

राष्ट्रपति पद के लिए योग्यताएँ

  • वह भारत का नागरिक हो।
  • 35 वर्ष की आयु पूरी कर चुका हो।
  • वह किसी लाभ के पद पर न हो।
  • लोकसभा का सदस्य निर्वाचित होने की योग्यता रखता हो।

राष्ट्रपति की शक्तियाँ व कार्य

भारत सरकार के समस्त शासन संबंधी कार्य राष्ट्रपति के नाम से किए जाते हैं। राष्ट्रपति की शक्तियों निम्नवत हैं-

  • राष्ट्रपति प्रधानमंत्री को नियुक्त करता है।
  • प्रधानमंत्री की सलाह पर अन्य मंत्रियों की नियुक्ति करता है तथा उनके विभागों का बँटवारा करता है।
  • राष्ट्रपति राज्यपालो उच्चतम व उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों की नियुक्ति करता है।
  • निर्वाचन आयोग के मुख्य निर्वाचन आयुक्त एवं अन्य आयुक्तों, भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की नियुक्ति भी राष्ट्रपति करता है।

संसद का अंग होने के कारण कानून बनाने की प्रक्रिया में राष्ट्रपति की भूमिका प्रमुख है। संसद के दोनों सदनों द्वारा पारित कोई विधेयक राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बिना कानून नहीं बन सकता। यदि संसद के दोनों सदनों में विधेयक पारित हो भी जाए फिर भी राष्ट्रपति एक बार हस्ताक्षर करने से मना कर सकता है।

विधेयक में बदलाव के सुझाव दे सकता है और एक बार विधेयक वापस लौटा सकता है, पर यदि संसद के दोनों सदन दोबारा उसी विधेयक को राष्ट्रपति के सुझावों के बिना अथवा सुझावों सहित पारित कर देते हैं, तो राष्ट्रपति को हस्ताक्षर करने होते हैं।

यदि किसी राज्य के राज्यपाल द्वारा कोई विधेयक राष्ट्रपति के पास स्वीकृति हेतु भेजा जाता है तो ऐसी स्थिति में राष्ट्रपति विधेयक पर अपनी स्वीकृति दे सकता है या पुनर्विचार के लिए वापस लौटा सकता है। मृत्युदण्ड अन्य दण्ड प्राप्त व्यक्तियों को राष्ट्रपति क्षमा कर सकता है या दण्ड को कुछ समय के लिए स्थगित एवं परिवर्तित कर सकता है।

राष्ट्रपति की आपातकालीन शक्तियों

निम्नलिखित परिस्थितियों में राष्ट्रपति इन शक्तियों का प्रयोग कर सकता है –

  • युद्ध, पाह्य आक्रमण या सशस्त्र विद्रोह की स्थिति में (राष्ट्रीय आपात)
  • राज्यों में संवैधानिक तंत्र विफल होने पर (राष्ट्रपति शासन)
  • वित्तीय सकट के समय (वित्तीय आपात)

भारत का उपराष्ट्रपति

भारत का उपराष्ट्रपति पाँच वर्ष के लिए चुना जाता है। उपराष्ट्रपति को लोकसभा और राज्यसभा श्री सभी सदस्य मिलकर चुनते हैं। उपराष्ट्रपति राज्यसभा का पदेन सभापति होता है। राष्ट्रपति की में उपराष्ट्रपति उसके स्थान पर कार्य करता है।

उपराष्ट्रपति पद के लिए योग्यताएँ

  • वह भारत का नागरिक हो।
  • 30 की आयु पूरी कर चुका हो।
  • वह किसी लाभ के पद पर न हो।
  • राज्यसभा का सदस्य बनने की योग्यता रखता हो।

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