भारतीय त्योहार पर निबंध? भारतीय त्योहार का महत्व?

भारतीय त्योहार पर निबंध (bhartiya tyohar par nibandh), महाकवि कालिदास ने कहा है-“मनुष्य उत्सवप्रिय होते हैं।” त्योहार उत्सव मनाने का सर्वोत्तम साधन है। त्योहारों के अवसर पर सब लोग परस्पर मिलते हैं और सामूहिक रूप से उत्सव मनाते हैं। वे एक-दूसरे के विचारों को सुनते हैं, एक-दूसरे की समस्याओं को समझते हैं तथा उन्हें दूर करने का प्रयत्न करते हैं।

भारतीय त्योहार पर निबंध

भारतीय त्योहार पर निबंध

भारतीय त्योहार पर निबंध

वसन्त ऋतु के त्योहार

हमारे त्योहार ऋतुओं के परिवर्तन पर निर्भर हैं। बसन्त ऋतु का मुख्य त्योहार होली है। बसन्त पंचमी के दिन ऋतुराज बसन्त जब बड़े ठाठ-बाट के साथ पदार्पण करता है, तब प्रकृति उसका स्वागत करती है। वह सरसों के पीले फूलों के रूप में उसके सिर पर सोने का मुकुट रखती है।

पक्षी कलरव के रूप में उसका गुणगान करते हैं। भौरे मंजीरे बजाते हैं और कोयल उसके स्वागत में गाना गाती है तथा किसानों के खेतों में होले तैयार हो जाते हैं। ऐसे मौसम में मनुष्यों में भी मस्ती आ जाती है, वे मस्त होकर परस्पर मिलते हैं और एक-दूसरे का स्वागत करते हैं। वे मिठाई खाते हैं और खिलाते हैं तथा कई दिनों तक उत्सव मनाते हैं।

ग्रीष्म ऋतु के त्योहार

ग्रीष्म ऋतु में भीषण गर्मी पड़ने के कारण जेठ मास में के शुक्ल पक्ष में गंगा दशहरा का पर्व मनाया जाता है। इसी ऋतु में आषाढ़ शुक्ल पूर्णमासी को गुरु पूर्णिमा का पर्व मनाया जाता है। शिष्य इस दिन गुरुओं का सम्मान करते हैं।

वर्षा ऋतु के त्योहार

वर्षा ऋतु में रक्षाबन्धन का त्योहार मनाया जाता है। यह बहिनों का मुख्य त्योहार है। विपत्ति में पड़ी हुई कोई भी बहिन किसी बीर को भाई मानकर उसकी कलाई पर रक्षा-सूत्र (राखी) बाँध देती है और वह इन प्रेम से भरे सूत्रों की पवित्रता का ध्यान रखकर बहिन की रक्षा करता है।

साधारणतः सभी बहिनें अपने भाइयों की कलाई पर राखी बाँधती हैं, भाई लोग उनको दक्षिणा देते हैं। वर्षा ऋतु में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का त्योहार भी मनाया जाता है। इस दिन भगवान् श्रीकृष्ण का जन्म हुआ था।

भगवान् कृष्ण ने राक्षसों और राक्षसों के राजा कंस का वध करके देश को राक्षसों के अत्याचारों से बचाया था। इस दिन घरों और मन्दिरों में उत्सव मनाये जाते हैं तथा भगवान् की विभिन्न लीलाएँ दिखाई जाती हैं और लोग व्रत रखते हैं। वे मन्दिरों में दर्शनों के लिए जाते हैं तथा अनुपम झाँकियाँ और भिन्न-भिन्न छटाएँ देखकर प्रसन्न होते हैं।

शरद ऋतु के त्योहार

दशहरा शरद ऋतु का त्योहार है। शरद ऋतु में प्रकृति प्रसन्न हो जाती है, नदियों का जल निर्मल हो जाता है तथा आकाश स्वच्छ हो जाता है। इस समय चन्द्रमा की किरणें पृथ्वी पर दूध की धारा के समान चाँदनी बिखेरती हैं। इसी ऋतु में रामलीला का आयोजन होता है।

राम ने रावण के अत्याचारों से संसार को छुटकारा दिलाया था। रामलीला में राम की लीलाओं का विस्तार के साथ प्रदर्शन किया जाता है। दशहरा के दिन राजा-महाराजा अपनी रुकी हुई विजय यात्रा का आरम्भ करते थे।

पहले वे शक्ति की उपासना करते थे और दसवें दिन शस्त्रों तथा घोड़े के पूजन के बाद विजय यात्रा करते थे। आज भी शस्त्रों का पूजन होता है और विजय यात्रा की रस्म पूरी की जाती है।

दीपावली शरद ऋतु का मुख्य त्योहार है। यह कार्तिक कृष्ण अमावस्या के दिन मनाया जाता है। यह स्वच्छता का त्योहार है। इस दिन प्रायः सभी लोग घरों की करवाते हैं, लीपा-पोती करवाते हैं, रंग-रोगन करवाते हैं, घरों को सजाते हैं तथा विभिन्न चित्रों से उन्हें विभूषित करते हैं।

वे बाजार से गणेश-लक्ष्मी की मूर्तियों के साथ-साथ अन्य अच्छे-अच्छे खिलौने भी लाते हैं। लोग खील-बताशे, खाँड के खिलौने और मिठाइयाँ लाते हैं, घरों को दीपकों से प्रकाशमान करते हैं, मिठाई खाते हैं, मित्रों और बन्धुओं को खिलाते हैं तथा एक-दूसरे को बधाई देते हैं।

इस दिन ग्रीटिंग (बधाई पत्र) भेजे जाते हैं। दूसरे दिन गोवर्धन की पूजा की जाती है। कहते हैं कि भगवान् श्रीकृष्ण ने ब्रज की रक्षा के लिए इसे अपनी उँगली पर धारण किया था।

दीपावली कि तीसरे दिन बहिनों का मुख्य त्योहार भैया दूज आता है। बहिनें भाइयों के मस्तक पर तिलक करती हैं और भाई उन्हें दक्षिणा देते हैं। मथुरा में इस पर्व पर बहुत भीड़ होती है। उस दिन यमुना में स्नान करना पुण्यदायक माना जाता है। इसको यम द्वितीया भी कहते हैं।

उपसंहार

ये त्योहार प्रायः सारे देश में मनाये जाते हैं। कुछ प्रान्तीय त्योहार भी हैं जो केवल उन्हीं प्रान्तों में मनाये जाते हैं। जैसे-बैसाखी का त्योहार पंजाब में मनाया जाता है। तमिलनाडु में पोंगल का त्योहार मनाया जाता है।

केरल में ओणम, आन्ध्र प्रदेश में रथ यात्रा उत्सव, बिहार में वैद्यनाथ धाम, राजस्थान में हरियाली तीज और महाराष्ट्र में गणेश उत्सव का त्योहार मुख्य हैं। ये सभी त्योहार बड़ी धूमधाम के साथ मनाये जाते हैं। इसी तरह ईद, बकरीद, क्रिसमस आदि मनाये जाते हैं।

ये सभी त्योहार हमें परस्पर एकता, एकरसता और एकात्मकता की शिक्षा देते हैं। यही कारण है कि हिन्दू, मुसलमान, ईसाई, सिक्ख आदि एक-दूसरे के त्योहारों और पर्वों को अपना पर्व मानकर उनमें भाग लेते हैं और एक-दूसरे को हृदय से लगाते हैं।

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