चिकन पॉक्स क्या बीमारी है? चिकन पॉक्स के लक्षण क्या है?

चिकन पॉक्स क्या बीमारी है (Chicken Pox Kya Bimari Hai), चिकन पॉक्स वेरिसेता जोस्टर (Varicella zoster) नामक विषाणु द्वारा होने वाला यह एक अत्यधिक सम्प्रेषणशील रोग है। चिकन पॉक्स क्यों होता है? चिकन पॉक्स के कारण? चिकन पॉक्स के लक्षण? छोटी चेचक? छोटी माता के लक्षण?

चिकन पॉक्स क्या बीमारी है (Chicken Pox Kya Bimari Hai)

चिकन पॉक्स क्या बीमारी है
Chicken Pox Kya Bimari Hai

चिकन पॉक्स क्या बीमारी है (Chicken Pox Kya Bimari Hai)

चिकन पॉक्स फाइलें का माध्यम (Mode of Transmission)

बिंदुक संक्रमण (Droplet infection) जो श्वसनमार्गी खावों के माध्यम से निकलता है. सीधे त्वचीय सम्पर्क एवं हाल ही में संदूषित हुए बर्तनों द्वारा भी संक्रमण फैल सकता है। उद्भवन काल (Incubation period) 14-15 दिन।

चिकन पॉक्स के लक्षण

सिरदर्द, गल-दाह (Sore throat) 24 घंटे की अवधि का ज्वर, प्राथमिक चकत्ते (Prodromal rashes), एनेन्थेमेटस (Enanthermatous), स्कारलेटिनिफार्म (Scartatiniform). या ताम्रविसर्प, मॉरबितिफार्म (Morbilliform) या खसरे के समान, अर्टिकरिया (Urticaria) या शीतपित्त, पेटेकिअल या परप्युरिक (Patechial or purpuric) या परप्युरा वत चकत्ते।

  • ऐनेन्थेमा (Enanthema) मुख गुहा या ग्रसनी की श्लेष्मा दिखने वाले सबसे प्रारम्भिक प्रविकार (चकत्ते)।
  • एक्जान्धेम (Exanthem) या बाहरी चकत्ते : पीठ से प्रारम्भ होकर वक्ष, उदर, चेहरे एवं अंत में हाथ-पांवों तक चकत्ते व्यापक रूप से प्रकट होते है। पहले से मेक्यूलर या धब्बे के रूप में होते हैं जो बाद में पिटिका (Papule) स्फोटिका (Vesicie) या पुटिका एवं पूप स्फोटिका (Pustule) एवं पपड़ी या पर्पटी (Scabs) में विकसित हो जाते है।
  • पुटिकाओं का अभिकेन्द्रित (Centripetal) वितरण।
  • खुजती (Pruirtus) या कण्डु।
  • लसिका ग्रंथियों (Lymph glands) की अभिवृद्धि (Enlargement)।

चिकन पॉक्स का उपचार

  • खुजली के लिए फीनोल युक्त पा रहित कैलेमाइन लोशन लगायें, शामक (Sedatives) एवं हिस्टैमीनरोधी औषधियों दें।
  • नहलाने एवं स्पंज के लिए 1/5000 पोटेशियम परमेंगनेट घोल का उपयोग करें।
  • द्वैतीयक संक्रमण का उपचार प्रतिजैविक औषधियों (एन्टिबायोटिक्स) रोग निरोधन (Prevention)।
  • शरीर के चकत्तों को खुजलाने रगड़ने आदि से रोकें
  • मरीज़ की स्थिति पर निगरानी रखें, उसका नियमित रूप से तापक्रम, नाड़ी एवं श्वसन दर रेकार्ड करें एवं आवश्यकतानुसार डॉक्टर को सूचित करें
  • व्यक्तिगत साफ-सफाई (आरोग्य) एवं पोषण का ध्यान रखें

जटिलताएँ (Complications)

  • द्वैतीयक संक्रमण (Secondary infections)
  • दाद या विसर्प (Erysipelas)
  • रक्तपूर्तिता (Septicaemia)
  • न्यूमोनिआ (Pneumonia)
  • वेरिसेला पश्चात एनकैफेलाइटिस (Post varicella encephalitis)
  • हृदपेशीशोथ (Myocarditis)
  • एपेंडिक्सशोध (Appendicitis)
  • वृक्कशोथ (Nephritis)
  • नेत्रश्लेष्माशोध (Conjunctivitis)
  • स्वरयंत्रशोथ (Laryngitis)

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