चक्रवात क्या है? चक्रवात कितने प्रकार के होते हैं और ये कैसे बनते है

चक्रवात क्या है (Cyclone Kya Hai) :- आप गर्मी के मौसम में देखते होंगे कि अक्सर तेजी से धूल भरी आँधी या बवंडर आता है। ठीक इसी प्रकार चक्रवात होता है। चक्रवात उन चक्करदार पवनों को कहते हैं जिनके मध्य में निम्न वायुदाब एवं किनारे की ओर उच्च वायुदाब होता है। वायुमण्डल में स्थानीय दशाओं के कारण भँवर उत्पन्न हो जाते हैं जो भयंकर झंझावातों का रुप धारण कर लेते हैं। जिन्हें चक्रवात कहा जाता है। What is Cyclone in hindi.

चक्रवात क्या है (Cyclone Kya Hai)

चक्रवात क्या है
Cyclone Kya Hai

चक्रवात विभिन्न आकार के होते हैं। इनका आकार 80 किमी से 300 किमी तक होता है। चक्रवातों में पवनें बाहर से केन्द्र की ओर चलती हैं। इसमें पवनों की दिशा उत्तरी गोलार्द्ध में घड़ी की सूइयों के विपरीत दिशा में तथा दक्षिणी गोलार्द्ध में घड़ी की सूइयों की दिशा में होती है।

यह भी पढ़े – बारिश क्यों होती है? इसके पीछे का कारण क्या है और बादल कैसे बनते हैं?

चक्रवात के प्रकार

  1. उष्णकटिबंधीय चक्रवात
  2. शीतोष्ण कटिबंधीय चक्रवात
  3. प्रतिचक्रवात

उष्णकटिबंधीय चक्रवात

उष्ण कटिबन्धीय चक्रवात पृथ्वी के उत्तरी और दक्षिणी गोलार्द्ध में 5° से 20″ अक्षांशों के बीच अधिक आते हैं। भारत में बंगाल की खाड़ी से उत्पन्न चक्रवात पश्चिम बंगाल, ओडिसा, आन्ध्र प्रदेश व तमिलनाडु तथा अरब सागर से उत्पन्न चक्रवात गुजरात और महाराष्ट्र राज्यों के समुद्रतटीय भागों को अधिक प्रभावित करते हैं।

हमारे देश के कुल क्षेत्रफल का 8 प्रतिशत भू-भाग समुद्री तूफान या चक्रवात से प्रभावित है। ये बड़े विनाशकारी होते हैं। इन्हें चीन सागर में टाइफून, मैक्सिको की खाड़ी में टारनेडो उत्तरी अमेरिका में हरीकेन तथा बंगाल की खाड़ी में चक्रवात कहते हैं। आप विश्व के मानचित्र पर चीन सागर, मैक्सिको की खाड़ी, उत्तरी अमेरिका तथा बंगाल की खाड़ी को देखिए।

शीतोष्ण कटिबंधीय चक्रवात

ये चक्रवात 30° से 65° अक्षांशों के बीच दोनों गोलार्द्ध में आते हैं। ये आकार में अधिक विस्तृत होते हैं परन्तु पवनों की गति कम होने के कारण उष्ण कटिबन्धीय चक्रवातों की तुलना में कम विनाशकारी होते हैं।

चक्रवात से बचाव

  • संचार माध्यमों द्वारा सूचना मिलने पर समुद्र के समीप मछली पकड़ने न जाएँ।
  • इसके आने की चेतावनी प्राप्त होने पर समुद्रतट तथा नदियों के डेल्टा क्षेत्र से दूर सुरक्षित स्थानों पर चले जाएँ।
  • चक्रवात आने पर मकानों के ऊपर के टिनशेड उखड़ कर उड़ जाते हैं। अतः दरवाजे और खिड़कियाँ बन्द कर मकान के भीतर ही रहें।
  • चक्रवात के कारण टूटे हुए पुल, भवन, पेड़ और बिजली के खम्भे व तारों को न छुएँ एवं घरों की बिजली की लाइन काट दें।
  • बाढ़ के पानी में न जाएँ तथा जहरीले जीव-जन्तुओं से सावधान रहें।
  • चक्रवात आने की सूचना मिलने पर खाने की सामग्री व पेय जल सुरक्षित स्थान पर रख लें। खाद्य सामग्री को वाटरप्रूफ बैग में रखें तथा सुरक्षा के लिए गर्म कपड़े पहनें।

प्रतिचक्रवात क्या है (Anti cyclone)

प्रतिचक्रवात में वायु की दिशा, चक्रवात के विपरीत होती है। इसमें केन्द्र में उच्च वायुदाब रहता है और बाहर की ओर वायुदाब क्रमशः कम होता जाता है। इसमें पवन की गति धीमी पड़ जाती है। मौसम सामान्य हो जाता है। प्रतिचक्रवात की उपस्थिति, चक्रवात की समाप्ति का सूचक है।

इसे भी जानें- चक्रवात की गति सागरों के ऊपर तेज होती है। स्थलीय भागों पर पहुँचने पर इनकी गति मन्द होने लगती है। इसलिए तटवर्ती भाग ही चक्रवातों से अधिक प्रभावित होते हैं।

यह भी पढ़े – तूफान का नामकरण कैसे होता है? तूफान का नाम कैसे रखते हैं?