दमा रोग ठीक करने के उपाय और तरीके इन हिंदी

दमा रोग ठीक करने के उपाय और तरीके इन हिंदी, श्वास, निःश्वास की समस्या हो जाना ही दमा है। न तो सुगमता से शुद्ध वायु, आक्सीजन अंदर ली जा सकती है तथा न ही अन्दर की कार्बन डाई आक्साइड बाहर निकल पाती है। इस पर रक्त आदि दूषित बना रहता है। तकलीफ भी बढ़ती जाती है। यदि कफ उखड़ जाए तो कुछ शांति मिलती है।

दमा रोग ठीक करने के उपाय और तरीके इन हिंदी

दमा रोग ठीक करने के उपाय

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दमा रोग ठीक करने के उपाय

  • आधी रात को दमा का प्रभाव अधिक होता है। रोगी न तो चैन की सांस ले पाता है, न ही ठीक से बैठ सकता है। कई बार वह छटपटाते, खांसते, बैठे-बैठे पूरी रात काट देता है। थक-हारकर ही नींद ले पाता है। बलगम निकलने के साथ कुछ चैन पाता है।
  • ऐसे रोगी के लिए अचार, खट्टा, तले पदार्थ, ठंडे पेय पदार्थ, दही, भैंस का दूध, चावल, आलू, शराब तथा धूम्रपान आदि ठीक नहीं होते। ये रोग को बढ़ाते हैं।
  • उसको मुलहठी, बनफशा, गाज बान का काढ़ा ठीक रहता है।
  • दूध में खजूर या छुहारा या किशमिश या मुनक्का उबालकर देने से रोग शांत होता है। रक्त शुद्ध होता है। नया रक्त तथा इसके लाल रक्तकण निर्मित होते हैं। शक्ति तथा आराम देते हैं।
  • बेसन की रोटी या काले चनों के आटे की रोटी, गर्म घी के साथ खाने से, ऊपर से पानी न पीने से, काफी लाभ मिलता है।
  • देशी घी दो चम्मच, चार साबुत काली मिर्च, देशी खांड दो चम्मच सब गर्म कर रोगी को खाने को दें। ऊपर से पानी मत पीने दें।
  • शतावर का चूर्ण दूध के साथ लेने से बहुत जल्दी आराम मिलता है।
  • ऐसे रोगी के लिए मीठी पकी खुमानी, संतरा, मौसमी, पका पपीता, कच्चे पपीते की सब्ज़ी, अनार, नींबू आदि काफी ठीक रहते हैं।
  • हरी सब्जियां, फल, मूली, गाजर, पत्ता गोभी तथा पालक आदि के पत्ते भी सेवन करने में लाभ मिलता है। जीरा तथा काला नमक भी डालें।
  • टमाटर, मूली, गाजर, अदरक पर जीरा, काला नमक व नींबू डालें। खाएं।
  • देशी घी की जलेबी दूध में डालकर सेवन करें।
  • सेंवियों को पानी में उबालकर, घी तथा देशी खांड डालकर खाएं।
  • भोजन में चिकनाई की कमी भी दमे का कारण है। नाड़ियां खुश्क रहने लगती हैं। इसके लिए घी से कुछ उपचार ऊपर दे दिए गए हैं।
  • जुशांदा कुछ दिन नियमित लें। यह बलगम उखाड़ता है। खांसी रोकता है। कब्ज हटाता है। पाचन शक्ति में वृद्धि करता है। श्वास ठीक आता है।
  • जिस इलाके का रोगी रहने वाला है यदि उस इलाके में निकाली शहद मिले तो प्रतिदिन चम्मच चम्मच चाटकर खाए। जहां का भी मिले, शुद्ध शहद ही उत्तम रहेगा। मगर लेवें जरूर।

इन बातों पर चलें तो दमा शांत करना व ठीक करना कठिन नहीं।

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अस्वीकरण – यहां पर दी गई जानकारी एक सामान्य जानकारी है। यहां पर दी गई जानकारी से चिकित्सा कि राय बिल्कुल नहीं दी जाती। यदि आपको कोई भी बीमारी या समस्या है तो आपको डॉक्टर या विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए। Candefine.com के द्वारा दी गई जानकारी किसी भी जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।

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