दावत में खाना खाने से हो सकते है स्वास्थ्य को ये नुकसान देखे पूरी जानकारी

दावत में खाना खाने से हो सकते है स्वास्थ्य को ये नुकसान देखे पूरी जानकारी, आज किसी को दावत पर बुलाना या किसी के घर दावत पर जाना फैशन है। यह तो है स्पेशल दावतों की बात। मगर समाज में रहते हुए, अपने रीति-रिवाजों को निभाते हुए भी तो कभी विवाह समारोह है तो कभी जन्मदिन। कभी गृह प्रवेश पर बुलावा है तो कभी चौवरख। कोई न कोई आयोजन होता ही रहता है। यही आयोजन, यही दावत, यही अवसर है मिर्च-मसालों से तैयार, तलकर तैयार किए, घी-तेल युक्त, भारी भोजन परोसने और खाने का। इसी से स्वास्थ्य बिगड़ता है। रोग आते हैं।

दावत में खाना खाने से हो सकते है स्वास्थ्य को ये नुकसान

दावत में खाना खाने से हो सकते है स्वास्थ्य को ये नुकसान देखे पूरी जानकारी

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दावत में खाना खाने के नुकसान

  • शायद ही ऐसी कोई पार्टी हो जहां पर सादा, सुपाच्य, हल्का खाना परोसा जाता हो। सब मौकों पर अपनी शान दिखाने के लिए अच्छे से अच्छे हलवाई बुलाए जाते हैं, बढ़िया रसोइए आते हैं। जिन्हें ऐसा भोजन बनाना होता है, जिसे खाने वाले उंगलियां चाटते रहें। अतः इनमें घी, मिर्च, नमक, मसालों की अति होती है। इस भोजन को ही अत्यधिक पसंद किया जाता है। यही भोजन रोगों का कारण भी बनता है।
  • हम मित्रों सम्बन्धियों को दावत में तो क्या आमन्त्रित करते हैं, बल्कि उन्हें रोगों की दावत देते हैं। भोजन ही ऐसा होता है।
  • चलो, जैसा बना, उसी में से यदि मेहमान थोड़ा खाकर तसल्ली भी कर ले तो हम उसे और कुछ और खाने पर विवश कर, उसके लिए पकवान की विविधता नहीं, रोगों की विविधता परोस देते हैं।
  • दावतों में न जाएं तो शिकवे, शिकायत, नाराज़गी झेलनी पड़ती है। जाते हैं, कुछ खाते हैं तो अपने लिए रोग ले लेते हैं।
  • दावत में चहकना, हंसना, खाना और अधिक खाना, मस्ती करना अच्छा लगता है। मगर जब बीमार पड़कर दवाइयां, गोलियां, टीके लगवाने पड़ते हैं। तो नानी याद आती है। पछताना पड़ता है। मज़ा किरकिरा हो जाता है।
  • स्पेशल डिशिज़ खाकर, हम अपने मेदे पर वज़न बढ़ा देते हैं। मेदा बेचारा शुरू-शुरू में ओवर लोडिंग बरदाश्त कर लेता है। मगर बाद में गम्भीर रोगों में घिर जाता है। लेने के देने पड़ जाते हैं।
  • पाचन शक्ति कमजोर होना, पेट व सीने में दर्द होना, उल्टियां लगना, अजीर्ण, बवासीर, प्रमेह, जोड़ों की पीड़ा, बदहजमी हो जाना आम बात है। फिर डॉक्टरों के वश पड़ना, मुसीबत को बढ़ा देता है।
  • हमें मान लेना चाहिए कि आज की ये दावतें हमारे स्वास्थ्य की दुश्मन हैं। हमें निरोगता से उठाकर रोगों में धकेलने वाली हैं। इनसे जितना भी बच सकेँ बचें। वरना सदा रोगी बने रहेंगे।
  • अच्छा हो, अपने स्वास्थ्य की चिन्ता करते हुए हम इन बार-बार की दावतों का बहिष्कार करें। यदि यह सम्भव नहीं तो दावतों का ढंग बदलकर, इसमें फलों, फलों के शुद्ध रसों, सादा घर जैसे भोजनों को बनाना और खिलाना शुरू करें। तभी रोगों से बच पाएंगे।

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