डेल्टा वेरिएंट क्या है? क्या वैक्सीन के बाद भी डेल्टा वेरियन का खतरा रहेगा?

डेल्टा वेरिएंट क्या है

डेल्टा वेरिएंट क्या है (Delta Variant Kya Hai) :- साल 2020 से कोरोना का कहर सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि सभी देशों में छाया हुआ है एक के बाद एक लगातार कोरोना वायरस के स्ट्रेन सामने आ रहे हैं।

डेल्टा वेरिएंट क्या है (Delta Variant Kya Hai)?

डेल्टा वेरिएंट क्या है
डेल्टा वेरिएंट क्या है (Delta Variant Kya Hai)?

हाल ही में एक नया और खतरनाक वेरिएंट भारत में मिला है यह वेरिएंट इतना खतरनाक है की इससे संक्रमण होने के बाद मरीज 7 दिन के अंदर ही हद से ज्यादा कमजोर हो जा रहे हैं और वजन कब हो सकता है।

यह वेरिएंट सबसे पहले ब्राजील में मिला था और इस बात की पुष्टि भी हुई थी कि ब्राजील से एक वेरिएंट भारत आया है लेकिन हाल ही में वैज्ञानिकों का यह कहना है कि ब्राजील से कोरोना के दो वेरिएंट भारत आए हैं दूसरे वेरिएंट का नाम है बी.1.1.28.2

मीडिया के मुताबिक इस वेरिएंट का परीक्षण वैज्ञानिकों ने चूहों पर किया और इसका परिणाम जो वैज्ञानिकों के सामने आया वह बहुत चौंकाने वाला था। वैज्ञानिकों का यह कहना है।

कि इस वेरिएंट से संक्रमित होने के 7 दिन के अंदर ही इसकी पहचान की जा सकती है । यह वेरिएंट इतना खतरनाक है कि मरीज का 7 दिन के अंदर वजन घटकर बहुत कम हो जा रहा है। साथ ही डेल्टा वेरिएंट की तरह शरीर की एंटीबॉडी क्षमता को भी कम कर देता है।

डबल म्युटेंट वेरिएंट क्या है?

कोरोना के डेल्टा वेरिएंट को ही डबल म्युटेंट वेरिएंट भी कहा जाता है क्योंकि यह मरीजों पर दो तरह से हमला करता है वायरस का यह ट्रेन व्यक्ति के जीनोम में दो तरह के परिवर्तन लाता है। यह मेरी है मरीज के शरीर में लंबे समय तक रहकर दुगनी क्षमता से हमला करता है।

क्या वैक्सीन के बाद भी डेल्टा वेरियन का खतरा रहेगा?

  • काफी स्टडी के बाद एम्स ने यह पुष्टि की है की कोरोना का डेल्टा वेरिएंट बहुत ही खतरनाक है।
  • स्टडी के मुताबिक डेल्टा वेरिएंट वैक्सीन के असर को कम कर देता है।
  • वैक्सीन लगने के बाद भी संक्रमित मरीजों में डेल्टा वेरिएंट ही पाया गया है।

कई लोगों के मन में यह सवाल उठ रहे होंगे कि वैक्सीन लेने के बाद भी क्यों लोग कोरोना वायरस से संक्रमित हो रहे हैं? यह कोरोना वायरस इतना खतरनाक है कि बार-बार अपना रूप बदल ले रहा है।

दिल्ली में स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान एम्स ने काफी स्टडी के बाद यह बताया है कि वैक्सीन लेने के बाद भी लोगों में कोरोना वायरस के संक्रमण का कारण डेल्टा वेरिएंट (B1.617.2) है। अध्ययन में यह बात भी सामने आई है कि लोगों ने चाहे कोवैक्‍सीन या कोविशील्‍ड की डोज ली हो यह वेरिएंट उनको भी संक्रमित करने में सक्षम है।

एम्स ने जुटाए 63 डेल्टा वेरिएंट से संक्रमित मरीज के नमूने

ऐम्स ने 63 मरीजों के नमूने पर अध्ययन किया था। यह मरीज ऐसे थे जिन्होंने कोरोना वैक्सीन लगवा चुके थे जिसके बाद भी वह संक्रमित हुए। जिनमें 36 लोग ऐसे थे जिन्होंने अपनी दोनों डोज ले चुके थे।

जबकि 27 लोग ऐसे थे जिन्होंने सिर्फ एक डोज ली थी। इन मरीजों में 10 लोगों ने कोविशील्‍ड और 52 ने कोवैक्‍सीन लगवाई थी।

जिनमें 22 महिलाएं और 41 पुरुष थे। वैक्सीन लेने के बाद भी 63 मरीज संक्रमित हुए थे और किसी की भी जान की हानि नहीं हुई थी लेकिन ज्यादातर लोगों को लगभग 5 से 7 दिन तक काफी तेज बुखार रहा था और वजन कम हो गया था।

दोनों दोस्त के बाद भी 60% लोगों में डेल्टा वेरिएंट

अध्ययन में यह बात सामने आई है कि वैक्सीन के दोनों डोज लगने के बाद 60% लोगों में डेल्टा वेरिएंट जबकि एक डोज लेने वाले 77 % लोगों में डेल्टा वेरिएंट पाया गया है।

वैक्सीन के असर को भी कम कर देगा डेल्टा वेरिएंट

राष्ट्रीय योग नियंत्रण केंद्र और इंस्टिट्यूट ऑफ जिनोमिक एंड इंटीग्रेटिव बायोलॉजी ने मिलकर एक अध्ययन किया था जिसमें यह बात सामने आई थी कि कोरोना का डेल्टा वेरिएंट वैक्सीन के असर को कम कर दे रहा है साथ ही यह भी बात सामने आई है कि वैक्सीन फिर भी काफी कारगर साबित हुई है कोरोना वायरस के खिलाफ।

मरीज के बिगड़ते हालात का कारण रक्त के थक्के

चिकित्सक और डॉक्टरों का यह कहना है कि अस्पताल में बढ़ती मरीजों की संख्या का कारण यह है कि संक्रमित मरीज के छाती में रक्त के थक्के का जमाव जिसके कारण मरीज की हालत गंभीर हो जाती है।

साथ ही डॉक्टरों ने यह भी पता लगाया है कि आंतों की सप्लाई करने वाले रक्त वाहिकाओं में खून के थक्के बनने के कारण ही अधिकतर मरीजों में पेट दर्द का अनुभव की शिकायत आती है।

मुंबई के कार्डियोलॉजिस्ट ने यह बताया है कि पिछले साल उन्होंने पूरे साल भर में 3 से 4 मामले देखे थे जबकि अब 1 सप्ताह में एक मरीज सामने आ रहा है इसका कारण कोरोना का नया वेरिएंट हो सकता है।

यह भी पढ़े –

Published
Categorised as News