दिमाग अच्छा कैसे करें? दिमाग की सेहत अच्छी रखने के लिए रखें कुछ बातों का ध्यान।

दिमाग अच्छा कैसे करें

दिमाग अच्छा कैसे करें (Dimag Ko Acha Kaise Kare), केंसर व हृदय रोग के बाद लकवा या पक्षाघात ही सबसे अधिक मृत्यु का कारण बनता है। मनुष्य का मस्तिष्क शरीर की सभी क्रियाओं को नियंत्रित करता है।

दिमाग अच्छा कैसे करें (Dimag Ko Acha Kaise Kare)

दिमाग अच्छा कैसे करें
दिमाग अच्छा कैसे करें (Dimag Ko Acha Kaise Kare)

दिमाग अच्छा कैसे करें (Dimag Ko Acha Kaise Kare)

अगर मस्तिष्क की रक्त वाहिनियों में किसी कारणवश कोई रुकावट आती है, तो शरीर की क्रियाओं में भी गड़बड़ी पैदा हो जाती है। प्रायः यह गड़बड़ी लकवे का रूप लेती है। पक्षाघात आमतौर पर ढलती उम्र में होता है, परंतु हृदय रोगियों में यह युवावस्था में भी हो सकता है।

ऐसे लोग जो उच्च रक्तचाप या मधुमेह से पीड़ित हैं। इसी तरह जो लोग अधिक मोटे हैं और किसी प्रकार का व्यायाम नहीं करते, उन्हें भी यह मर्ज हो सकता है।

इसके अलावा धूम्रपान करने वालों और जिनके रक्त में वसा (कोलेस्ट्रॉल) की मात्रा अधिक पायी जाती है, उनमें भी इस मर्ज के होने का अंदेशा बना रहता है। इसी तरह जिन लोगों के पारिवारिक सदस्यों को पूर्व में लकवे की शिकायत हो चुकी हो, उन्हें भी यह रोग संभव है।

लकवा या पक्षाघात के प्रकार

लकवा या पक्षाघात कई प्रकार का हो सकता है। अनियंत्रित उच्च रक्तचाप या ‘एन्यूरिज्म’ में मस्तिष्क की किसी धमनी के फटने से होने वाला ‘ब्रेन हेमरेज’ सबसे खतरनाक किस्म का पक्षाघात है। इस मर्ज में अचानक लकवा मार जाने के साथ ही रोगी को तीव्र सिरदर्द, उल्टी और मिर्गी के झटके महसूस होते हैं।

उसे बेहोशी आ सकती है। वृद्ध लोगों और सामान्य रक्तचाप वाले लोगों में भी धमनियों के कमजोर होने के कारण लकवा मार सकता है। लकवे का दूसरा प्रमुख प्रकार मस्तिष्क की धमनियों में रक्त का थक्का (क्लाट) जम जाने से संबंधित है।

इसके अलावा हृदय या अन्य किसी धमनी से आकर मस्तिष्क धमनियों में रक्त का थक्का (क्लाट) जम जाने से संबंधित है। इसके अलावा हृदय या अन्य किसी धमनी से आकर मस्तिष्क की धमनियों में रक्त का थक्का फँस जाने से भी यह रोग हो सकता है, जिसे चिकित्सकीय भाषा में ‘ब्रेन इनफारक्शन’ कहते हैं।

इस प्रकार के लकवे में कुछ घंटों के अंदर एक तरफ के चेहरे, एक हाथ व पैर में कमजोरी भी आ जाती है, रोगी को मिर्गी के झटके भी लग सकते हैं, उसकी आवाज और आंखों की रोशनी भी प्रभावित हो सकती है।

कुछ मरीजों में पूर्ण लकवा लगने से पहले कुछ अंगों में कुछ क्षणों के लिए 24 घंटें तक कमजोरी महसूस होती है, जो इस अवधि के बाद स्वत: ही दूर हो जाती है। इस तरह के लक्षणों को खतरे की घंटी मानना चाहिए। यदि समय रहते उपचार करा लिया जाए, तो पूर्ण पक्षाघात से बचा जा सकता है।

लकवा की पहचान एवं परीक्षण

लकवा के रोगियों में मस्तिष्क के सी.टी. स्केन का परीक्षण करवाने के बाद ही पता चलता है कि लकवा रक्त का थक्का (ब्लड) क्लॉट) जमने से है या किसी धमनी के फटने से लकवा के अन्य कारणों को जानने के लिए रक्त में शर्करा (ब्लड शुगर) व रक्त में वसा की मात्रा से संबंधित परीक्षण भी करवाये जाते हैं। इसके साथ ही हृदय की जांच के लिए इकोकार्डियोग्राफी आदि परीक्षण करवाए जाते हैं।

लकवा का इलाज

लकवा या पक्षाघात का इलाज इसके प्रकार पर निर्भर करता है। ब्रेन हेमरेज के मरीज को पूर्ण आराम देने के साथ उसके रक्तचाप व रक्त शर्करा पर नियंत्रण जरूरी है। इसके अलावा मरीज को अन्य औषधियां भी दी जाती हैं। यदि कोई मरीज 13 दिनों का समय पार कर लें, तो उसके बाद सुधार की आशा बढ़ती जाती है।

दूसरे प्रकार के लकवा या पक्षाघात (जो खून का थक्का जमने के कारण होता है) का प्राथमिक इलाज ब्रेन हेमरेज की तरह ही होता है, पर इस तरह के लकवे में मरीज को शुरू के 1-4 घंटे के दौरान थक्का पिघलाने वाली दवाइयां दी जाएं, तो काफी हद तक उसे लकवे से होने वाली विकलांगता से बचाया जा सकता है।

लकवा या पक्षाघात से बचाव

पक्षाघात से बचने के लिए उच्च रक्तचाप व मधुमेह का उचित व नियमित उपचार करवाना आवश्यक है। समय-समय पर चिकित्सक के परामर्श से रक्त व अन्य परीक्षण भी करवाते रहने चाहिए।

धूम्रपान व तंबाकू के सेवन, शराब आदि मादक पदार्थों से परहेज जरूरी हैं नियमित व्यायाम और संतुलित आहार ग्रहण कर शरीर को आदर्श वजन के करीब रखने की कोशिश करनी चाहिए। जहां तक संभव हो तनावमुक्त रहने की कोशिश करें। जिंदगी के प्रति सकारात्मक सोच अपनाकर आप काफी हद तक तनावमुक्त रह सकते हैं।

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