Fever Kise Kahate Hain? और बुखार कितने प्रकार के होते?

Fever Kise Kahate Hain (बुखार किसे कहते हैं), ज्वर किसे कहते हैं, बुखार के लक्षण, बुखार कितने प्रकार के होते, नार्मल बुखार कितना रहता है, बार बार बुखार आना क्या कारण है और जाने इन सारे सबलो के जबाब। शरीर का तापमान 36.4°C से 37°C (97.6°F 98.6°F) के बीच होता है। 99°F से ज्यादा तापमान को ज्वर (Fever या बुखार) कहते हैं।

Fever Kise Kahate Hain

Fever Kise Kahate Hain

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Fever Kise Kahate Hain (बुखार)

शरीर का तापमान सामान्य से अधिक हो जाने को ज्वर (Fever या बुखार) कहते हैं। शरीर का तापमान शरीर की वह ऊष्मा है, जिसे डिग्री में मापा जाता है। मुख (oral) द्वारा मापा गया एक वयस्क (Adult) स्वस्थ व्यक्ति के शरीर का तापमान 36.4°C से 37°C (97.6°F 98.6°F) के बीच होता है। 99°F से ज्यादा तापमान को ज्वर (Fever या बुखार) कहते हैं।

बुखार के कारण (Causes of Fever)

  • Foreign protection e.g. inoculation with serum or vaccine, RIECT’S
  • Infection: Viral, Bacterial, Fungal, Parasitic.
  • Disease of the Nervous System (Meningitis)
  • Surgical trauma
  • Dehydration
  • Vascular: Acute Myocardial Infarction
  • Physical Agent: Heat stroke, Radiation
  • Endocrine: Thyrotoxicosis
  • Injury of any type, and Inflammation

बुखार (Fever) के प्रकार (Types of Fever)

सतत् ज्वर (Continuous Fever)

ऐसा ज्वर जिसमें दिन भर उच्च तापमान रहता तथा जिसमें दैनिक तापमान के उच्चतम तथा निम्नतम स्तर में अन्तर 2°F से अधिक नहीं होता है। एक प्रकार का ज्वर जो कई दिनों एवं सप्ताह तक सामान्य न हो तथा जिसमें सुबह व शाम के तापक्रम में अन्तर 2°F से अधिक न हो, जैसे- Lobar pneumonia, Urinary Tract Infection Typhoid etc. रोग में।

अल्पविरामी ज्वर (Remittent Fever)

ऐसा ज्वर जो कभी भी सामान्य तापमान तक नहीं उतरता बल्कि थोड़ा बहुत घटता-बढ़ता है। इस प्रकार के ज्वर में सुबह व शाम के तापमान में अन्तर 2°F से अधिक होता है, लेकिन सामान्य नहीं होता है, जैसे- Septicacmia।

सविरामी ज्वर (Intermittent Fever)

ऐसा ज्वर जिसमें तापमान दिन में सामान्य हो जाता है, परन्तु शाम को बढ़कर अपनी अधिकतम सीमा तक पहुँच जाता है। यह ज्वर नियत समय के बाद सामान्य हो जाता है तथा 1 दिन से 3 दिन तक हो सकता है। जैसे-Malaria, Kala Azar etc.

प्रलेपक (यक्ष्मक) ज्वर या दोलायमान ज्वर (Hectic or Swinging Fever)

एक प्रकार का ज्वर जिसमें उच्चतम तथा निम्नतम तापमान के बीच में अन्तर अत्यंत अधिक हो उसे Hectic Fever कहते हैं, जैसे- Septicaemia.

विलोम ज्वर (Inverse Fever)

इस प्रकार के ज्वर में तापक्रम सुबह अधिक रहता है तथा शाम को कम रहता है। ऐसे बुखार में शरीर का तापमान सुबह के समय अधिक हो जाता है और शाम के समय में कम होता है ऐसे बुखार को Inverse Fever कहते हैं।

पुनरावर्ती ज्वर (Relapsing Fever)

ऐसा रोग (ज्वर) जिसमें एक के बाद एक, ज्वर एवं सामान्य तापमान का समय आता है, जिनमें से प्रत्येक 5 से 7 दिन रहता है। इस प्रकार के ज्वर को पुनरावर्ती ज्वर कहते हैं।

संक्रमण ज्वर (Crisis Fever)

इस प्रकार के ज्वर में अधिक तापक्रम का कुछ। घण्टों से कुछ दिनों में सामान्य हो जाना Crisis Fever (संक्रमण हास) लाता है।

उपशमन (Lysis Fever)

इस प्रकार के ज्वर में तापमान धीरे-धीरे चढ़ता है तथा धीरे-धीरे उतरकर सामान्य होता है, इसे सामान्य होने में 2 दिन से एक सप्ताह का समय लग सकता है।

अवसामान्य तापक्रम (Subnormal Temperature)

जिस ज्वर में शरीर का मान सामान्य से कम हो जाता है, उसे अवसामान्य तापक्रम (Subnormal Temperature) है।

शीतकम्प ज्वर (Rigor)

यह ज्वर अचानक से कंपकंपी देकर शरीर का तापमान अति ज्वर (Hyperpyrexia) की स्थिति तक बढ़ा देता है, जैसे- Malaria Fever।

उच्च ज्वर (High Temperature)

इस प्रकार के ज्वर में शरीर का तापक्रम 103°F से 105°F के बीच रहता है।

अतिज्वर (Hyperpyrexia)

इस प्रकार के स्वर में शरीर (40.6°C) से अधिक होता है।

सीमित ज्वर (Moderate Fever)

इसमें शरीर का तापमान 37.8°C से 39.4°C के बीच बना रहता है।

निम्न ज्वर (Low Pyrexia)

इसमें शरीर का तापमान 99°F से 100°F (37.8°C से 39.4°C) से अधिक नहीं होता है।

अनियमित ज्वर (Irregular Fever)

इस प्रकार के ज्वर का Pattern अनियमित होता है, जिसे किसी विशेष वर्ग में वर्णन नहीं कर सकते हैं। यह सभी प्रकार के ज्वरों का मिश्रण (Combination) भी हो सकता है।

बुखार के लक्षण (Signs and Symptoms of Fever)

शरीर में बुखार से सभी तन्त्र प्रभावित होते हैं, जोकि निम्न प्रकार हैं।

  1. परिसंचरण तन्त्र (Circulatory System) :- बढ़ी हुई नाड़ी गति (Pulse Rate) एवं हृदय की धड़कन (Heart Rate)।
  2. श्वसन तत्र (Respiratory System) :- तेज (Rapid) एवं उथला (Shallow) श्वसन
  3. मूत्रोत्सर्जन तन्त्र (Urinary System) :- मूत्र (Urine) की घटी हुई मात्रा, मूत्र त्यागने में जलन होना, गहरे रंग का मूत्र आता।
  4. तन्त्रिका तन्त्र (Nervous System) :- सिर दर्द (Headache), बेचैनी (Restlessness). चिचिपन (Irritability), अनिद्रा (Insomnia), आक्षेप (convulsions), प्रलाप बड़वाना (Delirium)।
  5. पाचन तन्त्र (Digestive System) :- मुँह सूखना, अपाचन, अतिसार, सुधानाश (Loss of Appetite), बम्न (Vomiting), मितली (Nausea)।
  6. पेशीय कंकाल तन्त्र (Musculo skeleta System) :- बेचैनी (Male), थकान, शरीर में दर्द, जोड़ों में दद।
  7. त्वचीय तन्त्र (Integumentary System) :- अधिक पसीना आना, गर्म चौधे (Hot Flushes), रोंगटे खड़े होना (Goose Flesh), ठण्ड से कांपना (Shivering)।

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