गैर जमानती धाराएं कौन कौन सी हैं? गैर जमानती धारा क्या होती है?

गैर जमानती धाराएं कौन कौन सी हैं (Gair Jamanti Dhara Kon Kon Si Hai) यदि किसी से गैर जमानती अपराध हो जाता है तब उसको भारत के संविधान के अनुसार जमानत देने का प्रावधान नहीं है क्योंकि गैर जमानती अपराध ऐसे अपराध हैं जिनको संगीन जुर्म माना जाता है ऐसे अपराधियों को कोर्ट में जमानत नहीं दी जाती है।

गैर जमानती धाराएं कौन कौन सी हैं (Gair Jamanti Dhara Kon Kon Si Hai)

गैर जमानती धाराएं कौन कौन सी हैं
Gair Jamanti Dhara Kon Kon Si Hai

गैर जमानती धाराएं कौन कौन सी हैं (Gair Jamanti Dhara Kon Kon Si Hai)

यदि किसी अपराधी के द्वारा संगीन जुर्म किए जाते हैं जैसे कि राष्ट्रद्रोह, बलात्कार, हत्या इन अपराधों को संगीन जुर्म की कैटेगरी में रखा गया है इन अपराधों को करने पर पुलिस को किसी भी अपराधी को गिरफ्तार करने के लिए वारंट की आवश्यकता नहीं पड़ती।

ऐसे मुजरिम पुलिस के हाथ से निकल ना जाए उनको गिरफ्तार कर सकती है और उनको यह करने के लिए वारंट की आवश्यकता नहीं पड़ती। यदि कोई अपराधी इस तरह के जुर्म करता है उसे गैर जमानती अपराध की कैटेगरी में रखा गया है और पुलिस को यह भी अधिकार प्रदान किया गया है कि वह कोर्ट की अनुमति के बिना किसी भी अपराधी के खिलाफ तहकीकात कर सकती हैं। यदि अपने जमानत के लिए याचिका डाली है तो अदालत इस केस की संगीनता पर अपने विवेक से फैसला ले सकती है।

गैर जमानती धाराएं

भारतीय संविधान की दंड सहित में गैर जमानती अपराध में रेप, हत्या की कोशिश, डकैती, लूट, फिरौती के लिए अपहरण और गैर इरादतन हत्या जैसे अपराध आते है। गैर जमानती अपराध भारतीय संविधान की दंड सहित में IPC की धरा इस प्रकार है-

115, 121, 121क, 122, 123, 124, 124क, 125 से 128, 130 से 134, 136, 153क, 153ख, 161, 170, 194, 195, 231 से 235, 237, 238, 239, 244 से 251, 255 से 258, 267, 295, 295क, 302, 303, 304, 304ख, 305, 306, 307, 313 से 316, 326 से 329, 331, 333, 363क, 364, 365, 366क, 366ख, 367, 368, 369, 373, 379 से 382, 384, 386क, 364, 365, 366क, 366ख, 367, 368, 369, 373, 379 से 382, 384, 386, 387, 392 से 402, 406 से 409, 411 से 414, 436 से 438, 449 से 457, 461, 466, 468, 477क, 482, 483, 489क, 505

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