गठिया वात रोग तथा अस्थि-शोथ पर काबू पाने के ये है आसान उपाय

गठिया वात रोग तथा अस्थि-शोथ पर काबू पाने के ये है आसान उपाय, (अर्थरिटिस Arthritis) इन रोगों से बचने के लिए अथवा हो जाने पर, काबू पाने के लिए यदि हम अपने खान-पान के बारे में थोड़ा सचेत हो जाते हैं तो यह रोग नियन्त्रण में आ जाता है। आराम भी मिलता है।

गठिया वात रोग तथा अस्थि-शोथ पर काबू पाने के ये है आसान उपाय

गठिया वात रोग तथा अस्थि-शोथ पर काबू पाने के ये है आसान उपाय

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गठिया वात रोग पर काबू पाने के आसान उपाय

  • अपने भोजन में कैल्शियम, आयोडीन, विटामिन ‘डी’ और ‘बी’ को उचित स्थान दें। विटामिन ‘सी’ भी सहायक बनता है।
  • विटामिन ‘सी’ के सेवन से बात रोग से संबंधित वात कोशिकाओं को नष्ट किया जा सकता है।
  • यदि हमारे आहार में तांबायुक्त पदार्थ होंगे तो जोड़ों में होने वाली व्याधियां नहीं रहतीं। जोड़ों की मुरम्मत होती जाती है।
  • यदि हम अस्थियों के शोथ (अर्थरिटिस Arthritis) का उपचार चाहते हैं तो हमें प्रतिदिन विटामिन ‘ई’ की 600 1.U. लेनी चाहिए।
  • अस्थि-शोथ के रोग को शांत रखने के लिए विटामिन बी-3 लेने की भी सलाह रहती है। इसे बहुत लाभकर देखा गया है।
  • थायरॉयड अपना कार्य ठीक कर सके, इसके लिए भोजन में आयोडीन की कमी न आने दें।
  • अस्थि अपना कार्य ठीक प्रकार से कर सकें इसलिए भोजन एवं पोषण के साधनों में कमी न आने दें।
  • यदि किसी भी खाद्य पदार्थ से एलर्जी होना आप जान गए हों तो उसे अपने भोजन से विष मानकर निकाल दें। कभी सेवन न करें।
  • अस्थि-शोथ के रोगी को फलों तथा दूध से एलर्जी नहीं हुआ करती
  • पेड़-पौधों, बेलों, फूलों, खाद्य पदार्थों में से जिससे भी एलर्जी होती हो, उस माहौल या आहार से दूर रहने में भलाई है।
  • वात रोग का जल्दी से उपचार हो। इसे पुराना मत होने दें वरना यह दिल की प्रक्रिया पर भी प्रभाव करेगा।
  • वात रोग का प्रभावी अंग गर्म, सूजन भरा, लाल तथा दर्द करने वाला हो जाता है। ऐसे लक्षण होने पर शरीर को कम से कम चलाएं। मगर बन्द न करें।
  • जो व्यक्ति वात रोग होने पर बिल्कुल निष्क्रिय होता है उसे पछताना पड़ता है।
  • वात रोग का रोगी खुम्ब, पालक, बीन्स, मटर, उड़द, दही आदि न खाया करे।
  • यदि गठिया रोग से बचना हो या हो जाने पर कम दुख झेलना हो तो शराब, दही, उड़द, प्रोटीन, वसा, अण्डा, सूखे मेवे, मक्खन, खुम्ब न खाएं।
  • गठिया रोग में यूरिक एसिड बढ़ना बड़ी समस्या है। मांस आदि खाना बन्द करें।
  • ऐसे पदार्थ कम से कम खाएं, जिनमें प्रोटीन अधिक रहे।
  • यूरिक एसिड छोटे जोड़ों में जमा होकर सूजन व पीड़ा पैदा करता है।

यह रोग पुराना होने पर दर्द बढ़ जाती है व अंग भी टेढ़ा हो सकता है। सावधान रहें तथा अंगों के टेढ़ा होने या मुड़ने की स्थिति न आने दें। हम यदि इन कुछ बातों को ध्यान में रखकर अपने खान-पान में सुधार कर लें तो हम गठिया, वात रोग तथा अस्थि-शोथ से बचाव कर सकते हैं।

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अस्वीकरण – यहां पर दी गई जानकारी एक सामान्य जानकारी है। यहां पर दी गई जानकारी से चिकित्सा कि राय बिल्कुल नहीं दी जाती। यदि आपको कोई भी बीमारी या समस्या है तो आपको डॉक्टर या विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए। Candefine.com के द्वारा दी गई जानकारी किसी भी जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।

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