हाई जंप के नियम (ऊँची कूद), हाई जंप कूदने की क्रिया क्रिया विधि क्या है

विविध भारतीय खेलों की भांति ऊँची कूद का भी काफी महत्व है। हाई जंप के नियम बहुत सारे है। इस खेल में दो खंबे जमीन में गाड़कर उन पर एक क्रॉस बार तिरछी रखी जाती है जिस पर से खिलाड़ी को कूदना होता है। कूदने से पहले वह कुछ दूरी से दौड़ लगाता हुआ आता है तथा उछल कर उसे बिना क्रॉस बार हुए पार करना होता है। क्रास बार की ऊंचाई आवश्यकतानुसार घटाई बढ़ाई जा सकती है। यह क्रॉस बार लकड़ी या धातु की बनी होती है। क्रास बार की लंबाई – 13 फुट 1½ इंच (अधिकतम), क्रास बार का वजन- 4 पौंड 6 3/8 औंस (अधिकतम), स्तंभ पर लगे सहारे की लंबाई – 2 3/8 इंच, स्तंभ पर लगे सहारे की चौड़ाई -1 ½ इंच, सहारे के सिरे व स्तम्भ का अंतर – 3/8 इंच, अखाड़े की लम्बाई और चौड़ाई दोनों 5-5 मीटर होती है।

हाई जंप के नियम (High Jump Rules in Hindi)

हाई जंप के नियम

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जम्प लगाते समय यदि क्रॉस बार गिर पड़े तो वह जम्प सही नहीं मानी जाती। जम्प लेते समय दोनों भुजाओं को एक साथ पीछे से आगे, कुहनियों से मोड़कर ऊपर की ओर तेजी से ले जाया जाता है। इसी के साथ-साथ पीछे रखे पैर को भी ऊपर की ओर किक किया जाता है। टेक ऑफ फुट उस समय धरती को छोड़ता है जब फ्री लैग अपनी पूर्ण ऊंचाई तक पहुंच जाती है।

हाई जंप के प्रमुख नियम

  1. समस्त प्रशिक्षकों को पहले दोनों पैरों पर एक साथ अपने स्थान पर ही कूदने (हाई जंप के नियम) को कहेंगे। कुछ समय उपरान्त एक पैर पर कूदने के आदेश देंगे। ऊपर उछलते समय यह ध्यान रहे कि शरीर का ऊपरी भाग सीधा रहे एवं दस बार ही कूदा जाए। इस भाँति जिस पैर पर कूदने पर आसानी प्रतीत हो उसी को उछाल (उठाना) पैर (Take off foot) मानकर प्रशिक्षकों को निम्न दो भागों में बाँट देना चाहिए-
    (i) बायें पैर पर कूदने वाले तथा
    (ii) दायें पैर पर कूदने वाले ।
  2. दो रेखाओं में प्रशिक्षक अपने उछाल पैर (Take off foot) को आगे रखकर दूसरे पैर को पीछे रखेंगे। दोनों भुजाओं को एक साथ पीछे से आगे, कुहनियों से मोड़कर आगे, ऊपर की ओर तेज़ी से जायेंगे। इसके साथ ही पीछे रखे पैर को भी ऊपर की ओर किक (Kick) करेंगे और ज़मीन से उछल कर पुनः अपने स्थान पर वापस उसी पैर पर आयेंगे। इस समय उछाल पैर (Take off foot) वाले पैर का घुटना भी ऊपर उठते समय थोड़ा मुड़ा होगा, परन्तु शरीर का ऊपरी भाग सीधा रहेगा एवं आगे न जाकर ऊपर उठेगा तथा उसी स्थान पर वापस आयेगा। परन्तु यह ध्यान रहे कि ऊपर जाते समय कमर तथा आगे का पैर सीधा रखने का प्रयास किया जाए।
  3. प्रशिक्षकों को 45° पर बायें पैर वाले बायीं ओर दायें पैर से कूदने (हाई जंप के नियम) वाले दायीं ओर खड़े करके क्रॉस छड़ (Cross bar) को लगभग दो फुट (60 से.मी.) की ऊँचाई पर रखकर आगे चलते हुए ऊपर की भाँति ही उछलकर क्रॉस छड़ (Cross bar) को पार करेंगे और ऊपर जाकर नीचे आते समय उसी उछाल पैर (Take off foot) पर वापस आयेंगे। केवल भिन्नता इतनी होगी कि अपने स्थान पर वापस न आकर आगे क्रास बार को पार करके गिरेंगे तथा दूसरा पैर पहले पैर के आने के उपरान्त आगे 10 या 12 इंच (25 सेमी. या 30 सेमी.) पर आएगा तथा आगे चलते जायेंगे परन्तु यह ध्यान रखा जाए कि किक करते समय घुटना झुका हो। शरीर का ऊपरी भाग सीधा रखने का प्रयास किया जाए तथा दोनों भुजाओं को तेज़ी से ऊपर ले जायेंगे परन्तु जब दोनों हाथ कंधों की सीध में पहुँचेंगे तो रोक दिए जायेंगे।
  4. क्रास बार (Cross bar) की ऊँचाई को बढ़ायेंगे तथा प्रशिक्षकों को टेक आफ (Take off) पर आते समय टेक आफ फुट (Take off foot) को लम्बा करने को कहेंगे परन्तु यह ध्यान रखेंगे कि इस समय कूदते समय ध्यान क्रासवार (Cross bar) पर होगा, सिर शरीर के कुछ पीछे की ओर झुका होगा तथा पीछे के पैर को ऊपर करते समय पैर का पंजा ऊपर की ओर सीधा होगा। इस समय क्रास बार (Cross bar) को प्रशिक्षकों के सिर से दो फुट (60 सेमी.) ऊँचा रखेंगे तथा प्रत्येक को ऊपर बताई गई क्रिया के अनुसार क्रासबार को अपनी फ्री लेग (Free) से किक (kick) करने को कहेंगे। इसमें निम्न बातों को ध्यान में रखेंगे-
  • (i) दोनों भुजाओं को एक साथ तेज़ी से ऊपर ले जायेंगे।
  • (ii) टेक आफ फुट (Take off foot) उस समय ज़मीन छोड़ेगा जबकि फ्री लेग अपनी पूर्ण ऊँचाई तक पहुँच जाएगा।
  • (iii) ऊपर बताई गई प्रक्रिया को जोगिंग (Jogging) के साथ भी किया जायेगा ।
  1. क्रास बार (Cross bar) को दो फुट (60 सेमी.) ऊपर रखकर खिलाड़ी को नं. 3 की भाँति क्रास छड़ बार (Cross bar) पार करने को कहेंगे। केवल इतना अन्तर होगा कि क्रासबार (Cross bar) पार करने के उपरान्त अखाड़े में आते समय हवा में 90 डिग्री पर घूमेंगे। वायें पर से टेक आफ (Take off) लेने वाले बायीं तरफ घूमेंगे तथा दायें पैर पर टेक आफ (Take off) लेने वाले दायें तरफ घूमेंगे। इसमें निम्नलिखित बातों का विशेष ध्यान रखा जाएगा-
  • (i) खिलाड़ी उछाल (Take off) लेते समय ही न घूमें तथा
  • (ii) पूर्ण ऊँचाई प्राप्त करने से पहले न घूमें।
  1. इस बार अखाड़े में बार पार करने के पश्चात् आने की तकनीक से अवगत कराया जाएगा। क्रास बार (Cross bar) पार करने पर टेक आफ फ़ुट (Take off foot) में घूमने के साथ आते ही शरीर के ऊपरी भाग को कमर से आगे झुकायेंगे तथा दोनों बाजुओं को सीधा करेंगे जिससे टेक आफ फुट (Take off foot) एवं दोनों बाजू अखाड़े में एक साथ लाने का प्रयास किया जायेगा परन्तु यह ध्यान रहे कि फ्री लेग (Free leg) घुटने से झुकी होगी तथा ऊँचाई पर रखेंगे। यह अखाड़े में स्पर्श नहीं करेगी।
  2. दोनों बाजुओं से 45° पर खड़े होकर क्रास बार (Cross bar) से लगभग 18 इंच (45 सेमी.) की दूरी पर एक रेखा खींच कर टेक आफ फुट (Take off foot) लेने का स्थान निश्चित करेंगे। इसके उपरान्त ऊपर बताई गई विधि को दुहरायेंगे परन्तु निम्नलिखित बातों का ध्यान रखेंगे-
  • (i) अंतिम चरण बड़ा होगा तथा एड़ी प्रथम और इसके पश्चात् पंजे पर आते हुए दोनों बाजुओं को एक साथ प्रयोग करेंगे।
  • (ii) क्रास बार (Cross bar) पार करने से पहले घूमने की आदत न डालें। क्रास छड़ (Cross bar) की ऊँचाई इस प्रकार रखी जाए कि खिलाड़ी आसानी से क्रास बार पार न कर सकें।
  • (iii) टेक आफ (Take off) पैर को ज़मीन छोड़ने के तुरन्त बाद घुटने से मोड़ कर सीने की ओर लाना चाहिए।
  1. टेक आफ फुट (Take off foot) को आगे रखकर खड़े होंगे पर यह ध्यान रहे कि शरीर का भार एड़ी पर होना चाहिए तथा फ्री लेग को पीछे रखेंगे। दोनों हाथों को एक साथ तेज़ी से आगे लायेंगे और फ्री लेग (Free legs) को ऊपर की ओर किक (Kick) करेंगे जिससे कि शरीर का समस्त भाग ज़मीन से ऊपर उठ जाये।
  2. ज़मीन पर चूने की समानान्तर रेखा डालेंगे। एथलीट इस चूने की रेखा के दाहिनी ओर खड़े होकर उपर्युक्त प्रक्रिया को करेंगे। ऊपर हवा में पहुँचते ही बायीं ओर Take off (टेक आफ) को घुमायेंगे, चेहरा नीचे करेंगे तथा पिछले पैर को किक (Kick) के साथ ऊपर उठायेंगे। इसमें मुख्यतः यह ध्यान रखा जाये कि फ्री लेग (Free leg) को सीधी किक (Kick) किया जाए। टेक आफ लेग (Take of leg) को सीधा किक कर के घुटना मोड़ कर (Bend) कर ऊपर ले जायेंगे। खिलाड़ी क्रास बार (Cross bar) पार करने के उपरान्त अखाड़े में रोल कर सकते हैं क्योंकि टेक आफ किक (Take of kick) तेज़ होने के कारण संतुलन भी बिगड़ सकता है।
  3. क्रास बार के सामानान्तर एक डेढ़ फुट से 2 फुट (45 सेमी. से 60 सेमी.) की दूरी पर रेखा खीचेंगे। इस रेखा से 30° पर दोनों पैर रखकर खड़े होंगे तथा टेक आफ फुट (Take off foot) को आगे निकालते हुए मध्यम गति से आगे को भागेंगे। जहाँ पर तीसरा पैर आये वहाँ निशान लगा दें और अब उस स्थान पर दोनों पैर रखकर क्रास बार (Cross bar) की ओर चलेंगे और ऊपर बताई गई प्रक्रिया को दोहरायेंगे। क्रास बार की ऊँचाई एथलीट की सुविधा अनुसार बढ़ाते जायेंगे। इसमें निम्न बातों का विशेषकर ध्यान रखा जाए-
  • (i) ऊपर सीधे उठना चाहिए। पूरी ऊँचाई क्रास बार (Cross bar) तक पहुँचने तक शरीर को मुड़ने से रोकना चाहिए।
  • (ii) फ्री लेग (Free leg) की किक (Kick) कूलहे से होनी चाहिए।
  • (iii) क्रास बार (Cross bar) के ऊपर पहुँचते ही सिर को टेक आफ (Take off) पैर व बाजू को अखाड़े (Pit) की ओर चाहिए। घुमा देना
  • (iv) अखाड़े में गिरते समय रोल (Roll) करने पर अधिक बल दिया जाए जिससे कि चोट लगने से बचा जा सके।

इसी प्रकार पाँच कदम व सात कदम से प्रारम्भ करेंगे। कूद प्रारम्भ करते समय जैसे क्रास बार (Cross bar) के पास आते जायेंगे, पैरों की तेजी व कदम (Step) बढ़ते जायेंगे। विशेष कर अंतिम तीन कदमों में शरीर पीछे की ओर झुका होगा (हाई जंप के नियम)।

स्ट्रेडल विधि

अप्रोच रन

7 से 9 कदम दौड़ नियन्त्रित गति से (धीमी गति से) प्रारम्भ करेंगे तथा बाद में गति बढ़ाते जायेंगे। 35° से 40° के कोण से प्रारम्भ करेंगे।

कूदने की क्रिया

अंतिम कदमों में तेज़ी अधिक होगी तथा घुटनों में झुकावट के साथ ही साथ कदमों की दूरी भी बढ़ती जाएगी। अंतिम कदम से पहले का कदम टेक आफ (Take off) से दूसरा कदम (Penultimate stride) सबसे लम्बा कदम होगा।

टेक आफ

टेक आफ फुट (Take off foot) आगे ऐड़ी को ज़मीन पर रखेगा तथा समस्त शरीर का भार पीछे को होगा। शरीर एवं दोनों भुजाएँ पीछे रहेंगी। यहाँ से ऊपर (हाई जंप के नियम) की ओर शरीर का जाना प्रारम्भ हो जाएगा। गुरुत्व केन्द्र टेक आफ फुट (Take off foot) के ऊपर के पास होगा। दूसरे पैर को थोड़ा मोड़कर टेक आफ फुट (Take off foot) के बगल से एक साथ तेज़ी से पैर को घुटने से सीधा करते हुए ऊपर को लेकर जायेंगे। टेक आफ पैर (Take off foot) को भी घुटने से सीधा करेंगे। दोनों भुजाएँ ऊपर तथा आगे की ओर बढ़ेंगी परन्तु यह ध्यान अवश्य रहे कि दोनों भुजाएँ कंधों तक आकर रुक जायें जिससे कि शरीर ज़मीन से ऊपर उठ सके।

उड़ान (Flight)

क्रास बार के पास आने पर आगे वाली जाँघ घुटने से थोड़ी झुकी होगी तथा उसका पैर तथा दायां हाथ एक साथ क्रास बार के ऊपर से जायेगा। इसके साथ ही दायां कंधा (बायें पैर से कूदने वालों के लिए) व सिर ऊपर से जायेगा। इसी समय कूल्हा (Hip) घूमेगा तथा टेक आफ (Take off) वाला पैर पीछे से बाहर की ओर घूमता हुआ ऊपर आयेगा।

ज़मीन / गद्दे पर गिरना

ऊँचाई (हाई जंप के नियम) पर रखे क्रास बार (Cross bar) को पार करने पर जम्पर किस प्रकार ज़मीन गद्दे पर गिरता है, अधिक महत्त्व नहीं रखता है परन्तु अच्छी तकनीक में गिरते समय दायें कंधे को पहले नीचे आने के साथ ही उसी पर समस्त शरीर के भार को साथ रोल (Roll) करेंगे।

हाई जंप (ऊँची कूद) में ध्यान देने योग्य बातें

  1. अंतिम कदम में गुरुत्वाकर्षण केन्द्र नीचे जाएगा।
  2. टेक आफ (Take off) के समय ऊपर जाने के लिए दोनों भुजाओं का प्रयोग एक साथ करेंगे।
  3. दायें पैर को ऊपर की ओर तेजी से किक करेंगे।
  4. टेक आफ (Take off) पैर को पार करते ही दायां पैर घुटने से सीधा हो जाएगा।
  5. टेक आफ फुट (Take off foot) को घुटने से झुका कर कंधे की ओर लायेंगे।
  6. परन्तु क्रास बार (Cross bar) तक पहुँचते समय सीधे होंगे। बायें तरफ नहीं झुकेंगे। दायें पैर व दायें हाथ को भी क्रास बार (Cross bar) पार करते ही नीचे की ओर झुकायेंगे तथा टेक आफ (Take off) पैर को बाहर की ओर खोलेंगे।

हाई जंप (ऊँची कूद) (स्ट्रैडल) हेतु कुछ विशेष क्रियाएँ

  1. दायें पैर को हवा में किक (kick) करके ऊपर जाना तथा दोनों भुजाओं को एक साथ ऊपर ले जाना।
  2. पाँच कदमों में दौड़कर आना तथा बिना क्रास बार के ऊपर हवा में उठना तथा टेक-आफ (Take off) पैर पर ही पुनः वापस आना।
  3. क्रास बार कम ऊँचाई पर रखकर कूदते समय शरीर का ऊपरी भाग सीधा रखेंगे तथा बायें पैर को घुटने से झुकाकर ऊपर ले जायेंगे एवं दायें पैर पर समस्त शरीर के भार को लाते हुए आयेंगे।
  4. क्रास बार कम ऊँचाई पर रखकर दायें पैर को अखाड़े में रखेंगे। वायें पैर को मुड़ी हुई दशा में क्रास बार के ऊपर रखेंगे। टेक आफ (Take off) वाले बायें पैर को ऊपर उठायेंगे तथा दायें हाथ को दूसरी ओर नीचे ज़मीन की ओर झुकायेंगे तथा क्रास बार (Cross bar) को पार करके पीठ को ज़मीन पर लगायेंगे।
  5. बायें हाथ से सहायता लेकर दायें पैर में लोहे का जूता बाँध कर ऊपर की ओर किक करना। इससे मांसपेशियाँ शक्तिशाली बनेंगी।
  6. दायें पैर को ऊपर बाक्स (Box) पर रखकर टेक आफ फुट (Take off foot) को भुजाओं के सहारे (एड़ी को केवल) ऊपर उठाना तथा नीचे लाना।
  7. बाक्स (Box) के ऊपर पीठ पर लेटकर दोनों भुजाओं को सीधा करके पीछे सहारा देंगे तथा कमर से नीचे का भाग हवा में सीधा होगा। पैरों को सीधा रखकर एक पैर ऊपर, एक नीचे ले जायेंगे। इसे पैरों में लोहे के जूते बाँध कर भी किया जा सकता है।
  8. मैदान पर लेट कर सिर ऊपर की ओर होगा एवं दोनों भुजाएं कन्धों की सीध में होंगी। दायें पैर से बायें हाथ को एवं बायें पैर से दायें हाथ को छुएँगे। इससे पुट्ठों में लचीलापन आयेगा।
  9. बायें हाथ का सहारा लेकर दायें पैर को सीधा रखेंगे। बायें पैर पर नीचे बैठेंगे तथा ऊपर आएँगे।

अभ्यास हेतु कार्यक्रम

बेमौसम

  1. समस्त शरीर हेतु व्यायाम,
  2. तकनीक को सीखने का अभ्यास
  3. भारोत्तोलन, परिपथ प्रशिक्षण (Circuit Training)।
  4. जिम्नास्टिक कार्य।
  5. छोटी तेज़ दौड़ (Sprint), बाधा दौड़ (Hurdle race) 30 से 60 मीटर। 3 बाधा 10 बार।

मुख्य उद्देश्य (Main aim) इस अभ्यास का मुख्य उद्देश्य ताकत तथा लचकीलापन लाना है।

पूर्व- प्रतियोगिता

  1. 20% विभिन्न प्रकार की छलाँगें, भार जेकिट के साथ लगाना।
  2. 20% तकनीकी कार्य-10 से 20 कूद कम ऊँचाई से जाते हुए।
  3. 20% जिम्नास्टिक तथा परिपथ प्रशिक्षण ।
  4. 20% तकनीकी कार्य-मध्यम ऊँचाई पर दोषों को दूर करने के लिए।
  5. 20% छोटी तेज़ दौड़ (60-80 मी.), 5 बाधा 5 से 7 बार।

मुख्य उद्देश्य (Main aim)

प्रतियोगिता अवधि

  1. 30% लचकीलापन लाने हेतु अभ्यास स्ट्रेचिंग (Strecthing) कम ऊँचाई पर हर्डल (Hurdle) करना।
  2. 40% तकनीकी कार्य, कम ऊँचाई से अधिक ऊँचाई 10-20 बार जम्प।
  3. 10% वालीबॉल, बास्केटबॉल का खेल।
  4. 20% स्प्रिंट स्टार्ट (Sprint start) 10-सात दिन में एक दिन ट्राइल्ज़ (Trials)।

मुख्य उद्देश्य (Main aim)-मस्तिष्क एवं मांसपेशियों का समन्वय (Neuro muscular Coordination) बढ़ाना।

फासवरी फलॉप

अप्रोच रन-7, 9 या 11 कदम, इस विधि में दौड़ की गति स्ट्रेडल (Straddle) की अपेक्षा अधिक तेज़ होती है। इसमें अर्ध गोलाकार चक्र के ऊपर दौड़ते हैं। कदमों के बीच की दूरी स्ट्रेडल (Straddle) की अपेक्षा कम होती है। साधारण दौड़, ज़मीन पर पैर पूरा लगता है।

अन्तिम कदम क्रास बार (Cross bar) के समानान्तर होंगे। दोनों भुजाएँ तालमेल के लिए तैयार होंगी। शरीर के टेक आफ फुट (Take off foot) से थोड़ा पीछे को झुका होगा।

टेक आफ

स्ट्रेडल तकनीक (Straddle techniques) की अपेक्षा इसमें टेक आफ (Take off) पैर को घुटने से कम झुकाते हैं तथा टेक आफ (Take off) तेज़ी से लेते हैं। दायां पैर व घुटने झुकी हुई दशा में ऊपर लाते हैं। टेक आफ फुट (Take of foot) क्रास बार (Cross bar) के समानान्तर होगा। दायें पैर को अन्दर की ओर मुड़ते हुए ऊपर लायेंगे। यह दोनों कार्य अर्धगोलाकार पथ पर दौड़ने से अच्छे आते हैं। ऊपर उठते समय पीठ क्रासबार की ओर होगी। दोनों कन्धे भी ऊपर उठेंगे तथा कन्धों व पुट्ठों के बीच में पीछे की ओर थोड़ा झुकाव रहेगा। दायां कन्धा व दायां चेहरा क्रासबार की ओर थोड़ा झुका होगा। आँखें क्रास बार को देखती हुई दशा में होंगी।

हवा में गतिविधि

जमीन छोड़ने के उपरान्त कूदने वाले खिलाड़ी की पीठ क्रास बार की ओर तथा दोनों टांगें घुटनों से थोड़ी झुकी हुई, दोनों के बीच से थोड़े फासले की दशा में हवा में लटकती हुई स्थिति में होंगी। दोनों भुजाएँ शरीर के बगल में एवं मुड़ी हुई दशा में होंगी।

क्रास बार पर पहुँचते समय सिर क्रास बार के ऊपर पीछे की ओर झुकेगा। दोनों कन्धों व कमर क्रास बार के ऊपर के पास होंगे तथा पेट को झुकायेंगे एवं दोनों पैरों को घुटने से मोड़ते हुए ऊपर उठायेंगे। पहले दोनों घुटनों को ऊपर उठायेंगे। तदोपरान्त दोनों टांगों को ऊपर शरीर शीघ्र उठाकर सीधा करेंगे। ज़मीन-गद्दों पर पहले दोनों कन्धे आयेंगे तथा दोनों पैर पीछे की ओर जायेंगे।

अप्रोच रन (Approach run) स्ट्रेडल (Straddle) की अपेक्षा तेज़ होता है। प्रारम्भ से ही तेज़ी से शुरू करते हैं। यह निम्नलिखित तीन प्रकार का होता है-

  1. अर्ध गोलाकार।
  2. अंग्रेज़ी में जे (J) अक्षर के आकार का।
  3. सीधी रेखा में।

नं. 2 की विधि उचित प्रतीत होती है क्योंकि इसमें दोनों आँखें क्रास बार को देखती हुई आगे बढ़ती हैं।

इस विधि में टेक आफ क्रास बार (Cross bar) से दूर 100 से 110 से. मी., स्ट्रेंडल (Straddle) में 80 से 90 से. मी., टेक आफ फुट (Take of foot) बाहर होगा तथा फ्री लेग (Free leg) अन्दर होगी। बायें पैर से कूदने वाले व्यक्ति को दायीं ओर से आना होगा।

ध्यान रखने योग्य बातें

  1. अप्रोच रन में तेज़ी नियंत्रित होनी चाहिए, अधिक तेज़ नहीं
  2. टेक आफ (Take off) लेते समय पैर को आगे अधिक नहीं लेंगे और न ही पीछे की ओर अधिक झुकेंगे।
  3. टेक आफ (Take off) तेज़ी से लेंगे तथा शरीर को ऊपर की ओर उठायेंगे। क्रास बार (Cross bar) की ओर नहीं झुकेंगे।
  4. टेक आफ (Take off) के समय दोनों कन्धे एवं भुजाओं को ऊपर उठायेंगे, परन्तु क्रास बार (Cross bar) पर जाते समय भुजायें अधिक ऊँचाई पर नहीं होंगी
  5. क्रासबार (Cross bar) को पार करते समय कमर में पीछे की ओर झुकाव होगा। क्रास बार पार करते समय शरीर बैठने की स्थिति में नहीं होगा।
  6. पहले शरीर को ऊपर सीधा उठायेंगे, कमर को क्रास बार के बराबर आने पर झुकायेंगे, पहले नहीं। शरीर ऊपर उठेगा, कमर से पीछे झुकेगा, इसके उपरान्त दोनों पैरों को सीधा करेंगे।

अभ्यास हेतु कुछ विशेष व्यायाम

  1. धीमी गति से दौड़कर हवा में उछलना तथा शरीर को ऊपर उठा कर कंधे की ओर लायेंगे। ज़मीन पर टेक आफ फुट (बायें पैर पर वापस आयेंगे। इस विधि में एड़ियाँ तथा बाद में पंजे को भगाने की क्रिया न होकर सीधे पंजे पर ही टेक आफ (Take off) लेंगे।
  2. एक निश्चित दूरी से अर्धगोलाकार में आकर ऊपर उठना, ऊपर की भाँति । इस समय गद्दों के ऊपर पुट्ठों पर नीचे आयेंगे।
  3. दोनों पैरों से क्रास बार (Cross bar) की ओर पीठ रखकर कूद कर कमर को पीछे की ओर झुका कर पैरों को ऊपर उठाना।
  4. कम दूरी से पूर्ण विधि से क्रास बार (Cross bar) कम ऊँचाई पर रखकर कूदना तथा गद्दों पर कंधों के ऊपर पीछे को रोल करना।
  5. पूर्ण दूरी से आना परन्तु क्रास बार को 7 से 8 फुट (2.135 मी. से 2.44 मी.) रखकर बिना पर किये हुए टेकआफ से उठना और घूमना एवं क्रास बार को देखना। यह क्रिया शरीर को ऊपर सीधा उठाने के लिए है तथा अप्रोच रन को सुधारने के लिए है।
  6. हवा में बिना क्रास बार के आकर टेक आफ के उपरान्त शरीर को घुमाकर ऊपर ले जायेंगे। ठीक इसी समय दूसरे व्यक्ति द्वारा कमर को आगे की ओर दबाया जायेगा। कंधे पीछे की ओर झुकेंगे। कमर को अधिक मोड़ने के लिए इसका अभ्यास निम्न प्रकार करते हैं-
  1. पीठ के ऊपर लेट कर कमर को ऊपर उठायेंगे। केवल कंधों व पैरों को ज़मीन पर रखेंगे। यह क्रिया इसलिए की जाती है कि क्रास बार पार करते समय इन मांसपेशियों पर तनाव पड़ता है।
  2. एक साथी दूसरे साथी की पीठ पर रखकर दोनों भुजाओं को सीधा रखेंगे। आगे की ओर एक साथी झुकेगा। ऊपर का साथी पुट्ठों से ऊपर की ओर धकेलेगा तथा दूसरे साथी की गर्दन के ऊपर से आते हुए कलाबाज़ी (Somersault) लगाएगा।
  3. दीवार के सहारे लगे हुए बार (Bar) को पकड़कर लटकना तथा दायें पैर को घुटने से मोड़ कर बायें कंधे की दशा में भेजना। इस क्रिया को लोहे के जूते के साथ भी कर सकते हैं।
  4. दायें पैर को बाक्स (Box) के ऊपर रखेंगे एवं कंधों पर कुछ भार रखकर बायें पैर को बिना झुकाये हुए ऊपर बार-बार ले जाएंगे। टखने की मांसपेशियों को मजबूत करने के लिए यह क्रिया की जाती है।

साधारण नियम

क्रास बार- केवल गोलाकार क्रास बार 25 से 30 सेमी. का है। यह अन्तर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में चलता है। अप्रैल 1985 से तिकोना क्रास बार बंद हो गया है। क्रास बार की लम्बाई 3.64 से 4.00 मीटर तक होगी जिसका अधिकतम भार 2.2 किलो होता है।

टेक आफ का क्षेत्र-टेक आफ का क्षेत्र कम से कम 15 मीटर की लम्बाई का होता है। अखाड़ा-गद्दे 5 मीटर लम्बे एवं 4 मीटर चौड़े होते हैं।

साधारण नियम-1986 I.A.A.F. नियम के अनुसार ( According to 1986 LA.A.F. Rules) आयोजकों द्वारा प्रारम्भ करने से पूर्व क्रास बार की ऊँचाई बताई जायेगी तथा प्रत्येक बार में कितनी ऊँचाई बढ़ाई जायेगी। 2 सेमी. से कम नहीं तथा डिकेथल (Decathold) एवं हेप्टाथलन (Heptathlon) में 5 सेमी. से कम नहीं बढ़ेगी। टेक ऑफ (Take off) एक पैर से ही लेंगे।

कूदने वाला खिलाड़ी नंगे पैर या कीलदार जूते (Spikes) पहनकर किसी भी स्थिति में कूद सकता है। केवल जूते के तलवे की मोटाई 13 सेमी. से अधिक नहीं होनी चाहिए। एक व्यक्ति को डेढ़ मिनट का समय कूदने को मिलेगा। इसी के अन्दर उसको दौड़ प्रारम्भ कर देनी चाहिए। जब केवल 2 या 3 कूदने वाले रह जाएँगे, उस समय 3 मिनट, केवल एक ही कूदने वाला रहने पर 5 मिनट का समय मिलेगा।

बराबर आने की दशा में प्रथम स्थान के लिए क्रास बार को 2 सेमी.. ऊपर नीचे करेंगे तथा प्रत्येक ऊँचाई (हाई जंप के नियम) पर एक अवसर देंगे। अन्य स्थानों के लिए जिसके कम फाऊल होंगे, उसी को विजेता घोषित करेंगे। पास देने का कोई महत्त्व नहीं होगा। यदि इसके उपरान्त भी निर्णय नहीं होता तो दोनों को 2 स्थान देंगे तथा 3 स्थान न देकर 4 स्थान दिया जायेगा।

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Kamlesh Kumar

मेरा नाम कमलेश कुमार है। मैं मास्टर इन कंप्यूटर एप्लीकेशन (Master in Computer Application) में स्नातकोत्तर हूं और CanDefine.com में एडिटर के रूप में कार्य करता हूँ। मुझे इस क्षेत्र में 3 वर्ष का अनुभव है और मुझे हिंदी भाषा में काफी रुचि है। मेरे द्वारा स्वास्थ्य, कंप्यूटर, मनोरंजन, सरकारी योजना, निबंध, जीवनी, क्रिकेट आदि जैसी विभिन्न श्रेणियों पर आर्टिकल लिखता हूँ और आपको आर्टिकल में सारी जानकारी प्रदान करना मेरा उद्देश्य है।

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