एकीकृत बाल विकास सेवा योजना क्या है, इस योजना का उद्देश्य क्या है

एकीकृत बाल विकास सेवा योजना क्या है:- 2 अक्टूबर, 1975 को भारत में ‘एकीकृत बाल विकास सेवा योजना’ (Integrated Child Development Service Scheme) का प्रारंभ बच्चों, गर्भवती महिलाओं एवं स्तनपान कराने वाली माताओं को पोषण सहायता उपलब्ध कराने हेतु किया गया था। फ्लैगशिप योजना के रूप में क्रियान्वित की जा रही यह योजना बचपन संरक्षण एवं विकास की दृष्टि से विश्व की सबसे बड़ी एवं अद्वितीय योजना है।

एकीकृत बाल विकास सेवा योजना क्या है

एकीकृत बाल विकास सेवा योजना क्या है

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एकीकृत बाल विकास सेवा योजना क्या है

पिछले दो दशकों के अनुभव से पता चलता है कि सबसे जरूरतमंदों को कई बार यह सुविधा उपलब्ध नहीं हो पाती है और जब यह उपलब्ध भी होती है, तो यह अधिकांशतः के लिए अनुपूरक की अपेक्षा प्रतिस्थापक का कार्य करती है। इस कार्यक्रम की समीक्षा से पता चलता है कि, जहां इस प्रोग्राम के अधीन क्षेत्रों में स्तनपान कराने वाली 25% माताओं ने अपने बच्चों को 6 माह तक खाद्य अनुपूरकों (Food Supplement) से लाभ पहुंचाया, वहीं गैर आईसीडीएस क्षेत्रों में यह अनुपात केवल 19% रहा। यह मूल्यांकन इस कठोर सत्य की ओर संकेत करता है कि आईसीडीएस प्रोग्राम से प्राप्त लाभ प्रभावी रूप में पोषण स्तर को उन्नत नहीं कर पाएं हैं।

वर्तमान में केंद्रीय महिला और बाल विकास मंत्रालय देश में कुपोषण के उच्च स्तर के दृष्टिगत आईसीडीएस कार्यक्रम का पूरी तरह कायाकल्प कर रहा है। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय, नीति आयोग, स्वास्थ्य और शिक्षा मंत्रालय और अन्य हितधारकों के साथ तालमेल से कुपोषण की समस्या से निजात हेतु व्यापक स्तर पर कार्य कर रहा है। आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को स्मार्टफोन/टैबलेट दिए जा रहे हैं, जिससे राज्य सरकारों को नई आईटी आधारित प्रणाली अपनाने में मदद मिले सके। कुल मिलाकर इस योजना को और भी दक्ष तथा प्रभावशाली बनाया जा रहा है, जिससे आज को सुधार कर कल के भारत को संवारा जा सके।

योजना का उद्देश्य

  • 6 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के पोषण स्तर तथा स्वास्थ्य में सुधार करना।
  • बच्चों का समुचित शारीरिक, मनोवैज्ञानिक और सामाजिक विकास करना।
  • बाल मृत्यु दर, अस्वस्थता, कुपोषण और स्कूली शिक्षा अधूरी छोड़ने वाले बच्चों की दर में कमी लाना।
  • बाल विकास को बढ़ावा देने हेतु विभिन्न विभागों के बीच नीति तथा कार्यान्वयन में कारगर तालमेल स्थापित करना।
  • बच्चों की स्वास्थ्य व पोषाहार संबंधी जरूरतों की देखरेख के लिए माताओं को पोषण एवं स्वास्थ शिक्षा प्रदान कर उनकी क्षमता को बढ़ाना।

योजना की सेवाएं

इसके तहत 6 सेवाएं प्रदान की जाती हैं –

  1. अनुपूरक पोषण,
  2. पोषण व स्वास्थ्य संबंधी शिक्षा,
  3. स्कूली शिक्षा से पूर्व अनौपचारिक शिक्षा,
  4. प्रतिरक्षण,
  5. स्वास्थ्य जांच
  6. संदर्भ (Referral) सेवा।

इन 6 सेवाओं में से स्कूल पूर्व अनौपचारिक शिक्षा केवल 3-6 वर्ष के बच्चों के लिए है, जबकि पोषण एवं स्वास्थ्य शिक्षा महिलाओं (15 45 वर्ष) के लिए है। शेष चारों सेवाएं 6 वर्ष से कम उम्र के बच्चों तथा गर्भवती/ स्तनपान कराने वाली माताओं दोनों के लिए है।

प्रमुख तथ्य

  • बजट 2021-22 में आईसीडीएस के लिए 20105 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।
  • यह योजना महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा क्रियान्वित की जा रही है, परंतु इसके अनेक घटक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा भी संचालित किए जाते हैं।
  • इसके तहत आंगनवाड़ियों का डिजिटलीकरण किया जा रहा है

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