जूडो के नियम, पोशाक, खिलाड़ी और जूडो खेल की पूरी जानकारी

जूडो के नियम, पोशाक, खिलाड़ी और जूडो खेल की पूरी जानकारी हिंदी में दी गई है। जूडो मूलतः आत्म रक्षा का एक साधन है। हाल ही मैं यह खेल लोकप्रिय हुआ है 1964 में इसे ओलिम्पिक के खेल के रूप में भी मान्यता मिली। इसके नियम शक्ति और सन्तुलन के मेल पर निर्धारित हैं। जूडो (Judo Rules in Hindi) में बेहतर दाँव लगाने वाला और थ्रो करने वाला जीतता है।

जूडो के नियम (Judo Rules in Hindi)

जूडो के नियम

यह भी पढ़े – कुश्ती के नियम, कुश्ती के प्रकार और कुश्ती के दाव पेच हिंदी में

जूडो के नियम

गद्दा

अन्तर्राष्ट्रीय मुकाबलों में जूडो अखाड़ा 9 मीटर भुजा का हरे रंग का वर्गाकार गद्दा होता है। इसके चारों ओर एक मीटर चौड़ी वर्गाकार लाल पट्टी होती है। यह खतरे के क्षेत्र का संकेत देती है इसके बाद हरे रंग का सुरक्षा क्षेत्र होता है। इससे घायल होने का खतरा टल जाता है। कुल अखाड़ा 19 मीटर का वर्ग होता है।

अधिकारी

जूडो मुकाबलों में एक रैफरी और दो जज होते हैं। रैफरी मुकाबले अथवा संघर्ष के क्षेत्र में रहता है और खेल करवाता है दो जज होते हैं ये सुरक्षा क्षेत्र में आमने-सामने के कोनों पर तैनात होते हैं और रैफरी को सहायता देते हैं।

जूडो मुकाबले में वजन के आधार पर प्रतियोगियों का वर्गीकरण किया जाता है। यह निम्नलिखित श्रेणियों में होता है-लाइट वेट : 63 किलो, लाइट मिडल वेट : 70 किलो; मिडल वेट : 80 किलो; लाइट हैवी वेट 93 किलो; हैवी वेट 93 किलो से अधिक; खुला : इससे अधिक का वजन।

शुरुआत

प्रतियोगी एक-दूसरे से 4 मीटर दूर आमने-सामने खड़े होते हैं खड़े-खड़े झुककर वे एक-दूसरे का अभिवादन करते है और रैफरी के ‘हाजिमे’ कहने पर मुकाबला शुरू करते हैं। लाल अथवा खतरे के क्षेत्र के भीतर हरकत तब शुरू कर दी जानी चाहिए।

समय

मुकाबले का समय पहले ही निश्चित कर लिया जाता है। न्यूनतम समय 3 मिनट और अधिकतम समय 20 मिनट हो सकता है। ‘माटे’ कहकर कुछ समय के लिए मुकाबला बन्द करवा दिया जाता है। यह निम्नलिखित हालतों में होता है- यदि प्रतियोगी संघर्ष क्षेत्र से बाहर निकलने की स्थिति में हो फाउल के बाद यदि बीमार और चोट खा जाए: पोशाक को ठीक करने के लिए ऐसे दाँव तुड़वाने के लिए जिनका कोई असर अथवा लाभ किसी को न हो रहा हो।

मुकाबला खत्म होने पर प्रतियोगी अपने शुरू के स्थान पर आ एक-दूसरे के सामने खड़े हो जाते है, और निर्णय के बाद खड़े-खड़े ही एक-दूसरे के प्रति झुकते है। मुकाबला अनिर्णीत रहे तो रैफरी प्रतियोगियों को खड़ा कर देता है और ‘हान्तेई पुकारता है। जज तब सफेद अथवा लाल पताका ऊपर उठाते है। इससे विजेता का संकेत मिलता है। वे दोनों ही पताकाएँ उठा दें तो इससे पता चलता है कि यह मुकाबला अनिर्णीत रहा है।

अंक बनाना

प्रतियोगियों का आकलन गिराने की तकनीक (नागेवाजा) और दाब मारने की तकनीक (मातामेवाजा) के आधार पर किया जाता है, नियम भंग करने को भी नोट किया जाता हैं। निर्णय पर उसका असर भी पड़ता है इप्पन (एक अंक) पा लेने पर तो प्रतियोगी साफ-साफ जीत जाता है। इप्पन निम्नलिखित हालतों में खिलाड़ी को मिलता है-

  1. काफी ताकत से विरोधी को गिरा देने पर
  2. विरोधी को गदे से ऊपर उठाकर कंधे तक ले जाने पर,
  3. अच्छी प्रभावी जकड़ करने पर किसी पकड़ को, 30 सेकंड तक बनाए रखने पर

यदि प्रतियोगी इप्पन पाने में थोड़ा चूक जाता है तो उसे ‘वाजाआरी’ दिया जा सकता है। दो बाजाआरी एक इप्पन के बराबर होते हैं। यदि एक प्रतियोगी एक वाजाआरी बनाता है परन्तु विरोधी उसके विरुद्ध गम्भीर नियमोल्लंघन करता है तो भी उसे स्पष्ट विजेता माना जाता है।

जज मुकाबले अनिर्णीत रहने की घोषणा कर सकते हैं अथवा मुकाबला दूसरे खिलाड़ी के न आने से भी खोया जा सकता है। चोट लगने पर अथवा खिलाड़ी बीमार होने पर अथवा दुर्घटना होने पर रैफरी और जज परिणाम के बारे में फैसला करते है।

अखाड़े की सीमा से बाहर

मुकाबला अखाड़े की सीमा के भीतर होना चाहिए, यदि किसी पकड़ के दौरान रैफरी महसूस करे कि प्रतियोगी गद्दे से बाहर निकलने ही वाले है तो वह उन्हें आदेश दे सकता है कि वे हरकत बन्द कर दें। वह उनको खींचकर भीतर ला दुबारा मुकाबला शुरू करवा सकता है।

पोशाक

जूडो की पोशाक सफेद अथवा साफ-व्हाइट होनी चाहिए।

  1. जैकिट से नितम्ब ढके होने चाहिए और आम तौर पर दोनों तरफ 18 सेंटीमीटर ऊपर की तरफ स्लिट होनी चाहिए। सेंटीमीटर चौड़े मजबूत लैप भी इसके होते हैं। बगलों पर मजबूती से सिलाई की गई होती है। इसी प्रकार कमर से नीचे भी मजबूत सिलाई होती है। स्लीव अथवा बाजू ढीले होने चाहिए और बाजुओं अथवा फोरआर्म के आधे से अधिक भाग ढँपा होना चाहिए।
  2. ट्राउजर्स ढीली-ढाली होनी चाहिए और टाँग के आधे से नीचे का हिस्सा ढँपा होना चाहिए 3. जैकिट कमर पर पेटी से बंधी होनी चाहिए । पेटी इतनी लम्बी होनी चाहिए कि शरीर के दोनों ओर दुहरी हो जाए। यह पेटी बड़ी और वर्गाकार गाँठ से बाँधी जाती है। इसके सिरे 15 सेंटीमीटर होते है।

सफेद अथवा लाल पट्टी से प्रतियोगी अलग-अलग पहचाने जा सकते हैं। प्रतियोगी निम्नलिखित हालत में ग्राउंड तकनीक इस्तेमाल कर सकते हैं, यदि विरोधी खिलाड़ी को गिराने के बाद आक्रामक सीधे नवाजा’ मे आ जाता है, यदि एक प्रतियोगी गिर जाता है, यदि विरोधी को खड़ी हालत में दबोच लिया जाता है अथवा ‘लॉक’ कर दिया जाता है।

फाउल

  1. प्रतियोगी जिस टाँग पर सहारा लेकर के आक्रमण कर रहा होता है उसे अन्दर से धकेलना (यद्यपि आक्रामक के इन्स्टैप को हुक करने की इजाजत होती है।
  2. विरोधी की टाँग लपेट करके उसे गिराने की कोशिश करना। इसे ‘क्वारत्सुगेक’ कहते हैं।
  3. विरोधी पीठ से चिपटा हो और दोनों में से कोई भी दूसरे की हरकतों पर काबू रखता हो तो जानबूझकर पीठ के भार गिरना,
  4. आक्रमण न करके शारीरिक स्थिति से बहुत ही रक्षात्मक रुख अपनाना,
  5. विरोधी को नीचे मैदान पर खींचना ताकि ग्राउंड वर्क शुरू किया जा सके,
  6. नेवाजा के लिए विरोधी का पाँव अथवा टाँग को पकड़ लेना, हाँ अत्यधिक चुस्ती से ऐसा करना गलत नहीं होता,
  7. विरोधी के चेहरे पर सीधे ही हाथ, बाजू, पाँव अथवा टाँग रखना और उसकी ‘जुडोगी’ मुख में लेना पीठ के बल नीचे गिरे होने पर विरोधी की गरदन टाँग से काबू में लिए होना, उस हालत में जबकि वह किसी तरह उठ खड़ा हुआ हो अथवा घुटनों को इस हालत में ले आया ऊपर उठ खड़ा हो। कुहनी के जोड़ के अलावा का सेत्सुवाजा (अथवा जोड़ पर लाक लगाना) विरोधी की रीढ़ की हड्डी अथवा गरदन के लिए खतरा पैदा करना।

विरोधी यदि पीठ के भार गद्दे से बाहर पड़ा हो तो उसे गद्दे पर लाने के लिए ऊपर उठाना। अंगुलियों को पीछे की ओर तोड़ना। जानबूझकर स्वयं अथवा विरोधी को अखाड़े से बाहर करना (जूडो के नियम) लगातार विरोधी की पोशाक को एक ही तरफ से दोनों हाथों से पकड़े रहना अथवा पेटी-जैकिट का निचला भाग एक हाथ से पकड़ना वा आस्तीन के भीतरी भाग को अथवा पैट के निचले भाग को एक हाथ से पकड़ना।

विरोधी की अंगुलियों में अंगुलियाँ फँसाकर निरन्तर खड़ा रहना जानबूझकर पोशाक खराब करना रैफरी की बात पर ध्यान न देना। अपमानजनक मुद्राएँ बनाना अथवा अशिष्ट बातें बोलना। जूझे की भावना के विपरीत कोई बात करना।

दण्ड

रैफरी को बार पेनल्टी देने का अधिकार होता है। इन पर क्रमशः अधिक सजा दी जाती है। ये हैं-शिडो, बुई, कीकोकु और हैं-सोकोमेक (मुकाबले से बाहर करना)। कीकोकु और हैसोको के लिए जरूरी होता है कि रैफरी जजों से सलाह ले, और बहुमत का फैसला पा ले तो हो दण्ड दे गलती करने वाले के विरुद्ध ही पहले तीनों प्रकार की गलतियाँ गिनी जाती है जबकि मुकाबले के अन्त में जब सारे मुकाबले का जायजा लेते हैं।

FAQ’s

Q1: जूडो अखाड़े का आकार बताएँ?

Ans: यह अखाड़ा वर्गाकार होता है। इसकी एक भुजा 16 मीटर होती है। परन्तु वह क्षेत्र जिसमें मुकाबले होते हैं 9 मीटर वर्गाकार होता है। इसके चारों ओर एक मीटर चौड़ी पट्टी होती है।

Q2: जूडो में कितने अधिकारियों की जरूरत होती है?

Ans: इनमें एक रैफरी और दो जज होते हैं। रैफरी उसी क्षेत्र में रहता है जहाँ मुकाबले चल रहे होते है।

Q3: जूडो को इप्पन (पूरा अंक) किन हालतों में मिलता है?

Ans: ऐसा निम्नलिखित हालतों में होता है-1. विरोधी को काबू में ले करके 30 सेकंड तक उसे काबू में लिए रखना, 2. विरोधी को गद्दे से ऊपर उठाकर कंधे तक ले जाने पर, 3. विरोधी को पूरी ताकत में गिराने पर।

Q4: वाजाआरी का मतलब क्या है?

Ans: इसका अर्थ आधा अंक होता है। यदि जूडोका इप्पन नहीं ले पाता तो उसे इतना अंक दे दिया जाता है।

Q5: जूडो में प्रमुख फाउल क्या है?

Ans: विरोधी जुडोका के शरीर को गलत तरीके से पकड़ने, रक्षात्मक रुख अपनाने, उसकी पोशाक गलत तरीके से पकड़ने के अलावा रैफरी की बात पर ध्यान न देने, अपमानजनक मुद्राएँ बनाने और अशिष्ट बात बोलने को भी फाउल मानकर जूडोका को दण्ड दिया जाता है।

यह भी पढ़े – मुक्केबाजी के नियम, रिंग अथवा अखाड़ा, मुक्केबाजी की पूरी जानकारी

Follow us on Google News:

Kamlesh Kumar

मेरा नाम कमलेश कुमार है। मैं मास्टर इन कंप्यूटर एप्लीकेशन (Master in Computer Application) में स्नातकोत्तर हूं और CanDefine.com में एडिटर के रूप में कार्य करता हूँ। मुझे इस क्षेत्र में 3 वर्ष का अनुभव है और मुझे हिंदी भाषा में काफी रुचि है। मेरे द्वारा स्वास्थ्य, कंप्यूटर, मनोरंजन, सरकारी योजना, निबंध, जीवनी, क्रिकेट आदि जैसी विभिन्न श्रेणियों पर आर्टिकल लिखता हूँ और आपको आर्टिकल में सारी जानकारी प्रदान करना मेरा उद्देश्य है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *