ज्वालामुखी का निर्माण कैसे होता है? ज्वालामुखी कितने प्रकार के होते हैं

ज्वालामुखी का निर्माण कैसे होता है (Jwalamukhi Ka Nirmaan Kaise Hota Hai) :- ज्वालामुखी का अर्थ है जिसके मुख से आग निकलती हो। ज्वालामुखी विस्फोट अचानक होता है, जिसके द्वारा मैग्मा, गैस, राख, धुआँ, कंकड़, पत्थर आदि तेजी के साथ बाहर निकलते हैं। इन सभी वस्तुओं का निकास एक संकरी नली द्वारा होता है। जिसको निकास नली कहते हैं। मैग्मा धरती पर आने के लिए एक छिद बनाता है। इस छिद्र को विवर (क्रेटर) कहते हैं। जब ज्यालामुखी का उद्गार शान्त हो जाता है और उस विवर में पानी इकट्ठा हो जाता है तो क्रेटर झील का निर्माण होता है।

ज्वालामुखी का निर्माण कैसे होता है (Jwalamukhi Ka Nirmaan Kaise Hota Hai)

ज्वालामुखी का निर्माण कैसे होता है
Jwalamukhi Ka Nirmaan Kaise Hota Hai

ज्वालामुखी का निर्माण कैसे होता है

भीतर के पदार्थ बाहर निकल कर धरातल पर जमा होते रहते हैं, जिससे शंकु के आकार का ढेर बन जाता है। इसे ही ज्वालामुखी पर्वत कहते हैं। कभी-कभी धरती की सतह पर लम्बी दरार बन जाती है, जिससे पृथ्वी के अंदर का मैग्मा रुक-रुककर लावे के रूप में बाहर आता रहता है। इससे धरातल का विस्तृत क्षेत्र लावे की कई परतों से ढक जाता है और लावा-पठार का निर्माण होता है। भारत में दक्कन के पठार का निर्माण भी इसी प्रकार हुआ है।

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ज्वालामुखी का उद्गार क्यों होता है?

जहाँ पर भू-तल कमजोर होता है. एस्थिनोस्फीयर का मैग्मा उस भाग को तोड़कर बाहर निकलने का प्रयास करता है, जो हमें ज्वालामुखी के रूप में दिखाई देता है। चूल्हे पर रोटी या कुकर में दाल पकते समय आप देखेंगे तो पाएँगे कि जब रोटी फूलते-फूलते अधिक फूल जाती है तो एक छिद्र हो जाता है। जिससे वाष्प बाहर निकलने लगती है और कभी-कभी तो रोटी का छिद्र इतना बड़ा हो जाता है कि दरार बन जाती है और रोटी की वाष्प बाहर निकलने लगती है।

आपने दीपावली में बारात में अन्य उत्सव पर्व / त्योहारों को मनाते समय अनार पटाखा को जलते हुए देखा होगा अनार के भीतर से जलते हुए तेजी के साथ पदार्थ जैसे गैस, चिंगारी, राख बाहर निकलते है और ऊँचाई तक जाकर फिर घरती (भू-पटल) पर आकर गिरते रहते हैं। इसी प्रकार ज्वालामुखी उद्गार के समय धरती के भीतर से मैग्मा, लावा, राख आदि निकल कर बाहर जमा होते हैं। इससे ज्वालामुखी पर्वत और लावा पठार का निर्माण होता है।

ज्वालामुखी कितने प्रकार के होते हैं?

सक्रियता के आधार पर ज्वालामुखियों को सामान्यत 3 वर्गों में रखा जाता है-

1. सक्रिय ज्वालामुखी (Active Volcano)

सक्रिय ज्वालामुखी हमेशा क्रियाशील रहते हैं। इनके मुख से लावा हमेशा निकलता रहता है इटली के एटना एवं स्ट्राम्बोली नामक सक्रिय ज्वालामुखी इसके उदाहरण है। स्ट्राम्बोली ज्वालामुखी भूमध्यसागर में एक द्वीप पर स्थित है, जिससे सदैव उदगार होने से आसपास का क्षेत्र प्रकाशमान रहता है। इसी कारण से इस ज्वालामुखी को भूमध्य सागर का प्रकाश स्तम्भ कहते हैं। संसार का सबसे ऊँचा सक्रिय ज्वालामुखी दक्षिणी अमेरिका का कोटोपैक्सी है।

2. सुप्त ज्वालामुखी (Dormant Valcand)

जब ज्वालामुखी का विस्फोट बहुत कम अर्थात कभी-कभार होता है तो उस ज्वालामुखी को सुप्त ज्वालामुखी कहते हैं। जापान का फ्यूज तथा इटली का विसूवियस’ सुप्त ज्वालामुखी के उदाहरण हैं।

3. शान्त ज्वालामुखी (Extinct Volcano)

इस प्रकार के ज्वालामुखी से कभी उदगार हुआ था, किन्तु अब ज्वालामुखी विस्फोट की सम्भावना नहीं रहती है। इसका मुख ज्वालामुखी पदार्थों से भर कर बन्द हो जाता है। इसके मुख क्रेटर में पानी भर जाने के कारण क्रेटर झील बन जाती है। म्यामार का पोपा तथा संयुक्त राज्य अमेरिका के ओरेगन राज्य की क्रेटर झील इसके प्रमुख उदाहरण है।

विश्व के प्रमुख ज्वालामुखी

  • एटना व विसूवियस (इटली),
  • फ्यूजीयामा (जापान),
  • पोपा (म्यौंमार),
  • बैरन (भारत),
  • मेयॉन (फिलीपीन्स),
  • क्राकाटाओ (इण्डोनेशिया) आदि

ज्वालामुखी के क्षेत्र

ज्वालामुखी और भूकम्प क्षेत्र की प्रमुख पेटियाँ (मेखलाएँ) हैं-

  1. परिप्रशान्त महासागर की पेटी
  2. मध्य महाद्वीपीय पेटी
  3. मध्य अटलांटिक पेटी

जहाँ मोड़दार पर्वत हैं अधिकतर ज्वालामुखी क्षेत्र वहीं पाए जाते हैं क्योंकि पृथ्वी की पपड़ी का एक भारी किनारा जब दूसरे हल्के किनारे के नीचे घुसकर पिघलता है, तब मैग्मा बन कर ज्वालामुखी के रूप में बाहर आ जाता है। ज्वालामुखी तथा भूकम्प लगभग एक ही क्षेत्र में पाए जाते हैं। (मानचित्र 39 पर देखिए

ज्वालामुखी का मानव जीवन पर प्रभाव

लाभकारी प्रभाव

  • लावा से बनी काली मिट्टी में गन्ना तथा कपास की फसलों की अच्छी पैदावार होती है।
  • ज्वालामुखी विस्फोट से बहुमूल्य खनिज पदार्थ जैसे लौह खनिज आदि ऊपर आ जाते हैं।
  • ज्वालामुखी क्षेत्र में गर्म जल स्रोत मिलते हैं, जिसमें गंधक घुला रहता है, जो चर्म रोग के लिए लाभकारी है।
  • अधिक तापमान वाली भाप को संचित कर भूतापीय बिजली कर निर्माण होता है।
  • क्रेटर झील के बनने पर पर्यटक स्थल बनते हैं तथा झील का पानी सिंचाई के काम आता है।

हानिकारक प्रभाव

  • ज्वालामुखी विस्फोट से निकलने वाले लावा के नीचे वनस्पति तथा जीव-जन्तु दब जाते हैं।
  • ज्वालामुखी के कारण समीपवर्ती भागों में प्रायः भूकम्प भी आते हैं।
  • लावा प्रवाह से सैकड़ों किमी तक खेत, मकान आदि नष्ट हो जाते हैं।
  • समुद्र में ज्वालामुखी विस्फोट से जल उबलने लगता है जिसे “बड़वानल” कहा जाता है। इसके फलस्वरूप समुद्री जीव जैसे मछलियों मर जाती हैं।
  • ज्वालामुखी उद्गार के समय कई जहरीली गैसे निकलती हैं जो वायुमण्डल को प्रदूषित करती हैं।

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