कब्ज के लक्षण एवं उपचार? कब्ज किस कारण से होता है?

अनियमित रूप से मल त्याग होना तथा कठोर मल का मुश्किल से बाहर निकलना कब्ज कहलाता है। कब्ज के लक्षण एवं उपचार (Kabj Ke Lakshan Aur Upchar), इस भाग दौड़ भरी जिंदगी में कब्ज की समस्या बहुत बढ़ती जा रही है ऐसा इसलिए होता है क्योंकि अपने व्यस्त जीवन में आप अपने खान-पान का सही तरीके से ध्यान नहीं रख पाते हैं ना ही आप सही समय पर खाना खाते हैं और खाने में प्रयोग की गई चीजें सही नहीं होती। कब्ज क्या होता है। कब्ज के घरेलू उपाय। कब्ज में क्या खाये।

कब्ज के लक्षण एवं उपचार (Kabj Ke Lakshan Aur Upchar)

कब्ज के लक्षण एवं उपचार

कब्ज के लक्षण एवं उपचार (Kabj Ke Lakshan Aur Upchar)

आज के समय में बहुत से ऐसे लोग हैं जो कब्ज की समस्या का सामना करते हैं कब्ज की समस्या होने पर बहुत सारी प्रॉब्लम आती हैं जैसे कि सिरदर्द होना खाने में रुचि ना होना और सबसे बड़ी समस्या पेट का फूलना बना रहता हैं। कब्ज की समस्या एक-दो दिन में नहीं होती यह लंबे समय से अनियमित भोजन करने से होती है।

कब्ज के लक्षण (Constipation Symptoms)

  1. सिरदर्द (Headache)
  2. खाने में रुची न होना (Anorexia)
  3. पेट फूलना (Abdominal Distension)
  4. सुस्ती (Lethargy)
  5. जीभ पर सफेद परत (Coated Tongue)
  6. उल्टी (Vomiting)

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कब्ज के कारण

  1. आँतों में रूकावट होने से।
  2. कार्बनिक पदार्थ का उपयोग करने से जैसे कार्सीनोमा, डाइवर्टीकुलम आदि।
  3. अपर्याप्त मात्रा में द्रव लेने से।
  4. अपर्याप्त अनियमित प्रतिबन्धित आहार लेने से
  5. सही समय पर भोजन करने की आदत न होना।
  6. लम्बे समय तक विश्राम अवस्था में रहना।
  7. व्यायाम की कमी।
  8. मानसिक चिन्ता।
  9. भावनात्मक व्यवधान।
  10. भय।
  11. मल त्याग की असामान्य स्थिति।
  12. कुछ औषधियाँ लेने से जैसे- Atropin, Opium ग्रुप
  13. अत्यधिक चाय, काफी के उपयोग से
  14. एकान्त की कमी तथा स्थान परिवर्तन।
  15. आँतों की कोई शल्य क्रिया।
  16. कोई शारीरिक विकार जैसे-कैन्सर, हृदय रोग, तीव्र संक्रमण रोग
  17. गुदा नाल में कोई विकार
  18. उदरीय दीवार का लटकना।
  19. आँतों में अवशोषण कम होने से।
  20. मलाशय की कोई शल्यक्रिया।

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कब्ज के उपचार

  1. पर्याप्त मात्रा में आहार ग्रहण करना।
  2. पर्याप्त मात्रा में भोजन में रेशेदार पदार्थों को उपयोग में लेना।
  3. नियमित रूप से भोजन करना।
  4. एकान्त प्रदान करना।
  5. व्यायाम करना।
  6. गुदवर्ती, एनीमा से बचाव करना।
  7. रोगी को बैठी हुई स्थित में रखना
  8. चिन्ता, भय, क्रोध को दूर करना चाहिये।
  9. कब्ज से बचाव के लिये रोगी को स्वास्थ्य शिक्षा देनी चाहिये।
  10. पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ ग्रहण करना।

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