कराटे के नियम, पोशाक, खिलाड़ी, रैफरी और कराटे खेल की पूरी जानकारी

कराटे के नियम, पोशाक, खिलाड़ी, रैफरी और कराटे खेल की पूरी जानकारी हिंदी में दी गई है। खाली हाथों में लड़ने का तरीका है लड़ने की शारीरिक और मानसिक तैयारी का भी यह एक 1 तरीका है। खेलों की प्रतियोगिता की दृष्टि से यह सामरिक वर्ग के खेलों में आती है। कराटे (Karate Rules in Hindi) प्रतियोगिताएँ स्पारिंग मुकाबलों के रूप में होती है इन मुकाबलों में कुछेक कराते तकनीकों को तो इस्तेमाल करने की इजाजत ही नहीं होती। और कुछ का इस्तेमाल बहुतायत से होता है।

कराटे के नियम (Karate Rules in Hindi)

कराटे के नियम

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प्रतियोगी घायल न हो इस दृष्टि से सभी ठोकरें, मुक्के (पंच), प्रहार, आघात (स्ट्राइक) बड़े ही नियंत्रित ढंग से काम में लाए जाते हैं और आम तौर पर सम्पर्क से पहले ही इनको रोक लिया जाता है।विरोधी जुडोका के शरीर को गलत तरीके से पकड़ने, रक्षात्मक रुख अपनाने, उसकी पोशाक गलत तरीके से पकड़ने के अलावा रैफरी की बात पर ध्यान न देने, अपमानजनक मुद्राएँ बनाने और अशिष्ट बात बोलने को भी फाउल मानकर जूडोका को दण्ड दिया जाता है।

कराटे के नियम

क्षेत्र

चपटा वर्गाकार क्षेत्र जिसमें कहीं कोई रुकावट नहीं होती। इसकी एक भुजा 8 मीटर होती हैं।

अधिकारी

मुकाबले के क्षेत्र में एक रैफरी के अलावा चार जज होते हैं। इनमें से हरेक एक-एक कोने पर बैठा होता है। आरबाइटर अर्थात् मध्यस्थ इस क्षेत्र के एक तरफ बैठे होते हैं, उसी के निकट टाइमकीपर, रिकार्डकीपर अथवा प्रशासक भी बैठे होते हैं।

रैफरी

वह मैच चलाता है और अंक देता है। वही फाउल होने की घोषणा करता है। वही चेतावनी देता है और अनुशासन रखता है। यदि मैच बराबर रहता है तो वही निर्णायक वोट डालता है, जरूरत होने पर वह मैच का समय भी बढ़ा सकता है । जज उसे सलाह देते हैं। यदि एक जज संकेत करे तो रैफरी चाहे तो उसकी ओर ध्यान न दे परन्तु यदि दो अथवा अधिक जज संकेत करते हैं तो यह जरूरी होता है कि वह मैच रोककर उनकी बात सुने। मैच को निलम्बित करने और खत्म करने का अधिकार केवल उसे ही होता है।

जज

हरेक जज के पास एक लाल और एक सफेद झंडी होती है। एक सीटी भी होती है। जिससे वह संकेत करता है। ये संकेत निम्नलिखित सूचनाओं के लिए होते हैं – (क) अंक बनना, (ख) फाउल अथवा फाउल की आशंका होने पर, (ग) प्रतियोगी के मैच क्षेत्र से बाहर निकल जाने पर। जज रैफरी से असहमत होने पर इसका भी संकेत देते हैं। यदि उनकी सर्वसम्मति हो जाए तो वे रैफरी के निर्णय की उपेक्षा भी कर सकते हैं। वे लगातार प्रतियोगियों के प्रदर्शन का मूल्यांकन करते हैं और बहुमत के आधार पर विजेता की घोषणा करते हैं।

मध्यस्थ

प्रोटेस्ट होने पर निर्णय देता है। टाइमकीपर तथा रिकार्डकीपर को निर्देश देता है।

खेल

रैफरी अपनी स्थिति लेता है और प्रतियोगी एक-दूसरे के आमने-सामने खड़े हो जाते हैं उनके पाँवों की अंगुलियाँ आरम्भ रेखा के पास होती हैं। वे वहाँ पर खड़े होकर एक-दूसरे को अभिवादन करते हैं। ‘रैफरी के ‘शोबु इप्पन हाजिमे’ पुकारने पर मैच शुरू हो जाता है।

मैच रोकना

यदि रैफरी देखता है कि इप्पन हो गया है तो वह ‘सरमेड’ संकेत देता है और प्रतियोगी आरम्भ रेखा के निकट आ जाते हैं। रैफरी अपने स्थान पर लौट दायाँ अथवा बायाँ हाथ उठाकर विजेता का संकेत देता है। और यह भी बताता है कि कौन सी स्कोरिंग तकनीक उसने इस्तेमाल की है प्रतियोगी एक-दूसरे को अभिवादन करते हैं और मैच समाप्त हो जाता है।

यदि रैफरी देखता है कि ‘वारी’ स्कोर किया गया है तो वह ‘देग’ पुकारता है और प्रतियोगी पुनः आरम्भ रेखा के पास आ जाते हैं। रैफरी तब अपनी पुरानी स्थिति के पास आ जाता है और वाजाअरी की घोषणा करता है। इसके साथ वह स्कोरर की ओर संकेत करता है और इस्तेमाल की गई स्कोरिंग तकनीक को भी बताता है। रैफरी से ‘हाजिमे’ पुकारे जाने पर मैच पुनः शुरू हो जाता है। हाँ, यदि एक प्रतियोगी ने दो ‘वाजाअरी’ लिए हो तो ऐसा नहीं होता।

अस्थायी रोक

रैफरी निम्नलिखित हालत में ‘येम’ पुकारने के बाद मैच रोक सकता है-

  • यदि प्रतियोगी मारधाड़ शुरू कर देते है और किसी प्रकार की प्रभावी तकनीक का इस्तेमाल नहीं करते; यदि गतिरोध पैदा हो जाता है, यदि एक या दोनों ही प्रतियोगी मैच क्षेत्र से बाहर हो जाते है; यदि वह चाहता है कि एक प्रतियोगी अपनी पोशाक संभाल से यदि वह देखता है कि कोई प्रतियोगी फाउल करने ही वाला है; यदि किसी को चोट लग जाती है अथवा बीमार हो जाता है; यदि कोई नियम तोड़ा जाता है; यदि कोई जज संकेत करता है।
  • जरूरत होने पर रैफरी जज से सलाह-मशविरा कर सकता है और पुनः मैच शुरू करने से पहले प्रतियोगियों को आरम्भ रेखा पर जाने को कह सकता है। यदि यह रुकावट दस सेकंड से अधिक है तो इसे मैच समय में नहीं गिना जाता।
  • यदि बिना कोई इप्पन स्कोर हुए ही मैच खत्म हो जाता है तो रैफरी ‘सोरमेड’ बोल देता है। वह तथा अन्य प्रतियोगी अपने स्थान पर आ जाते है। रैफरी जजों को कुछ समय देता है ताकि वे अपना फैसला कर सकें और तब ‘हाँतेई’ पुकारकर अपनी सीटी भी बजा देता है। तब झण्डियों के संकेत देकर जज अपना मत व्यक्त करते हैं। जरूरत होने पर रैफरी अपना निर्णायक मत देते हैं।

टीम मैच

दो टीमों के एक-एक प्रतियोगी आपस में मुकाबला करते हैं और जिस टीम के अधिक प्रतियोगी जीत जाते हैं, उनको विजेता घोषित कर दिया जाता है। दूसरी शैली के मुकाबले में एक विजेता खिलाड़ी दूसरी टीम से नये खिलाड़ी से मुकाबला करता रहता है और ऐसा तब तक करता रहता है जब तक कि वह हार नहीं जाता। दोनों ही हालतों में टाई को तोड़ने के लिए यह देखा जाता है कि अधिक ‘इप्पन’ किस टीम के हैं।

यदि इप्पन भी बराबर हों तो देखा जाता है कि ‘वाजाअरी’ अधिक किस टीम के है और तब भी निर्णय न हो तो किस टीम ने अंकों के आधार पर अधिक विजय प्राप्त की है यह देखा जाता है। फाउल अथवा प्रतियोगिता से बाहर कर दिया जाना ‘इप्पन’ गिना जाता है। यदि फिर भी टाई बनी रहती है तो अतिरिक्त मैच होता है।

अतिरिक्त मैच

यदि इनका आयोजन होता है तो इसके लिए एक टीम का चुना खिलाड़ी दूसरी टीम के चुने खिलाड़ी से भिड़ता है। अतिरिक्त मैच दो मिनट तक होता है। ऐसा तब तक चलता है जब तक कि कोई टीम जीत नहीं जाती। दो बार के मैच के बाद हर प्रतियोगी को बदल दिया जाता है और उनके स्थान पर टीम के दूसरे सदस्य लाए जाते हैं। लेकिन अनेक मैचों के बाद भी यदि परिणाम में दोनों टीमें बराबर ही रहती है तो आपस में बैठक करके जज फैसला करता है कि किस टीम ने मैच जीता है।

वेश

प्रतियोगियों को रंगीन पेटी ‘आदी’ और सफेद कराते-गी पहननी चाहिए। इससे यह पता लगता है कि वे किस ग्रेड के खिलाड़ी हैं। पहचानने के लिए एक खिलाड़ी तो अपनी पेटी से सफेद तागा और दूसरा लाल रंग का तागा बाँध लेता है। किसी प्रकार का कोई बैज अथवा धातु की पट्टी नहीं बाँधी जानी चाहिए। यदि जज अनुमति दें तभी बचच उपकरण अथवा वस्तुएं पहनी जानी चाहिए।

समय

मैच की अवधि दो मिनट होती है पर आम तौर पर इसको तीन अथवा पाँच मिनट तक बढ़ा दिया जाता है। चोट लगने पर मैच रोकने में जो समय लगता है और जाँच अथवा पूछताछ के लिए जो समय लगता है उसको इस समय में शामिल नहीं किया जाता। टाइमकीपर मैच के अन्त में घंटे अथवा ‘बजर’ से इसकी सूचना देता है। ऐसा मैच समाप्त होने से तीस सेकंड पहले भी किया जाता है।

विजेता

मुकाबला उस समय जीता समझा जाता है जब-

  1. इप्पन (पूरा अंक) स्कोर का गिना जाए अथवा दो बाजाअरी (आधा अंक) बना लिए जाएँ,
  2. यदि दूसरा खिलाड़ी डिसक्वालिफाई हो जाए अर्थात् मुकाबले में आगे भाग लेने योग्य न रहे। रैफरी अथवा जजों के फैसले के अनुसार वह विजयी हो।

अंक गणना

कराते मुकाबलो में मान्यता प्राप्त तकनीकों का इस्तेमाल किया जाता है और यह देखा जाता है कि विरोधी के शरीर पर क्षेत्र विशेष अथवा निर्धारित क्षेत्र में कितने अच्छे तरीके से इनका इस्तेमाल किया जाता है। वास्तविक शारीरिक सम्पर्क बहुत सीमित मात्रा (कराटे के नियम) में होता है और स्कोर करने के लिए इसकी जरूरत भी नहीं होती। शरीर पर हल्का स्पर्श करने की ही अनुमति होती है सिर और चेहरे पर भी बहुत ही हल्के सम्पर्क की जरूरत होती है। लक्ष्य सतह के 2 इंच के भीतर ही नियंत्रित प्रहार फोकस होने पर अंक दिये जा सकते है। यदि अत्यधिक शारीरिक सम्पर्क किया जाता है तो ऐसा करने वाले खिलाड़ी को मुकाबले से बाहर तक निकाल दिया जाता है।

इप्पन (पूरा अंक )

ऐसे प्रहार पर दिया जाता है जो अच्छी फार्म में और अच्छे दृष्टिकोण से बड़े शक्तिपूर्ण तरीके और निरन्तर सतर्कतापूर्वक (जानशिन) किया जाता है। इसके लिए प्रहार का ठीक टाइमिंग और सही दूरी से किया जाना जरूरी है। प्रहार (दलो) तुस्की (स्ट) उची (स्नैप), एट (हिट) अथवा कैरी (किक अथवा ठोकर) हो सकते है।

वाजाअरी (आधा अंक)

ऐसे प्रहार के लिए आधा अंक दिया जाता है जो आधा सही होता है परन्तु इसके बावजूद प्रभावी होता है। मिसाल के तौर पर-

  1. यदि विरोधी आघात से बच-हट रहा हो,
  2. यदि आघात निशाने से कुछ परे हो,
  3. यदि प्रहार कुछ अस्थिर सन्तुलन वाली स्थिति से किया गया हो।

इप्पन

एक पूरा अंक अथवा ‘इप्पन’ कुछ अपेक्षया कम ताकत के प्रहारों के लिए भी दे दिया जाता है परन्तु ऐसा तभी होता है यदि प्रहार ठीक उसी समय किया गया हो जबकि विरोधी आक्रामक की तरफ बढ़ने ही वाला हो, प्रहार ठीक उसी समय किया गया हो (कराटे के नियम) जबकि विरोधी का सन्तुलन आक्रामक द्वारा बिगाड़ दिया गया हो; यदि प्रभावी प्रहारों का मेल किया गया हो; यदि त्सुकी और केरी अथवा त्सुकी अथवा नेग (यो) तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो; यदि विरोधी में संघर्ष की क्षमता खत्म हो गई हो और उसने अपनी पीठ ही खिलाड़ी की तरफ कर दी हो, यदि आक्रमण विरोधी के शरीर के अरक्षित भागों पर किया गया हो।

इप्पन न गिना जाना

विरोधी को पकड़ने अथवा उसे फेंकने के ही क्षण यदि खिलाड़ी प्रहार करने में असफल रहता है तो उसे इप्पन नहीं मिलता। यदि दो विरोधी एकसाथ स्कोर करते है तो उनमें से किसी का भी अंक नहीं गिना जाता।

समय- समाप्ति-संकेत के साथ यदि एकसाथ स्कोरिंग तकनीक ही इस्तेमाल की गई हो तो उनको गिना जाता है। यदि आक्रामक मैच क्षेत्र के अन्दर हो और विरोधी बाहर हो तो कराते तकनीक इस्तेमाल करने पर इप्पन नहीं गिना जाता है।

अंकों के आधार पर

(हांताईगाची) श्रेष्ठता : यदि किसी प्रतियोगी ने आधा अंक लिया हो तो उसको हांताईगाची दी जा सकती है। बचने के प्रयास में मैच क्षेत्र से विरोधी कितनी बार बाहर निकला है इसे गिनकर भी उसको हांताईगाची दी जा सकती है; यदि फाउल के कारण विरोधी को कोई चेतावनी दी गई हो; प्रतियोगी ने दूसरे की तुलना में तेजस्विता और चुस्ती (कराटे के नियम) दिखाई है तो उसको देखते हुए भी विजेता का फैसला किया जा सकता है; प्रतियोगियों की तुलनात्मक योग्यता और कौशल को देखकर भी हार-जीत का फैसला किया जा सकता है; आक्रामक हरकतें कितनी हुई हैं, उनकी संख्या के आधार पर तुलनात्मक दृष्टि से किस प्रतियोगी ने बेहतर खेल नीति इस्तेमाल की है-इस आधार पर भी विजेता निश्चित होता है।

विरोध

प्रतियोगी की टीम का अधिकारी मध्यस्थ को अपना विरोध व्यक्त कर सकता है। तब वह मध्यस्थ अथवा पंच रैफरी और जज से सलाह-मशविरा करता है।

चोट लगना

यदि किसी प्रतियोगी को चोट लगती है तो उसका कारण यही होता है कि विरोधी ने फाइल किया है। तब विरोधी को प्रतियोगिता में भाग लेने के अयोग्य करार कर दिया जाता है। घायल प्रतियोगी को मैच का विजेता घोषित कर दिया जाता है चाहे उसमें मैच को जारी रखने की ताकत बच्ची भी न हो।

यदि मामूली सी चोट लगने पर कोई प्रतियोगी मैदान से हटने की अनुमति माँगे अथवा और आगे मुकाबला करने के लिए तैयार न हो और वह चोट अधिक गम्भीर न हो तो उसको हारा हुआ घोषित कर दिया जाता है।

चोट के अतिरिक्त अन्य कारण से वह और मुकाबला नहीं करना चाहता अथवा मैदान से हटने की अनुमति मांगता है तो हारा माना जाता है। यदि चोट लगने का कारण विरोधी न हो अथवा दोनों ही प्रतियोगी एकसाथ घायल हो जाएं और दोनों ही इसके लिए उत्तरदायी हों तो वह प्रतियोगी जो मैदान छोड़ जाता है वही पराजित माना (कराटे के नियम) जाता है। यदि कोई चोट जानबूझकर न लगी हो- मिसाल के तौर पर नियंत्रित प्रहार से ही चोट लग जाए तो यह फैसला करना जज पर निर्भर करता है कि कौन पराजित है। यदि चोट के लिए दोनों में से किसी भी प्रतियोगी को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता तो मैच ड्रा घोषित किया जाता है।

दण्डांक

फाउल होने पर निम्नलिखित परिणाम हो सकते हैं, रैफरी निजी तौर पर बहुत ही शांत आवाज में चेतावनी दे सकता है (चुई), ऊँची आवाज में रैफरी द्वारा चेतावनी जिसका दूसरों को भी पता चले (हाँसोकू-बुई) अथवा वह हाँसोकू की घोषणा कर सकता है।

मैच से निकालना

चेतावनी के बाद भी बार-बार फाउल होने पर खिलाड़ी निकाला जा सकता है। यदि प्रतियोगी रैफरी की आज्ञा मानना अस्वीकार कर देता है तो भी इसे लागू किया जा सकता है। यदि प्रतियोगी इतना उतेजित हो जाता है कि वह विरोधी के लिए खतरा ही बन गया हो तो भी ऐसे ही किया जाता है। यदि दुर्भावना के साथ वह नियमों का उल्लंघन करता है अथवा मैन के नियमों को किसी अन्य तरीके से तोड़ता है।

फाउल

फाउल निम्नलिखित होते हैं:-

  1. बाजुओं अथवा टाँगों के अलावा शरीर के अन्य भागों पर सीधे प्रहार,
  2. खतरनाक तकनीक जैसे आँखों अथवा टेटुए पर प्रहार करना,
  3. खतरनाक तरीके से विरोधी को नीचे गिरा देना,
  4. शिन पर लगातार आघात करते रहना,
  5. नितम्बों पर लगातार सीधे आक्रमण करना,
  6. अनावश्यक रूप से जकड़ना,
  7. मैच क्षेत्र से बार-बार बाहर निकलना अथवा समय खराब करने के लिए हरकतें करना,
  8. प्रतियोगिता के नियमों की उपेक्षा करना,
  9. ऐसा व्यवहार करना जो खिलाड़ी भावना के विपरीत हो।

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Kamlesh Kumar

मेरा नाम कमलेश कुमार है। मैं मास्टर इन कंप्यूटर एप्लीकेशन (Master in Computer Application) में स्नातकोत्तर हूं और CanDefine.com में एडिटर के रूप में कार्य करता हूँ। मुझे इस क्षेत्र में 3 वर्ष का अनुभव है और मुझे हिंदी भाषा में काफी रुचि है। मेरे द्वारा स्वास्थ्य, कंप्यूटर, मनोरंजन, सरकारी योजना, निबंध, जीवनी, क्रिकेट आदि जैसी विभिन्न श्रेणियों पर आर्टिकल लिखता हूँ और आपको आर्टिकल में सारी जानकारी प्रदान करना मेरा उद्देश्य है।

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