लॉन टेनिस के नियम, कोर्ट, नेट, रैकेट, गेंद और टेनिस खेल की जानकारी

लॉन टेनिस के नियम:- रैकेट से खेले जाने वाले इस खेल में एकल और युगल मुकाबले होते हैं खेल कोर्ट नेट द्वारा दो भागों में बाँटा गया होता है। खिलाड़ी कोशिश करते हैं कि गेंद नेट के पार दूसरी ओर के कोर्ट में जमीन पर गिरकर उछाल लें और विरोधी खिलाड़ी उसे लौटाने में सफल न हो सके।

लॉन टेनिस के नियम (Lawn Tennis Rules in Hindi)

लॉन टेनिस के नियम

यह भी पढ़े – टेबल टेनिस खेल के नियम, टेबल टेनिस के बारे में पूरी जानकारी

कोर्ट

सतह घास, लकड़ी, एस्फाल्ट, छिद्रदार कंक्रीट अथवा और किसी सामग्री की हो सकती है। चित्र में दिखाए तरीके से इस पर रेखाएं लगाई जाती है ये रेखाएं मैदान का भाग होती है।

नेट

दो खम्भों के बीच एक केबल से लटका रहता है। इसके ऊपर एक सफेद फीता अथवा 1 टेप होती है ठीक बीचोबीच यह एक लम्बायमान स्ट्रेप से कसा रखा जाता है। यह स्ट्रेप मजबूती से जमीन से जुड़ी होती है एक खम्भे पर हत्थी होती है जिससे नेट की ऊँचाई ऊपर-नीचे की ज सकती है।

रैकेट

ये लकड़ी, ग्रेफाइट अथवा इस्पाती फ्रेम के बने होते है। पुरुष खिलाड़ियों द्वारा इस्तेमाल किया जाने वाला रैकेट साढ़े तेरह से 14 औंस के बीच और महिलाओं का रैकेट तेरह से साढ़े तेरह औस के बीच होता है।

गेंद

यह पीला अथवा सफेद हो सकता है। इसका वजन 2 से 2% औस के बीच होना चाहिए।

खिलाड़ी

मिश्रित युगल मैचों को छोड़कर पुरुषों के विरुद्ध मैच पुरुष और महिलाओं के विरुद्ध मैच महिलाएं खेलती हैं । जूते और शरीर के कपड़े भी तंग नहीं होने चाहिए।

पोशाक

परम्परा तो यही है कि पुरुष खिलाड़ियों की कमीजें, निकरें और महिला खिलाड़ियों के स्कर्ट-ब्लाउज तथा अन्य वस्त्र सफेद रंग के ही हों। हीं, कुछ पेशेवर खिलाड़ियों को टूर्नामेंटों में रंगीन पोशाक पहनने की इजाजत होती है। सफेद जुराबें और रबर तलवे के जूते खिलाड़ियों को पहनने होते हैं ।

अवधि

पुरुषों के लिए मैच अधिकतम पाँच सेट और महिलाओं का तीन सेट का होता है । पुरुषों के मुकाबलों में एक खिलाड़ी द्वारा तीन सेट जीतने पर और महिलाओं के मुकाबलों में दो सेट जीतने पर खेल समाप्त हो जाता है । खेल लगातार जारी रहता है। परन्तु कुछ देशों में पुरुषों के मैच में तीसरे सेट के बाद और महिलाओं के मैच में दूसरे सेट के बाद खिलाड़ियों को दस मिनट के विश्राम की अनुमति होती है। गर्म जलवायु वाले देशों में यह विश्राम की अवधि 45 मिनट तक हो सकती है।

खिलाड़ी पुनः ताजा हो सके और सलाह ले सके इसके लिए खेल में कभी देरी नहीं की जाती। यदि दर्शकों के कारण खेल में बाधा पड़ रही हो तो अम्पायर चाहे तो खेल अनिश्चित काल के लिए बन्द कर सकता है ।

अधिकारी

अप्पा जिसकी सहायता के लिए नेट कॉर्ड जज होता है। इसके अलावा मुख और पाँव की फार देखने के लिए जज (निर्णय) होते है।

खेल आरम्भ

कौन-सा खिलाड़ी कौन-सी साइड ले, इसके लिए रैकेट को स्थित किया जाता है। एक खिलाड़ी ‘रफ’ अथवा ‘स्मूथ’ बोलता है। ये रैकेट की दोनों साइडे होती है।

स्कोरिंग

मैच में गेम और सेट से स्कोर गिना जाता है। हर गेम में खिलाड़ी ‘लव’ से सर्विस शुरू करता है। पहला अंक पाने पर उसका स्कोर होता है 15, दूसरे अंक पर 30, तीसरे पर 40 और चौथा अंक पाने पर वह गेम जीत जाता है। हाँ, यदि ड्यूसा (जब दोनों खिलाड़ियों का स्कोर 40) हो जाए तो ऐसा नहीं होता । तुव स्कोर 40-आल बोला जाता है। ड्यूस के बाद जीतने वाला अगला अंक ‘एडवेटेज’ सफल (लॉन टेनिस के नियम) खिलाड़ी को मिलता है। यदि यही खिलाड़ी अगला अंक भी जीत जाता है तो वह गेम जीत लेता है। यदि अंक विरोधी खिलाड़ी को मिलता है तो स्कोर फिर ‘ड्यूस’ हो जाता है और इस तरह क्रम चलता रहता है जब तक कि गेम खतम नहीं हो जाती ।

टाई ब्रेकर

सेट अधिक लम्बे न खिंच जाएँ इसे रोकने के लिए टाई ब्रेकर प्रणाली (लॉन टेनिस के नियम) का इस्तेमाल किया जाता है। यह पहले से निश्चित किए स्कोर 6-आल अथवा 8-आल पर लागू होता है। टाई- ब्रेकर स्कोर के कई तरीके होते हैं। अमेरिका में जो खिलाड़ी अथवा जोड़ी के अगले 9 में से 5 अंक पहले बना लेने पर उसको विजयी समझा जाता है। 12 में से 7 की स्कोर प्रणाली में पहले 7 अंक बनाने वाला खिलाड़ी जीतता है परन्तु उसके विरोधी खिलाड़ी से 2 अंक ज्यादा होने चाहिए अगर स्कोर 6-आल हो जाता है तो खेल तब तक चलता रहता है जब तक कि एक खिलाड़ी के 2 अंक अधिक नहीं होते। कुछ टूर्नामेंटों में फाइनल सेट में टाईब्रेकर इस्तेमाल नहीं किया जाता । यह सेट आम तरीके से खेला जाता है ।

सर्विस

खिलाड़ी सर्विस से नेट के पार सर्विस कोर्ट (विरोधी खिलाड़ी के कोर्ट के दाएँ भाग) में गेंद भेजकर खेल शुरू करता है। वह बारी-बारी कोर्ट की दोनों साइडों से सर्विस करता है। पहले तो अपने कोर्ट की दाई साइड से फिर बाई साइड से बेस लाइन के पीछे और सेंटर मार्क को बढ़ा हुआ मानकर, बाई ओर के क्षेत्र से सर्विस की जाती है।

सर्विस करने के लिए गेंद हवा में ऊपर उछाली जाती है और जमीन पर गिरने से पहले रैकेट से प्रहार करके दूसरी ओर भेजी जाती है। सर्विस करते समय खिलाड़ी चल (लॉन टेनिस के नियम) अथवा भागकर अपनी जगह नहीं बदल सकता । न ही उसे बेस लाइन से पीछे साइड लाइन और न ही सेंटर मार्क के हिस्से को छोड़कर और किसी जगह छूने की इजाजत होती है ।

सर्विस तभी ठीक समझी जाती है अगर गेंद नेट से पहले टप्पा खाये बिना दूसरी साइड के तिरछे सर्विस कोर्ट में पड़े। कोर्ट की सीमा रेखाएँ इसका हिस्सा होती है। यदि सर्विस करने वाला किसी नियम को तोड़े अर्थात् गेंद नेट के परली तरफ न जाए अथवा तिरछे कोर्ट में न गिरे तो फ हो जाती है तब दूसरी यदि सर्विस गलत हो तो खिलाड़ी अंक खो देता है। गेंद यदि नेट को छूती हुई दूसरी तरफ के तिरछे सामने के कोर्ट में जा गिरे तो यह फाल्ट नहीं होती।

यह ‘लेट’ होता है और तब खिलाड़ी को दुबारा सर्विस करनी होती है। यदि दूसरे खिलाड़ी के तैयार होने की स्थिति में आने से पहले ही सर्विस कर दी जाए तो यह भी ‘लेट’ होता है। गेंद दूसरी तरफ टप्पा खा लेती है तो ही इसे लौटाया जाता है। अगली गेम में सर्विस पहली गेम का सर्विस पाने वाला खिलाड़ी करता है।

साइड बदलना

पहली और तीसरी गेम के समाप्त होने पर खिलाड़ी साइड बदलते हैं। इसके बाद हर सैट में एकान्तर गैम में इसी तरह साइडे बदली जाती है। सैट के खतम होने पर साइड उसी हालत में बदली जाती है अगर उसमे खेली गेमों की संख्या विषय अर्थात् 1, 3, 5 इत्यादि हो। यदि सैट खतम होने पर कुल गेमों की संख्या ‘सम’ हो तो नये सैट की पहली गेम के बाद ही साइडें बदली जाती है। साइड बदलने के लिए खिलाड़ियों को डेढ़ मिनट का समय मिलता है ।

अंक खोना

  1. 1 जमीन को दूसरी बार गेंद गुए यदि इससे पहले खिलाड़ी इसे के पर लौटा नहीं पाता तो वह अंक खो देता है
  2. यदि उसके द्वारा लौटाई गेंद दूसरी तरफ नेट के पार विरोधी को कोर्ट से बाहर धरती को अथवा किसी और वस्तु को छुए
  3. यदि उसकी हिट से गेंद नेट में जा फँसे
  4. अथवा दो बार गेंद हिट की जाए
  5. यदि नेट को रैकेट से अथवा शरीर के. किसी हिस्से से छू दे
  6. नेट पर कर अपनी साइड में आने से पहले ही गेंद खेली जाए
  7. यदि गेंदे उसके रैकेट के अलावा और किसी हिस्से को छुए
  8. जानबूझकर विरोधी के खेलने में बाधा डाली जाए। यदि ऐसा अनजाने में हुआ तो ‘लैट’ दिया जाता है।

गेंद उस हालत में ठीक लौटाई मानी जाती है यदि नेट को पार करने के बाद यह कोर्ट के अन्दर टप्पा खाती है। गेंद यदि नेट को छूती हुई अथवा गेट खम्भे के परे से होती हुई भी कोर्ट में गिरे तो भी उसे ठीक माना जाता है। गेंद हिट करने के बाद खिलाड़ी का रैकेट यदि नेट के पार चला जाता है तो कोई हर्ज नहीं । हाँ, किसी भी हालत में नेट पार करने से पहले गेंद को हिट नहीं किया जाना चाहिए ।

युगल गेम

खेल क्षेत्र अधिक चौड़ा होता है। सर्विस के क्रम को छोड़कर शेष एकल नियम हो लागू होते है। क ख खिलाड़ियों की जोड़ी फैसला करती है कि कौन से खिलाड़ी ने पहले सर्विस करनी है। मान लो ‘क’। इसी तरह विरोधी खिलाड़ियों की जोड़ी आपस में फैसला करती है कि दूसरी गेम में से कौन सर्विस करेगा। मान लो ‘ब’ । पहली जोड़ी का दूसरा खिलाड़ी जिसने पहले गेम में सर्विस नहीं की होती तीसरी गेम में सर्विस करता है इसी तरह चौथी गेम में दूसरी टीम का खिलाड़ी ‘छ’ सर्विस करता है। यही क्रम लगातार रखा जाता है ।

‘क’ खिलाड़ी यदि पहली सर्विस फाल्ट कर देता है तो वह बाई ओर से दूसरी सर्विस करता है। इसी तरह ‘ख’ खिलाड़ी भी बाई ओर से दूसरी सर्विस करेगा। पहली गेम में सर्विस पाने वाली जोड़ी (छ) आपस में फैसला करती है कि किसे पहले सर्विस लेनी है तब विषम गेम अर्थात् पहली तीसरी पाँचवी इत्यादि में पहली सर्विस यही खिलाड़ी ‘च’ लेता है। इसी तरह दूसरी गेम में सर्विस पाने वाली क, ख जोड़ी आपस में फैसला करती है। कि कौन उनमें से सर्विस लेगा। और तब चुना खिलाड़ी ‘ख’ ही लगातार सैट की सम- गेम अर्थात् दूसरी चौथी और छठी गेम में सर्विस लेता है।

हर गेम में जोड़ीदार खिलाड़ी बारी-बारी से सर्विस लेते हैं अर्थात् उसका सामना करते हैं। रैली के दौरान भी हर जोड़ी को बारी-बारी गेंद हिट करनी होती है। जोड़ी का कोई भी खिलाड़ी गेंद लौटा सकता है।

नोट- नेट के मध्य में लगा फीता ज्यादा से ज्यादा 2 इंच चौड़ा हो सकता है। जाल के ऊपरी किनारे पर जो पट्टी दोनों ओर रस्सी अथवा तार पर लिपटी रहती है उसकी गहराई दो से ढाई इंच के बीच हो सकती है। मध्य सर्विस रेखा जो कोर्ट को दो भागों में विभाजित करती है वह 2 इंच चौड़ी होती है ।

प्रत्येक आधार रेखा पर लगाया गया मध्य चिह्न 4 इंच लम्बा और दो इंच चौड़ा होता है। शेष सब रेखाएँ कम-से-कम एक इंच और अधिक से अधिक 2 इंच चौड़ी होगी नेट जिस छड़ से बँधा होता है उसकी मोटाई अधिक से अधिक 11, इंच होती है।

टेनिस के कुछ विवादास्पद मुद्दे

  1. यदि खेल रहा कोई खिलाड़ी गेंद रैकेट से होल्ड कर लेता है तो वह अंक खो देता है।
  2. खेल के दौरान अगर कोई खिलाड़ी विरोधी खिलाड़ी के क्षेत्र में कूद जाता है तो वह अंक खो देगा।
  3. कोर्ट में यदि कोई अचल वस्तु पड़ी हो तो वह उसका हिस्सा ही मानी जाएगी मगर कोई चीज चल रही हो और गेंद उससे टकरा जाए तो इस पर ‘लेट’ दिया जाएगा।
  4. अम्पायर गलती से ‘फाल्ट’ की आवाज लगा दे और फिर तुरन्त अपनी गलती सुधार कर ‘प्ले’ की आवाज लगाए। मगर इस अवधि में गेंद पाने वाला खिलाड़ी उसे लौटाने में असफल रहे तो इस स्थिति में ‘लेट दिया जाना चाहिए।
  5. किसी रुकावट अथवा अन्य कारण से यदि दोनों खिलाड़ी गलत साइड से खेलते हैं और रैफरी अथवा उसकी जगह काम कर रहे दूसरे व्यक्ति ने मैच अंकित करते समय यह बाधा स्कोर शीट में गलत अंकित न कर दी हो तो उस खेल को सही माना जाएगा। ऐसी हालत में हार जाने वाला खिलाड़ी यह देखता है कि उपर्युक्त गलती उसके हक में नहीं जाती तो दावा कर सकता है कि मैच दुबारा खिलाया जाए परन्तु यह दावा उचित समय के अन्दर ही किया जाना चाहिए।
  6. ‘बिहाइन्ड’ शब्द का इस्तेमाल सर्विस करने वाले के पैरों के संदर्भ में किया जाता है। हवा में उछाली गेंद को कही पर भी प्रहार किया जा सकता है। जहाँ तक रैकेट पहुँचे ऐसा किया जा सकता है।
  7. अगर पहली सर्विस गलत है और अम्पायर इस मुद्दे पर फैसला देने में असफल रहता है। तो यह अंक दोबारा खेला जाना चाहिए। सर्विस करने वाले को दोबारा सर्विस करनी चाहिए। सर्विस करने वाले खिलाड़ी का पैर बेस लाइन (पिछली रेखा) से पीछे होना चाहिए। पैर रेखा पर आ जाए तो ‘फुट फाल्ट’ होता है।

मीट्रिक प्रणाली में माप

78 फुट = 23.77 मीटर27 फुट = 8.23 मीटर
3 फुट 6 इंच = 106.70 सेमी 3 फुट = 9.15 सेमी
36 फुट = 10.98 मीटर 4 फुट 6 इंच = 137.25 सेमी
2 इंच = 5.08 सेमी 4 इंच = 10.16 सेमी
2.5 इंच 6.35 सैमी 1/3 इंच = 8 सेमी
21 फुट = 6.40 मीटर
लॉन टेनिस के नियम

नोट- नेट के बारे में कुछ और जानकारी निम्नलिखित है: कोर्ट के ठीक मध्य में लगा नेट मैदान से 3 फुट ऊँचा होता है । नेट 8 सेमी० मोटी तार के सहारे ही लटका होता है तार कोर्ट के दोनों ओर लगे 6 इंच या इससे कम व्यास के खम्भों पर कसी होती है। खम्भे मैदान के बाहर और 3 फुट 6 इंच लम्बे होते है नेट दोनों खम्भों तक फैला होता है। मैदान से नेट की ऊँचाई बीच | में 3 फुट तथा किनारों पर 3 फुट 1 इंच होती है।

नेट की ऊँचाई निश्चित करने के लिए पट्टी लगी होती है जिसे एडजस्टर कहते है उसे जमीन में गड़े ‘हुक’ में अटकाया जाता है। खम्भे पर हत्थी लगी होती है जिससे नेट ऊँचाई ऊपर-नीचे की जा सकती है।

टेनिस मैदान पर रेखाएँ डालना

सबसे प्रथम नेट जहाँ लगाना है वहाँ पर 42 फुट लम्बी रेखा लगाई जाती है। इसके मध्य बिन्दु को x अंकित कर लिया जाता है। इस समय बिन्दु से दोनों तरफ 13 फुट 6 इंच मापकर दो बिन्दु क और ख लिए जाते हैं। यहाँ पर नेट भीतरी किनारा रेखाओं को पार करता है ।

इसके बाद 16 फुट 6 इंच के दूरी पर एकल कोर्ट के लिए ‘न’, ‘न’ बिन्दु लगाए जाते हैं। इसके बाद 18 फुट ‘का’ और ‘खा’ दो बिन्दु लगाए जाते हैं। यहाँ पर नेट बाहरी किनारा रेखा को पार करता है। 21 फुट की दूरी पर नेट को थामने वाले खम्भे लगाए जाते है ‘न’, ‘ना’ बिन्दुओं पर ये 42 फुरी लाइनों के आखिरी बिन्दु होते है।

लॉन टेनिस के नियम
लॉन टेनिस के नियम

‘का’ और ‘खा’ बिन्दुओं पर कोलियों ठोकी जाती है। इन पर मापने वाली टेंपों के सिरों को जोड़ दिया जाता है। एक पर जिससे कि कोर्ट का डायगनल अथवा कर्ण मापा जाना है, 53 फुट 1 इंच दूरी मापी जाती है और दूसरी टेप पर 39 फुट लम्बाई मापी जाती है। इन दोनों को कसा रखा जाता है और ये दोनो बिन्दु ‘गा’ पर मिलते है जो कि मैदान का एक कोना होता है। इसी तरह मैदान का कोना ‘घा’ पाया जाता है।

इस समय ‘गा’ और ‘घा’ बिन्दु के बीच की लम्बाई को भी जाँच लिया जाना चाहिए। यह आधार रेखा 36 फुट की होनी चाहिए । इस आधार रेखा का मध्य बिन्दु ‘जा’ भी अंकित कर देना चाहिए। और ‘गा’ तथा ‘घा’ से अन्दर की ओर 4 फुट 6 इंच की दूरियाँ मापनी चाहिए जिनसे बिन्दु ‘ख’ और ‘ग’ मिलते हैं अब मध्य रेखा और सर्विस रेखाएँ अंकित की जाती है और इनको ‘ता’, ‘था’ और ‘दा’ बिन्दुओं से अंकित किया जाता है। ये X और क, घ नेट से 21 फुट दूर होने चाहिए ।

यह भी पढ़े – फुटबॉल के नियम, मैदान, रेफरी और फुटबॉल में कितने खिलाड़ी होते है

Follow us on Google News:

Kamlesh Kumar

मेरा नाम कमलेश कुमार है। मैं मास्टर इन कंप्यूटर एप्लीकेशन (Master in Computer Application) में स्नातकोत्तर हूं और CanDefine.com में एडिटर के रूप में कार्य करता हूँ। मुझे इस क्षेत्र में 3 वर्ष का अनुभव है और मुझे हिंदी भाषा में काफी रुचि है। मेरे द्वारा स्वास्थ्य, कंप्यूटर, मनोरंजन, सरकारी योजना, निबंध, जीवनी, क्रिकेट आदि जैसी विभिन्न श्रेणियों पर आर्टिकल लिखता हूँ और आपको आर्टिकल में सारी जानकारी प्रदान करना मेरा उद्देश्य है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *