मेरा विद्यालय पर निबंध? मेरा विद्यालय इन हिंदी?

मेरा विद्यालय पर निबंध (Mera Priya Vidyalaya Par Nibandh), विद्यालय सबसे पवित्र उत्तम स्थान है। यहाँ अज्ञान का अन्धकार दूर किया जाता है और ज्ञान का प्रकाश दिया जाता है। अतएव विद्यालय की स्थापना करना बड़ा पुण्य कार्य समझा जाता है। विद्यालय की स्थिति मेरे विद्यालय का नाम सेंट जोसफ हाई स्कूल है। इसका क्षेत्र बहुत विस्तृत है। यह नगर के मध्य में है। चारों कोनों से विद्यार्थी यहाँ बड़ी सरलता से आ सकते हैं। यह चारों ओर से दुकानों से घिरा हुआ है। इसका फाटक बहुत बड़ा है, अतः गुण्डा तत्व इसमें प्रवेश नहीं कर सकता है। क्षेत्र के विस्तृत होने के कारण यहाँ सदा शान्ति रहती है।

मेरा विद्यालय पर निबंध (Mera Priya Vidyalaya Par Nibandh)

मेरा-विद्यालय-पर-निबंध

भवन

विद्यालय में प्रवेश करते ही बहुत बड़ा हॉल दिखाई देता है। इस हॉल में उत्सव, प्रदर्शनी इत्यादि कार्य हुआ करते हैं। यहाँ पर सभी विषयों के पढ़ाने की सुविधा है। विज्ञान पढ़ाने का कमरा बहुत उचित रीति से बनाया गया है तथा प्रयोगशाला सभी उपकरणों से युक्त है। इसी प्रकार अन्य सभी कमरे उनके विषयों की सुविधा के अनुसार बनाये गये हैं।

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प्रधानाचार्य कक्ष

प्रधानाचार्य कक्ष ऐसे स्थान पर बनाया गया है, जहाँ से विद्यालय की प्रत्येक कक्षा में होने वाली सभी घटनाएँ स्पष्ट रूप से देखी जा सकें। इस कक्ष में कक्षाओं और अध्यापकों का टाइम-टेबिल टँगा रहता है। विद्यालय ने जितनी बैजयन्ती (शील्डे) प्राप्त की हैं, वे सब इस कक्ष में लगाई गई हैं। यह कक्ष महात्मा गांधी, डॉ. अम्बेडकर इत्यादि अनेक महापुरुषों के चित्रों से भी सुशोभित है।

पुस्तकालय

यह विद्यालय बहुत पुराना है, अतः इसके पुस्तकालय में बहुमूल्य और सरलता से न मिलने वाली पुस्तकों के अतिरिक्त छात्रों के ज्ञान को बढ़ाने वाली सभी विषयों की पुस्तकें हैं। अध्यापकों के ज्ञान को बढ़ाने वाली पुस्तकें भी पुस्तकालय में बहुत अधिक हैं। पुस्तकालयाध्यक्ष पुस्तकों के लेने-देने में बहुत परिश्रम करते हैं। वे चाहते हैं कि पुस्तकों का अधिक-से-अधिक सदुपयोग हो।

कक्षाएँ

इस विद्यालय में कुल मिलाकर चालीस कमरे हैं। सभी कमरे हवादार और प्रकाशयुक्त हैं। बिजली के चले जाने पर भी इनमें हवा और प्रकाश आता रहता है।

अध्यापक

इस विद्यालय में कुल मिलाकर चालीस अध्यापक हैं। सभी अध्यापक उच्च योग्यता वाले तथा अपने-अपने विषयों के विशेषज्ञ हैं। सभी अध्यापक परिश्रम से पढ़ाते हैं। हम अपने गुरुजनों का आदर करते हैं। हमारे अध्यापक भी हमें बड़े प्यार से पढ़ाते हैं। यहाँ लिखित कार्य बहुत अधिक कराया जाता है तथा प्रधानाचार्य अपने कार्यक्रम के अनुसार लिखित कार्य का निरीक्षण करते हैं।

अनुशासन

विद्यालय अपने अनुशासन के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ सभी छात्र समय पर आते हैं। अध्यापक घण्टा बजते ही कक्षा में पहुँच जाते हैं। कोई भी छात्र बाहर घूमता हुआ दिखाई नहीं देता। यदि किसी छात्र को अत्यन्त आवश्यक कार्य से बाहर जाना ही होता है तो वह अनुमति लेकर जाता है।

प्रधानाचार्य बहुत अधिक राउण्ड लेते हैं। प्रधानाचार्य के परिश्रमी होने के कारण सभी अध्यापक परिश्रम करते हैं। खेल-विद्यालय में पढ़ाई के समान ही खेल को भी महत्व दिया जाता है। निश्चित समय पर खिलाड़ी खेल के मैदान में पहुँच जाते हैं। खेल के इन्चार्ज अध्यापक स्वयं अच्छे खिलाड़ी रहे हैं। वे छात्रों को उचित शिक्षा देते रहते हैं। प्रायः सभी खेलों में विद्यार्थी विजयी होकर आते हैं।

उपसंहार

परिणाम-विद्यालय का परीक्षा परिणाम बहुत अच्छा रहता है। कभी-कभी तो शत-प्रतिशत रहता है। परिणाम के अच्छे रहने के कारण इस विद्यालय में प्रवेश मिलना बहुत कठिन होता है। केवल अच्छे विद्यार्थी ही इसमें प्रवेश पाते हैं।

विद्यालय की जो उन्नति हुई है इसका सारा श्रेय प्रधानाचार्य तथा प्रबन्ध-तन्त्र को है। प्रधानाचार्य विद्यालय की उन्नति के लिए जितना धन माँगते हैं, प्रबन्ध-तन्त्र उसे देने का पूरा-पूरा प्रयत्न करता है।

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