सोरायसिस कितने प्रकार के होते हैं, सोरायसिस के लक्षण क्या है

सोरायसिस कितने प्रकार के होते हैं:- त्वचा, शरीर का सबसे बड़ा अंग है। जिसकी कीमत सिर्फ कॉस्मेटिक के आधार पर ही नहीं नापी जा सकती बल्कि यह भिन्न बीमारियों के रूप में स्वास्थ्य की आन्तरिक गड़बड़ी की अभिव्यक्ति का माध्यम भी है। ये साधारण फोड़ों, मुँहासे, छपाकी हो सकते हैं या सोरायसिस जैसी कोई जीर्ण बीमारी भी हो सकती है।

नेशनल सोरायसिस (Psoriasis) फाउन्डेशन के अध्ययनों में पाया गया है कि सोरायसिस और सोरिएटिक आर्थराईटिस आम रोग हैं, ये जीवन को बदल कर रख देते हैं और अक्सर गम्भीर स्थिति पैदा करते हैं। सोरायसिस औसतन दुनिया की 2% से 3% आबादी को प्रभावित करता है और इनमें से 60% लोग अपने दैनिक जीवन में बहुत अधिक समस्याओं का सामना करते हैं।

सोरायसिस कितने प्रकार के होते हैं

सोरायसिस कितने प्रकार के होते हैं
Psoriasis

सोरायसिस किसे कहते हैं

इसका एक सबसे बुरा पहलू यह है कि दूसरे लोग आप से बचने की कोशिश करते हैं, वे सोचते हैं कि सोरायसिस एक संक्रामक बीमारी है और अस्वच्छता के कारण होती है। इससे व्यक्ति कुंठित, हताश और असहाय महसूस करने लगता है। वह निरन्तर चिन्ता में रहता है कि लोग उसके बारे में क्या सोचते होंगे और वह सामाजिक स्थानों से परहेज करने लगता है, इससे उसके जीवन में तनाव बढ़ जाता है और यह तनाव सोरायसिस को और गम्भीर बनाता है। भाग्य से होम्योपैथी के पास इस बीमारी की हानिकारकता का उत्तर है जो आपको अधिक आत्मविश्वास के साथ और अन्य सामान्य स्वस्थ लोगों की तरह जीवन जीने में मदद करता है।

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सोरायसिस कितने प्रकार के होते हैं

आकारिकी रूप से, सोरायसिस के निम्नलिखित प्रकार हैं। प्रत्येक के अपने विशिष्ट लक्षण होते हैं:

प्लॉक सोरायसिस

यह सोरायसिस का सबसे सामान्य प्रकार है और इसे “सोरायसिस बल्गेरिस” कहा जाता है। “वल्गेरिस” का अर्थ है “सामान्य” । महिलाओं में प्लॉक सोरायसिस पुरूषों की तुलना में जल्दी होता है। प्लॉक सोरायसिस पहली बार 16-22 वर्ष की उम्र के लोगों में गम्भीर अवस्था में देखा जाता है। इसकी दूसरी सबसे गम्भीर प्रावस्था 57-60 वर्ष की उम्र में देखी जाती है। सोरायसिस के प्लॉक यानि चकत्ते पूरे शरीर में समान रूप से वितरित होते हैं। वे आकार में अलग अलग होते हैं और स्पष्ट धब्बों के रूप में दिखायी देते हैं। ये एक दूसरे के साथ मिलकर एक बड़े क्षेत्र को कवर कर सकते हैं।

लक्षण:-
  • लाल त्वचा के उभरे हुए और मोटे धब्बे जो “प्लॉक” अर्थात् चकत्ते कहलाते हैं। ये सूखी. पतली और चमकीली सफेद पपड़ी से ढके होते हैं जब पपड़ी हटती है तो इसके नीचे की त्वचा चिकनी लाल दिखायी देती है, इस समय यह ग्लॉसी स्पॉट होता है जिसमें से रक्तस्राव हो सकता है।
  • सोरायसिस के प्लॉक स्पष्ट रूप से विभेदित होते हैं और इनकी स्पष्ट सीमाएं होती हैं।
  • अक्सर प्लॉक सिर की त्वचा, धड़ तथा हाथों और पैरों पर दिखायी देते हैं। प्रसारक सतह जैसेकि घुटनों और कोहनी के लिए झुकाव होता है। हालांकि, ये जननांगों और मुंह के भीतर कोमल उतक सहित शरीर में किसी भी स्थान पर उत्पन्न हो सकते हैं।
  • रूपोईड सोरायसिस इसमें धूसर-भरे, शंकु के आकार के हाईपरकेरेटोटिक घाव हो जाते हैं, धड़ और सीमान्तों पर इनकी सतह अवतल प्रकार की होती है।
  • सोरायसिस के वे क्षेत्र जिन्हें बुरी तरह से रगड़ दिया गया हो और वह मोटे हो गए हो इन्हें लाइकेनीकृत सोरायसिस कहा जाता है।

गटेट सोरायसिस

यह सोरायसिस का दूसरा सबसे सामान्य प्रकार है, और अक्सर उन बच्चों और युवाओं में देखा जाता है जिनमें गले के लक्षणों के साथ या इसके बिना लगभग 2 से 3 सप्ताह के लिए स्ट्रेप्टोकोकल संक्रमण रहा हो। लड़के और लड़कियां इससे समान रूप से प्रभावित होते हैं।

लक्षण:-
  • आमतौर पर इसकी शुरूआत धड़ और सीमान्तों से होती है, घाव कभी कभी चेहरे, कानों और सिर की त्वचा तक फैल जाते हैं।
  • ये घाव गोल या अण्डाकार, आंसु की बूंद के आकार के, लाल और सीमांकित होते है।
  • आमतौर पर बूंद जैसे घाव पर स्पष्ट पपड़ी दिखायी देती है जो प्लॉक सोरायसिस में पायी जाने वाली पपड़ी की तुलना में अधिक पतली होती है।

पसच्यूलर सोरायसिस

इस प्रकार का सोरायसिस पूरे शरीर में फैले हुए धब्बों के रूप में होता है। अथवा ये धब्बे छोटे क्षेत्रों जैसे हाथों, पैरों और अंगुलियों के पोरों पर पाये जाते हैं।

लक्षण:-
  • पहले त्वचा लाल और कोमल हो जाती है इसके तुरन्त बाद मवाद से भरे हैं। हुए फफोले प्रकट होते हैं।
  • फफोले एक दो दिन में सूख जाते हैं लेकिन ये कुछ दिनों या सप्ताहों के बाद फिर से प्रकट हो जाते हैं।
  • आमतौर पर इस प्रकार के हैं। में बुखार, ठण्ड लगना, तेज खुजली, वजन में कमी होना तथा थकान के लक्षण भी देखे जाते हैं।

इनवर्स सोरायसिस

यह ज्यादा सामान्य नहीं है। इसे “त्वक वलयी”, “फलेक्सुरल” या “इन्टरट्रिजिनस” सोरिएसिस भी कहा जाता है। इस प्रकार का सोरिएसिस गम्भीर हो सकता है। यह उन लोगों में अधिक पाया जाता है जिनका वजन अधिक होता है और यह घर्षण और पसीने से बढ़ जाता है।

लक्षण:-
  • लाल और सूजे हुए चकत्ते जो त्वक् वलनों में, बगलों में, जननागों में, स्तनों के नीचे, नितम्बों के नीचे देखे जाते हैं।
  • ये धब्बे लाल होते हैं, इन स्थानों की त्वचा सूजी होती है। आमतौर पर इन पर पपड़ी नहीं बनती है।

जननांगों का सोरायसिस जननांगों के वे क्षेत्र जो सोरायसिस से प्रभावित हो सकते हैं उनमें शामिल हैं: श्रोणि, जननांग जैसे महिलाओं में भग और पुरुषों में वृषणकोष गुदा और भग तथा गुदा और वृषणकोष के बीच की त्वचा घाव जननांग के आस पास की त्वचा लाल और चमकदार हो जाती है। त्वचा सख्त और घाव जैसी महसूस होती है और वह फट जाती है और उसमें दरार भी आ सकती है।

बच्चों में जननांगों का सोरिएसिस अर्थात् नैपकिन सोरिएसिस इसमें जो घाव है उसमें खुजली होती है जो खरोंचने से सक्रमित हो जाता है। इसमें खुश्की हो जाती है। इन स्थानों की त्वचा मोटी हो जाती है. इसमें बाद में खुजली हो जाते हैं।

एरिथ्रोडर्मिस सोरायसिस

इसे ‘एक्सफोलिएटिव’ सोरायसिस भी कहा जाता है। यह बहुत ही कम पाया जाने वाला प्रकार है। सोरायसिस का यह प्रकार घातक हो सकता है क्योंकि इसमें अत्यधिक सूजन आ जाती है और त्वचा इतनी ज्यादा तेजी से उतर कर गिरने लगती है कि शरीर की तापमान नियन्त्रण की क्षमता भी खो जाती है और उसके साथ यह सुरक्षात्मक परत के रूप में कार्य करने में असफल हो जाती है।

लक्षण:-
  • यह पूरे शरीर में हो सकता है। त्वचा लाल और रैश जिसमें खाल सी उतरती है, खुजली और बहुत तेज जलन हो सकती है।
  • ये गम्भीर रूप से धूप में झूलसने के कारण, कॉर्टिकोस्टेरॉयड के प्रभाव से या किसी अन्य प्रकार की चिकित्सा से हो सकती है। कभी कभी किसी अन्य प्रकार के सोरायसिस पर अगर उपयुक्त रूप से नियन्त्रण ना किया जाये तो वह इस रूप में बदल सकता है।

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अस्वीकरण – यहां पर दी गई जानकारी एक सामान्य जानकारी है। यहां पर दी गई जानकारी से चिकित्सा कि राय बिल्कुल नहीं दी जाती। यदि आपको कोई भी बीमारी या समस्या है तो आपको डॉक्टर या विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए। Candefine.com के द्वारा दी गई जानकारी किसी भी जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।

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