राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति 2017 क्या है, इसका उद्देश्य और लक्ष्य क्या है

राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति 2017 क्या है:- 15 मार्च, 2017 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में ‘राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति 2017’ (National Health Policy, 2017) को अनुमोदित किया गया। राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति, 2017 कई मायनों में मील का पत्थर है। इस नीति में सार्वजनिक स्वास्थ्य सुनिश्चित करने, मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाने, सभी सार्वजनिक अस्पतालों में दवाओं एवं आवश्यक स्वास्थ्य देखभाल सेवाओं को मुफ्त करने जैसे लक्ष्य रखे गए हैं। सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली में इस प्रकार के व्यवस्थागत सुधार की मांग बहुप्रतीक्षित थी। नीति में सार्वजनिक स्वास्थ्य खर्च को सकल घरेलू उत्पाद के 1.15% से बढ़ाकर वर्ष 2025 तक 2.5% करने का प्रस्ताव स्वागतयोग्य है।

राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति 2017 क्या है (Rashtriya Swasthya Niti 2017 Kya Hai)

राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति 2017

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Rashtriya Swasthya Niti 2017

यह नीति सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज प्राप्त करने तथा वहनीय लागत पर सभी को गुणवत्तायुक्त स्वास्थ्य देखभाल सेवाएं उपलब्ध कराने हेतु लक्ष्यित है। हालांकि विश्व के अन्य किसी देश की तुलना में भारत के सामने स्वास्थ्य से संबंधित चुनौतियां कहीं बड़ी हैं और इन चुनौतियों के मद्देनजर स्वास्थ्य के लिए जीडीपी की 2.5% राशि अब भी बहुत कम है। फिर भी कहना होगा कि केंद्र सरकार ने आगे की ओर एक कदम जरूर बढ़ाया है। सरकार की मंशा एवं मानसिकता में बदलाव अच्छे संकेत दे रहे हैं, लेकिन नीतियां सिर्फ इरादे को उजागर करने का साधन मात्र हैं। असली चुनौती उनके क्रियान्वयन की होती है। यह नीति तभी कारगर हो पाएगी जब राज्य सरकारें इसे गंभीरता से लें।

उल्लेखनीय है कि सार्वजनिक स्वास्थ्य राज्य सूची का विषय है और स्वास्थ्य देखभाल सेवाओं को उपलब्ध कराने की प्राथमिक जिम्मेदारी राज्य सरकारों पर ही है। ऐसे में इस नीति का सफल होना राज्य सरकारों के उत्साह और उनकी गंभीरता पर निर्भर है। आशा है, कि केंद्र सरकार स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में सार्वजनिक क्षेत्र की भूमिका बढ़ाने पर राज्य सरकारों के साथ उपयुक्त सहमति तैयार करेगी। इस बारे में साझा योजना और पहल से ही नई स्वास्थ्य नीति को सफल बनाया जा सकता है।

योजना का उद्देश्य

सभी क्षेत्रों में स्वास्थ्य संबंधी स्थिति में सुधार करना तथा | सार्वजनिक स्वास्थ्य क्षेत्र द्वारा प्रदत्त निवारक, प्रोत्साहक, उपचारात्मक, प्रशासक और पुनर्वास संबंधी सेवाओं में गुणात्मक सुधार एवं विस्तार करना।

योजना का लक्ष्य

राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति, 2017 में एक स्वस्थ भारत के निर्माण हेतु अनेक मध्यकालिक लक्ष्य बनाए गए हैं। इनमें से प्रमुख लक्ष्य बिंदुवार निम्नलिखित हैं-

जीवन प्रत्याशा एवं स्वस्थ जीवन

  • जन्म के समय जीवन प्रत्याशा (Life Expectancy) को 67.5 वर्ष से बढ़ाकर वर्ष 2025 तक 70 वर्ष करना।
  • वर्ष 2025 तक राष्ट्रीय एवं उप-राष्ट्रीय स्तर पर ‘कुल प्रजनन दर’ (TFR) को घटाकर 2.1 तक लाना।
  • वर्ष 2022 तक विकलांगता समायोजित जीवन वर्ष (Disability Adjusted Life Years: DALY) सूचकांक की नियमित निगरानी करना।

मृत्यु दर

  • पांच वर्ष से कम आयु के बच्चों की मृत्यु दर को कम कर वर्ष 2025 तक 23 प्रति हजार तक लाना तथा मातृ मृत्यु दर (MMR) को वर्तमान स्तर से घटाकर वर्ष 2020 तक 100 प्रति लाख प्रसव के स्तर पर लाना।
  • ‘नवजात शिशु मृत्यु दर’ (Infant Mortality Rate) को वर्ष 2019 तक घटाकर 28 प्रति हजार के स्तर पर लाना।
  • मृत जन्म लेने वाले बच्चों की दर (Still Birth Rate) को वर्ष 2025 तक घटाकर ‘इकाई’ में लाना।

रोग प्रसार / घटनाओं में कमी

  • वर्ष 2020 तक एचआईवी / एड्स के लिए 90:90:90 के वैश्विक लक्ष्य को प्राप्त करना अर्थात वर्ष 2020 तक 90% एचआईवी संक्रमित लोगों को अपनी एचआईवी स्थिति के बारे में पता हो, एचआईवी संक्रमित 90% व्यक्तियों को स्थायी एंटी-रेट्रोवायरल चिकित्सा प्राप्त हो और एंटी-रेट्रोवायरल चिकित्सा प्राप्त करने वाले 90 प्रतिशत लोगों में विषाणु की रोकथाम सुनिश्चित हो ।
  • वर्ष 2018 तक कुष्ठ रोग, वर्ष 2017 तक कालाअजार तथा हाथीपांव (Lymphatic Filariasis) का उन्मूलन करना तथा इस स्थिति को बनाए रखना।
  • क्षय रोग (TB) के नए मामलों में 85% से अधिक की रोग मुक्ति दर (Cure Rate) प्राप्त करना एवं उसे बनाए रखना, रोग प्रसार के नए मामलों में कमी लाना, ताकि वर्ष 2025 तक इस रोग का उन्मूलन किया जा सके।
  • वर्ष 2025 तक दृष्टिहीनता की व्याप्तता को घटाकर 0.25 प्रति हजार के स्तर तक लाना तथा इससे ग्रस्त रोगियों की संख्या को वर्तमान स्तर से घटाकर एक-तिहाई करना।
  • हृदयवाहिका रोगों (Cardiovascular Diseases), कैंसर, मधुमेह या श्वास संबंधी जीर्ण रोगों से होने वाली अकाल मृत्यु के मामलों में वर्ष 2025 तक 25% तक की कमी लाना।

स्वास्थ्य सेवाओं का कवरेज

  • वर्ष 2025 तक मौजूदा सार्वजनिक स्वास्थ्य सुविधाओं के उपयोग में 50% की वृद्धि करना ।
  • वर्ष 2025 तक एक वर्ष तक के 90% से अधिक नवजात शिशुओं का पूर्णतः प्रतिरक्षण सुनिश्चित करना।
  • वर्ष 2025 तक राष्ट्रीय एवं उप-राष्ट्रीय स्तर पर परिवार नियोजन की 90% से अधिक आवश्यकताओं की पूर्ति करना ।

स्वास्थ्य से संबंधित परि-क्षेत्रीय लक्ष्य

  • तंबाकू उपयोग के मामलों में वर्तमान स्तर की तुलना में वर्ष 2020 तक 15% की तथा वर्ष 2025 तक 30% तक की कमी लाना।
  • वर्ष 2020 तक सभी के लिए सुरक्षित जल एवं स्वच्छता तक पहुंच को सुनिश्चित करना।

Swasthya वित्त (Health Finance)

  • सरकार द्वारा स्वास्थ्य क्षेत्र पर खर्च को ‘सकल घरेलू उत्पाद’ (GDP) के वर्तमान 1.15% से बढ़ाकर वर्ष 2025 तक 2.5% करना।
  • राज्यों के स्वास्थ्य क्षेत्र पर व्यय को बढ़ाकर वर्ष 2020 तक उनके बजट का 8% से अधिक करना।

Swasthya अवसंरचना एवं मानव संसाधन

  • वर्ष 2020 तक उच्च प्राथमिकता वाले जिलों में ‘भारतीय सार्वजनिक स्वास्थ्य मानक’ (IPHS Indian Public Health Standard) के मानदंडों के अनुरूप डॉक्टरों एवं पैरा-मेडिकल स्टाफ की उपलब्धता सुनिश्चित करना।
  • वर्ष 2025 तक उच्च प्राथमिकता वाले जिलों में IPHS मानदंडों के अनुरूप जनसंख्या अनुपात में, सामुदायिक स्वास्थ्य स्वयंसेवियों की संख्या को बढ़ाना।

स्वास्थ्य प्रबंधन सूचना

  • वर्ष 2020 तक स्वास्थ्य निगरानी प्रणाली को सुदृढ़ करना तथा सार्वजनिक स्वास्थ्य की दृष्टि से महत्वपूर्ण रोगों की पंजीकरण प्रणाली स्थापित करना।
  • वर्ष 2025 तक संघबद्ध एकीकृत स्वास्थ्य सूचना ढांचा, स्वास्थ्य सूचना एक्सचेंज तथा राष्ट्रीय स्वास्थ्य सूचना नेटवर्क स्थापित करना।

प्रमुख तथ्य

  • इस नीति के व्यापक सिद्धांत व्यावसायिकता, सत्यनिष्ठा एवं नैतिकता, निष्पक्षता, सामर्थ्य, सार्वभौमिकता, रोगी केंद्रित तथा परिचर्या गुणवत्ता (Quality of Nursing), जवाबदेही एवं बहुलवाद पर आधारित हैं।
  • नीति में रोग की रोकथाम एवं स्वास्थ्य संवर्धन पर बल देते हुए रुग्ण-देखभाल (Sick-Care) की बजाय आरोग्यता (Wellness) पर ध्यान केंद्रित करने की अपेक्षा की गई है।
  • इस नीति में गैर-संचारी रोगों की उभरती चुनौतियों से निपटने पर भी ध्यान केंद्रित किया गया है।
  • इस नीति में व्यावसायिक चिकित्सा शिक्षा के विनियमन से संबंधित प्रावधान भी किए गए हैं।
  • इस नीति में स्वास्थ्य क्षेत्र के सभी संबद्ध पेशेवरों को विनियमित एवं सुव्यवस्थित करने तथा गुणवत्तायुक्त मानकों को सुनिश्चित करने हेतु ‘राष्ट्रीय संबद्ध व्यावसायिक परिषद’ (National Allied Professional Council) के गठन का प्रस्ताव भी किया गया है।
  • इस नीति में चिकित्सा सेवा संबंधी शिकायतों/विवादों के शीघ्र समाधान हेतु एक पृथक एवं सशक्त ‘चिकित्सकीय न्यायाधिकरण’ (Medical Tribunal) की स्थापना की सिफारिश भी की गई है।
  • स्वास्थ्य देखभाल आपूर्ति क्षेत्र में प्रौद्योगिकी की महत्वपूर्ण भूमिका को पहचानते हुए एक ‘राष्ट्रीय डिजिटल स्वास्थ्य प्राधिकरण’ (NDHA : National Digital Health Authority) के गठन का भी प्रस्ताव है, जो डिजिटल स्वास्थ्य प्रणालियों को विनियमित, विकसित एवं तैनात करने का कार्य करेगा।

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