शास्त्रों में भोजन के नियम क्या है, ऐसे करें भोजन तो रहेंगे स्वस्थ

बल, आयु, रूप और गुण प्रदान करने वाला भोजन महज स्वाद के लिए खाए जाने वाली चीज नहीं है। भोजन हमारे शरीर में पहुंचकर शरीर में आवश्यकता के अनुसार पोषक तत्व प्रदान करता है इसलिए प्राचीन ग्रंथ में भोजन के नियम बनाए गए हैं। प्राचीन ग्रंथ की बताएगा नियमों के अनुसार भोजन ग्रहण करने से मनुष्य के शरीर को बल प्राप्त होता है उसकी आयु लंबी होती है जिनका आधार शरीर क्रिया विज्ञान, चिकित्सा और मनोविज्ञान है। शास्त्रों में भोजन के नियम क्या है (Shastro Me Bhojan Ke Niyam Kya Hai), शास्त्रों के अनुसार भोजन कब करना चाहिए?

शास्त्रों में भोजन के नियम क्या है (Shastro Me Bhojan Ke Niyam Kya Hai)

शास्त्रों में भोजन के नियम क्या है

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एकांत में करें भोजन

भोजन हमेशा एकांत में ही करना चाहिए। शास्त्रों में बताया गया है की भोजन एकांत में करने से मनुष्य भोजन को अच्छे से ग्रहण करता है और भोजन करते समय उसका मन भी शांत रहता है जिससे भोजन को प्रेम से ग्रहण करता है ऐसा करने से मनुष्य के शरीर में भोजन और अधिक ऊर्जा प्रदान करता है।

इन पांच अंगों को भोजन करने से पहले अवश्य धोएं

दोनों हाथ, दोनों पैर और मुख इन 5 अंगूर को धोकर ही भोजन करना चाहिए ऐसा करने वाला शतायु होता है। मनुष्य के शरीर में जठराग्नि मौजूद होती है जो मनुष्य के शरीर के अंदर भोजन को पचाने का काम करती है जब हम इन 5 अंगों को भोजन ग्रहण करने से पहले धोते हैं तो हमारे शरीर के अंदर की जठराग्नि जागृत हो जाती है जिससे भोजन आसानी से पच जाता है।

मौन रहकर भोजन करें ग्रहण

भोजन करते समय मौन रहना चाहिए। ऐसा इसलिए करना चाहिए क्योंकि मनुष्य वात, पित्त और कफ से बहुत ही परेशान रहता है। यदि आप भोजन करते समय बात करते हैं तो आप किस शरीर के अंदर वात दोष उत्पन्न हो जाता है जिससे आपके शरीर में दर्द या फिर जोड़ों में दर्द की समस्या उत्पन्न हो सकती है इसलिए शास्त्रों में भोजन को मौन रहकर ग्रहण करने के नियम को बताया है।

भोजन की निंदा ना करें

शास्त्रों में यह बताया गया है भोजन करते समय या फिर परोसे हुए भोजन की निंदा नहीं करनी चाहिए वह स्वाद में जैसा भी हो उसे प्रेम से ग्रहण करना चाहिए। यदि आप भोजन की निंदा करते हैं तो भोजन आपके शरीर मैं लाभ पहुंचाने की वजह आपको नुकसान पहुंचा सकता है।

रात में भरपेट भोजन ना करें

रात में भरपेट भोजन नहीं करना चाहिए। क्योंकि रात्रि में अधिक भोजन करने से आपका शरीर उस भोजन को अच्छी तरह से बचा नहीं पाता। रात्रि में किया गया भोजन के बाद मनुष्य सोने लगता है जिससे आपके शरीर में चर्बी जमा होने लगती है इसी वजह से शास्त्रों में रात्रि में भरपेट भोजन ग्रहण न करने की सलाह दी गई है।

सोने वाले स्थान पर भोजन करना करें

सोने की जगह पर बैठकर खाना ना खाएं हाथ में लेकर भी कुछ ना खाएं पात्र में लेकर ही भोजन को ग्रहण करें।

थकावट की स्थिति में भोजन करना करें

बहुत थके हुए हो तो आराम करने के बाद ही कुछ खाए पिए। अधिक थकावट की स्थिति में कुछ भी खाने से जवारे या उल्टी होने की आशंका रहती है।

झूठा भोजन ग्रहण ना करें

झूठा किसी को ना दें और स्वयं भी ना खाएं चाहे वह आपका छोड़ा हुआ अन्य ही क्यों ना हो भोजन के बाद झूठे मुंह कहीं न जाएं। आज के समय में मनुष्य हर किसी का जूठा खा रहा है और खाकर बीमार पड़ रहा है क्योंकि जिस मनुष्य नहीं भोजन छोड़ा है या फिर साथ में भोजन एक ही थाली में कर रहा है यदि उस मनुष्य को कोई बीमारी पहले से है तो उसके जीवाणु आपके शरीर में प्रवेश करके आपको भी बीमार बना देंगे इसलिए शास्त्रों में झूठा भोजन करने की साफ मनाही है।

भूखे मनुष्य के द्वारा लाया हुआ भोजन ग्रहण ना करें

जो सेवक स्वयं भूख से पीड़ित हो और उसे अपने लिए भोजन लाना पड़े तो ऐसा भोजन ग्रहण नहीं करना चाहिए। जो आपके प्रति प्रेम स्नेह नहीं रखता उसका अन्य भी नहीं ग्रहण करना चाहिए।

गोद में रखकर भोजन ग्रहण ना करें

खाने की चीज को गोद में रखकर नहीं खाना चाहिए। शास्त्रों यह बताया गया है कि यदि आप भोजन को गोद में रखें ग्रहण करते हैं तो वह भोजन आपके लिए लाभकारी नहीं होगा।

इन परिस्थितियों में भोजन ग्रहण ना करें

अंधेरे में आकाश के नीचे देव मंदिर में भोजन नहीं करना चाहिए इसी तरह एक वस्त्र पहन कर सवारी या बिस्तर पर बैठकर जूते चप्पल पहने हुए और हंसते या रोते हुए भी कुछ नहीं खाना चाहिए।

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अस्वीकरण – यहां पर दी गई जानकारी एक सामान्य जानकारी है। यहां पर दी गई जानकारी से चिकित्सा कि राय बिल्कुल नहीं दी जाती। यदि आपको कोई भी बीमारी या समस्या है तो आपको डॉक्टर या विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए। Candefine.com के द्वारा दी गई जानकारी किसी भी जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।

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