सूर्य ग्रहण कैसे लगता है? सूर्य ग्रहण होने का क्या कारण है? जाने इस के बारे में।

सूर्य ग्रहण कैसे लगता है (Surya Grahan Kaise Lagta Hai), Solar Eclipse, सूर्य ग्रहण होना एक प्राकृतिक घटना है सूर्य ग्रहण कब लगता है तब गर्भवती महिलाओं को बाहर नहीं निकलना चाहिए क्योंकि उसकी गर्भ में पल रहे बच्चे पर सूर्य ग्रहण का बुरा प्रभाव पड़ता है। जब पूर्ण सूर्य ग्रहण होता है तब दिन में भी पृथ्वी पर अंधेरा छाने लगता है। सूर्य ग्रहण कब और क्यों लगता है, सूर्य ग्रहण कब लगता है इन सब सबलो के जबाब आपको यहाँ मिलेंगे।

सूर्य ग्रहण कैसे लगता है (Surya Grahan Kaise Lagta Hai)

सूर्य ग्रहण कैसे लगता है
Surya Grahan Kaise Lagta Hai

Solar Eclipse

सूर्य ग्रहण होना एक प्राकृतिक घटना है। पुराने समय में हिंदू धर्म के अनुसार जब सूर्य ग्रहण होता था तब इसको भगवान का प्रकोप माना जाता था। जब सूर्य ग्रहण होता था तब ना तो कोई पूजा करता था और सारे मंदिरों के पट बंद कर दिए जाते थे। इस समय ना कोई खाता था और ना ही कोई खाना बनाता था।

जब सूर्य ग्रहण हो जाता था तब उसके बाद सबसे पहले स्नान करके पवित्र हुआ जाता था फिर सारे काम शुरू किए जाते थे। आज विज्ञान इतना आगे बढ़ गया है कि यह जो प्राकृतिक घटनाएं होती थी उनके बारे में सही जानकारी दी गई और इसके पीछे इसकी सच्चाई बताई गई।

सूर्य ग्रहण होने का कारण

वैज्ञानिकों के अनुसार यह बताया की पृथ्वी सूर्य के चारों तरफ चक्कर लगाती है। सूर्य एक जगह ही स्थित रहता है। चंद्रमा पृथ्वी के चारों तरफ चक्कर लगाता है। जब चंद्रमा चक्कर लगाते-लगाते सूर्य और पृथ्वी के बीच में एक सीधी लाइन में आ जाता है तब उसको सूर्य ग्रहण कहा जाता है।

वैज्ञानिकों ने यह बताया कि जब सूर्य ग्रहण होता है। चंद्रमा जब सूर्य और पृथ्वी के बीच में आ जाता है। तब चंद्रमा, पृथ्वी पर आने वाला प्रकाश रोक देता है। जिस वजह से सूर्य से निकलने वाली किरणें और घातक हो जाती हैं। जिसमें बहुत सारी अल्ट्रावायलेट किरणें धरती पर पड़ने लगती हैं जो कि मनुष्य के ऊपर बहुत ज्यादा दुष्प्रभाव डालती हैं। डॉक्टरों के अनुसार जब सूर्य ग्रहण होता है तब प्रेगनेंट महिलाओं को बाहर नहीं निकलना चाहिए।

क्योंकि सूर्य से आ रही अल्ट्रावायलेट किरणें उसके बच्चे के ऊपर बहुत ज्यादा प्रभाव डालती हैं और डॉक्टरों के अनुसार यह भी बताया गया है कि जब सूर्य ग्रहण होता है तब हमें अपने खुली आंखों से डायरेक्ट सूर्य ग्रहण को नहीं देखना चाहिए इससे हमारी आंखों की रोशनी भी जा सकती है। सूर्य ग्रहण की प्रक्रिया हमेशा अमावस्या के दिन ही होती है। पृथ्वी अपने अक्ष पर 5 डिग्री झुकी हुई है और चंद्रमा पृथ्वी का चक्कर अंडाकार कक्ष में लगाता है। जिसकी वजह से पूरा सूर्य ग्रहण कई सालों में देखा जाता है।

सूर्य ग्रहण कितने प्रकार के होते हैं

  1. पूर्ण सूर्य ग्रहण
  2. कुंडला कार सूर्य ग्रहण
  3. आंशिक सूर्य ग्रहण

कुंडला कार सूर्य ग्रहण :- जब चंद्रमा सूर्य और पृथ्वी में आता है और सूर्य ग्रहण हमें एक रिंग के टाइप में दिखाई देता है तो इस ग्रहण को कुंडला कार सूर्य ग्रहण कहां जाता है।

आंशिक सूर्य ग्रहण :- जब चंद्रमा सूर्य और पृथ्वी के बीच में आता है परंतु वह सूर्य का कुछ हिस्सा ही ढक पाता है उसको हम आंशिक सूर्यग्रहण कहते हैं।

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