ताजमहल पर निबंध लिखें? ताजमहल किसने बनवाया था?

ताजमहल पर निबंध: ताजमहल शाह जहाँ ने बनवाया था। ताज का सौन्दर्य अनुपम है। इसकी गणना संसार के आठवें है आश्चर्य के रूप में की जाती है। इसकी शिल्पकला और पच्चीकारी अद्वितीय है, वास्तुकला का चरम उत्कर्ष है। यह लगभग साढ़े तीन सौ वर्ष से अधिक पुराना स्मारक है।

ताजमहल पर निबंध (Tajmahal Par Nibandh In Hindi)

ताजमहल पर निबंध
Tajmahal Par Nibandh In Hindi

इसका अद्भुत सौन्दर्य देश-विदेश के लोगों को बरबस ही अपनी ओर आकर्षित करता है। अनेकों लोग प्रतिदिन इसको देखने के लिए आते रहते हैं।

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ताजमहल का निर्माण

ताजमहल का बनना सन् 1631 में प्रारम्भ हुआ था। बीस हजार कारीगरों ने बाईस वर्षों में इसका निर्माण किया था। इसके निर्माण में दीवाने अफ्रीदी के अनुसार 9 करोड़ 16 लाख रुपये व्यय हुए थे। इस इमारत की रूपरेखा एवं नमूना एक वास्तुविद ने बनाया था।

इसका निर्माण सफेद संगमरमर से किया गया। इसके लिए संगमरमर पत्थर मकराना से मँगवाया गया था। उस युग में यातायात के साधनों का विकास नहीं हुआ था। उस समय बैलगाड़ी और ऊँटगाड़ी ही सामान ढोने के काम आती थीं। इस बात का आसानी से अनुमान लगाया जा सकता है कि कितने परिश्रम से संगमरमर के बड़े-बड़े शिलाखण्ड ढोये गये होंगे।

स्थिति

ताजमहल आगरा शहर से लगभग 6 किलोमीटर दूर यमुना नदी के किनारे स्थित है। यह एक आयताकार ऊँचे समतल भूमिखण्ड पर बनाया गया है, जिसकी लम्बाई 290 मीटर और चौड़ाई 96 मीटर है। इसके उत्तर में यमुना नदी बहती है और तीन ओर सुन्दर उद्यान हैं।

वर्णन

ताजमहल का प्रवेशद्वार लाल पत्थर का बना हुआ है, जिस पर कुरान की आयतें सफेद पत्थर पर लिखी हुई हैं। इसके अन्दर एक छोटा-सा अजायबघर है, जिसमें मुगल बादशाहों के अस्त्र-शस्त्र रखे हुए हैं।

इसके बाद ताजमहल के सामने सुन्दर बाग का दृश्य है, जिसमें फव्वारों से सजे हुए जलकुण्ड और दोनों ओर सुन्दर-सुन्दर वृक्ष खड़े हैं। ताज के चारों ओर ऊँची-ऊँची सफेद संगमरमरी मीनारें हैं। मानो 90 मीटर ऊँचे विशाल गुम्बद के नीचे चिरनिद्रा में सोए सम्राट शाहजहाँ और उनकी प्रिय मुमताज की रखवाली कर रही हैं।

चबूतरे की सीढ़ियों को पार करते ही कारीगरों की कलाकारी मुग्ध कर देती है। दीवारों की दस्तकारी और पच्चीकारी दर्शकों का मन मोह लेती है। चारों ओर संगमरमर के चार दालान हैं, सभी दालानों में बहुमूल्य पत्थरों से बने बेल-बूटे हैं। ताज में सर्वत्र पन्ना, पुखराज, नीलम, लाल आदि कीमती पत्थर प्राकृतिक फूल-पतियों जैसे जड़े हुए हैं।

ताजमहल के बड़े गुम्बद के नीचे मुमताज और शाहजहाँ की समाधियों के नमूने हैं। इनके ठीक नीचे उनकी वास्तविक कब्रें हैं। यहाँ इतना अन्धर रहता है कि मोमबत्तियों के प्रकाश में इनको देखा जाता है। वहाँ का वातावरण अगरबत्तियों से सुगन्धित रहता है।

उपसंहार

सौन्दर्य की साक्षात् प्रतिमूर्ति ताजमहल को शरद पूर्णिमा की रात्रि की लाखों लोग देश-विदेश से देखने आते हैं। चाँद की चाँदनी में चमकता हुए इसका शान्त मुख सबको अनायास ही लुभा लेता है। इस अद्वितीय स्मारक का नाम भारत में ही नहीं अपितु सम्पूर्ण जगत में आश्चर्य एवं सम्मान से लिया जाता है। वास्तुकला का अद्वितीय नमूना हमारे देश का गौरव है।

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