नींबू का उपयोग करें इन 19 तरीकों से मिलेंगे अचूक फायदे

नींबू का उपयोग करें इन 19 तरीकों से मिलेंगे अचूक फायदे। निम्बू, नींबू या नीम्बू, कुछ भी कह लें। यह खट्टा फल है। स्वाद और गुणों की खान है। इसे सदा चाव से खाया जाता है। निरोगी लोग भी इसे पसंद करते हैं। रोगी भी पसंद करते हैं। कारण इसके असीम गुण हैं। नींबू (Uses of Lemon) साग, सब्जी, दाल आदि को स्वादिष्ट करने के लिए प्रयुक्त होता है। इससे स्क्वैश, नींबू पानी, बच्चे, युवक तथा बूढ़े सभी चाव से पीते हैं।

नींबू का उपयोग करें इन 19 तरीकों से मिलेंगे अचूक फायदे

नींबू का उपयोग
uses of lemon

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गर्मी में नींबू खास

नींबू गर्मी से विशेष राहत देता है। इसका अचार भी भोजन का विशेष हिस्सा है। यह दवाइयों में विशेष रूप से प्रयुक्त होता है। यह 12 महीने मिलने वाला फल है। बरसात में होने वाला नींबू टिकाऊ नहीं होता। जाड़े की फसल टिकने वाली होती है। खट्टे नींबू तो होते ही हैं, मीठे भी मिलते हैं। सन्तरा, मौसमी, मीठा नींबू आदि भी इसी श्रेणी के फल हैं।

कौन सा नींबू अच्छा होता है

यदि नींबू कागजी हो तो इसे उत्तम माना जाता है। इसका छिलका पतला होता है। इसमें रस ज्यादा होता है तथा आसानी से निकल आता है। यह खट्टा फल होते हुए भी क्षारीय गुणयुक्त होता है। इससे शरीर में खारापन पैदा होता है। चूने की कमी को पूरा करने में भी नींबू का सेवन अच्छा सहायक माना गया है। शरीर में चूना अथवा कैल्शियम की कमी नहीं होने देनी चाहिए।

कैसे खाये नींबू

नींबू सीधे रूप से तो खाया ही जाता है इसके अन्य अनेक उपयोग होते हैं। यह औषधियां बनाने में भी प्रचुर मात्रा में प्रयुक्त होता है। नींबू को अचार के अतिरिक्त मुरब्बे के तौर पर भी प्रयोग करते हैं। अनेक गोलियां तथा चूर्ण बनाने तथा मनुष्य को स्वस्थ रखने के लिए नींबू का बहुत बड़ा योगदान है।

नींबू वायु के विकारों से छुटकारा दिलाता है। भूख बढ़ाने का काम करता है। मंदाग्नि को खत्म करता है। पाचन शक्ति को बढ़ाता है। पेट के कीड़ों को मारकर बाहर निकालता है। नींबू त्रिदोष को खत्म करता है। वायु, पित्त और कफ के विकारों को नियन्त्रण में रखता है। यदि बाई-बादी के कारण पीड़ित हों तो भी नींबू का सेवन सहयोग देगा और स्वस्थ रखने का काम अपने हाथ में संभाल लेगा।

नींबू का उपयोग

  1. खट्टा नींबू, जम्बीरी, नेपाली कागजी, बिजैरा-गागर आदि सब इसकी किस्में हैं। कागजी नींबू महंगा, उत्तम तथा अधिक रस वाला होता है। मीठा नींबू, संतरा, मीठा गागर, मौसमी, मालटा भी इसी जाति के आस-पास के फल हैं।
  2. कागजी नींबू भूख बढ़ाने वाला, वायु का दमन करने वाला, खट्टा हल्का और सुपाच्य है। यह वायु, पित्त, कफ तीनों के विकारों को दूर कर, समानता लाता है।
  3. किसी प्रकार जहरीला पदार्थ खाए जाने से पेट और छाती में कई रोग पैदा होने लगते हैं। ऐसे में नींबू का सेवन बहुत लाभदायक होता है। थकावट में नींबू के रस को पीने से बहुत राहत मिलती है।
  4. पेट में आंव, छाती में कफ की बढ़त, पेट में वायु का इकट्ठा होना, छोटी-छोटी बीमारियां ही बड़ी बीमारियों को जन्म देती हैं। पानी को उबालकर, कोसा ठंडा कर लें। इसमें नींबू का रस (अथवा नींबू को निचोड़ लें) चुटकी भर जवाखार का चूर्ण मिलाकर पी लें। बहुत लाभ होगा।
  5. ऊपर वाले नुस्खे को खौलते पानी में भी प्रयुक्त किया जा सकता है। इसे चाय की तरह गरम-गरम पी लें।
  6. अगर बेचैनी हो रही हो, प्यास खूब लगती हो, गर्मी अधिक महसूस होती हो तो घड़े के पानी में नींबू निचोड़कर पीने से अभूतपूर्व लाभ होगा। दिन में 2-3 बार ले सकते हैं।
  7. पेट में किसी भी अन्य रोग के कारण यदि खाने-पीने में अरुचि होने लगे तो ऐसे में सोंठ, पीपल और काली मिर्च का चूर्ण मिलाकर नींबू का पानी पिलाएं। भूख खूब लगेगी। मन भोजन करने को ललचाएगा।
  8. सिर घूमता हो। चक्कर आते हों, नींद घट गई हो, बेचैनी महसूस होती हो, तो प्रातः घड़े के पानी में धनिया, नागर मोथा, आंवला भिगो दें। तीन घंटों बाद इसे कुचलकर, कपड़छान कर लें। इसमें 30 ग्राम शक्कर मिलाकर एक नींबू निचोड़कर पिलाएं। यह खुराक दोपहर व शाम को भी ले सकते हैं। रोगमुक्त होंगे।
  9. यदि चर्बी बढ़ जाए और थुलथुल मोटापा लगे, पेट भी बढ़ जाए तो प्रातः बिना कुछ खाए, नींबू पानी पी लिया करें। इसमें चीनी न मिलाएं। नियमित सेवन करने से शरीर स्वस्थ रहेगा।
  10. पेट में वायु इकट्ठी रहने, आंव बढ़ जाने, कफ वाला शरीर बना रहने, या किसी भी कारण से पेट की आग कमजोर पड़ जाने, भूख न लगने, छाती में शूल बना रहने आदि को उदर शूल का रोग कहते हैं। इससे पेट अथवा छाती में दर्द भी रहने लगता है। आधा गिलास खौलते पानी में एक नींबू का रस निचोड़ दें। इसमें चुटकी भर असली जवाखार का चूर्ण डाल, पी लेने से आराम मिलता है।
  11. अच्छे कागजी नीबू का रस 750 ग्राम, सुहागा (चौकिया) भुना व पिसा 40 ग्राम, काला नमक 20 ग्राम, सेंधा नमक 30 ग्राम, भुना जीरा 10 ग्राम, भुनी हुई पीसी हींग 3 ग्राम सबको मिलाकर रख लें। ठीक से ढके कांच के बर्तन में रखें। यह नींबू का द्वाव है। इसे पानी के साथ ले सकते हैं। यह बहुत लाभकारी होता है। इससे भूख बढ़ेगी। पेट या छाती में दर्द नहीं होगा। शरीर में हवा नहीं रुकेगी। आपप हल्का-हल्का महसूस करेंगे।
  12. पित्त शांत न हो रहा हो। प्यास बहुत लगती हो। बेचैनी, चक्कर, कमजोरी, लू का लगना तथा पेट व छाती में जलन लगे तो नींबू का शरबत पीने से बहुत लाभ होता है। इसे शिकंजी भी पुकार सकते हैं। नींबू का बढ़िया रस 500 ग्राम चीनी पिसी हुई 750 ग्राम दोनों को खूब मिलाकर इसे कड़ाही या कलई वाले बर्तन में, आंच पर चढ़ाकर पकायें। एक तार चाशनी बनाए। ठंडा हो जाए तो बोतल में रखें। 15 ग्राम शरबत को जरूरत के अनुसार पानी मिलाकर दिन में एक या दो बार पी लें।
  13. भोजन में अरुचि होने लगे। कब्ज महसूस हो। कुछ भी न खाकर, भूखा रहने लगें। इस कारण कमजोरी भी होगी। पेट में कीड़े होने की भी शिकायत लगे ऐसे में नींबू का रस, सोंठ, पीपल, मिर्च इन सबका चूर्ण, खट्टा दही, चीनी मिलाकर जरूरत के अनुसार लें। मात्रा भी आवश्यकता एवं स्वाद के अनुसार कर लें। इसके सेवन से लाभ होगा।
  14. मन्दाग्नि, गैस का बनना, अजीर्ण, अरुचि, कब्ज, इन सबके लिए नींबू की चटनी अचूक दवा समझी जाती है। नींबू का रस 200 ग्राम काले मुनक्के साफ बिना बीज के दानों के 100 ग्राम। बड़ी इलायची के दाने, जीरा भुना हुआ और लॉग, इन तीनों को 10-10 ग्राम लें। चीनी 40 ग्राम तलाव हींग 2 ग्राम सेंधा नमक 20 ग्राम इन सब मसालों को कूट-छानकर रखें। मुनक्के को पीस लें। इन्हें कढ़ाही में पकाएं। सबसे बाद में मुनक्के की पीठी डालें। यह नींबू की चटनी तैयार है। आधा चम्मच तक, एक समय में सेवन करें। दिन में दो बार भी ले सकते हैं।
  15. भूख को अधिक लगाने, पाचन शक्ति को बढ़ाने, भोजन में रुचि पैदा करने, पित्त की गर्मी को शांत करने, गला तर रखने, प्यास बुझाने दिल में हो रही बेचैनी को रोकने के लिए निम्न लाभकारी इलाज कागजी नींबू का रस 50 ग्राम देशी चीनी 50 ग्राम। एक लॉग और पांच काली मिर्च का पिसा बारीक चूर्ण। एक गिलास घड़े का पानी। इन सबको खूब मिला दें। इसे ही नींबू का पन्ना कहेंगे। इसे लेने से ऊपर वाले सारे रोगों में लाभ होगा।
  16. मान लो शरीर पर दिनोंदिन चर्बी चढ़ रही है। कोई व्यायाम अथव कार्य करने से सांस फूलने लग जाती है। पसीना निकलने लगे, पसीने की बदबू भी परेशान करे, तो यहां दिया इलाज जरूरी है। नींबू का रस 50 ग्राम। जो का सत्तू 25 ग्राम आंवले का महीन चूर्ण 125 ग्राम सेंधा नमक 3 ग्राम जवाखार 2 ग्राम। आधा गिलास पानी में मिलाकर, दिन में दो बार पीने से ऊपर दी सभी समस्याएं हल हो जाएंगी।
  17. पेट के कीड़े खत्म करने के लिए, भूख बढ़ाने के लिए, कब्ज दूर कर पेट साफ रखने के लिए, मुंह का स्वाद बनाने के लिए तथा हानिकारक चाय से छुटकारा पाने के लिए नींबू की चाय एक महत्त्वपूर्ण पेयजल है। बनानी भी आसान है। आंच पर से खौलता पानी उतारकर इसे गिलास में डाल लें। इसमें नींबू निचोड़ दें। इसमें अब चीनी की जगह जरूरत के अनुसार शहद डाल लें। इस गर्म-गर्म पी लें। बहुत फायदा करेगी।
  18. छोटे बच्चों की बढ़त 8-10 साल की आयु तक भी कम हो रही हो। रक्त न बन रहा हो। शरीर पर मांस न चढ़ता लगे। हड्डियों में भी बढ़ोत्तरी न हो रही हो, तो इसका कारण उनकी अच्छी देखभाल का न होना भी हो सकता है। पोषण में कमी है। उनके शरीर में विटामिन ए, सी और डी की कमी भी इसका कारण होगा। यदि उनके खानपान में सुधार ले आएं तो, काफी फायदा हो सकता है।
  19. खीरे का रस या दही में नींबू की दो-चार बूंदें डालकर चेहरे पर मलने से निखार आता है। बच्चों को दिन में दो बार, सुबह तथा शाम को ‘नींबू का हरीरा’ देने से खूब लाभ होगा।

नींबू का हरीरा बनाने की विधि

गेहूं का चोकर 10 ग्राम पानी एक कप इस पानी में चोकर को भिगोकर अढ़ाई घंटों तक के लिए पड़ा रहने दें। अब इसे अच्छी तरह मलकर, छानकर, तरल पदार्थ अलग कर लें। अब गिरी की पीठी 10 ग्राम लें एक चम्मच देसी घी

में इसे भून लें। ब्राऊन रंग होने पर, इसमें चोकर का छाना निकाला पानी डालें। आंच पर जब गाढ़ा हो जाए, तो इसे ठंडा कर लें। इसमें अब कागजी नींबू निचोड़कर, शहद मिला लें। यह नींबू का हरीरा तैयार है। इसे दिन में दो बार लेने से बच्चे की हड़ियां मजबूत होंगी। मांस तथा रक्त में भी बढ़ोत्तरी होगी।

आंतों की खराबी रोकने, पेट के कीड़े मारने, भोजन में रुचि पैदा करने, मल के ठीक से न आने, आंतों की कार्य शक्ति बढ़ाने तथा दूध पीने में रुचि पैदा करने के लिए नींबू का मुरब्बा खाना चाहिए। बहुत लाभ करता है।

नींबू का मुरब्बा बनाने का तरीका

अच्छे कागजी पके पीले नींबू किलो इन्हें चीरकर फांकें बना लें। फांक T बनाते समय नींबू ऊपर से कटे, नीचे से जुड़ा रहे। इसके बीज निकाल दें। अब इसे डेढ़ किलो पानी में उबालें पानी अलग कर दें। इसी पानी में डेढ़ किलो चीनी डाल, इसकी दो तार चाशनी बनाएं। अब इसमें उबाले हुए फांक बने नींबू डालकर पकाना है। यह मुरब्बा तैयार है (यदि चाशनी बनाते समय पानी कम लगे तो उसमें कुछ पानी डाला जा सकता है।)

मान लो पेट में हवा भरी रहती है और निकलती कम है बनती ज्यादा है तो इसका इलाज शीघ्र करें। बिना भोजन खाए, पेट में गैस बनना, हवा का भरना आम शिकायत है।

इलाज- एक कप उबलते पानी में, एक नींबू का रस मिलाएं। सुहागा भूनकर बारीक पाउडर बनाकर रखना है। अजवायन का चूर्ण भी लेना है। इन दोनों की थोड़ी-थोड़ी मात्रा लेकर खा लें। इसके ऊपर यह उबले नींबू वाला रस पी लें।

दिन में दो बार, भोजन के बाद इस दवा को लेने से लाभ मिलेगा।

परहेज- खट्टे पदार्थ, नया अन्न, मिठाइयां, बासी व भारी भोजन, चोकर रहित मोटा आटा खाना, पालिश किया हुआ चावल न खाएं। अपने पेशाब-पोटी की जरूरत को कभी न रोकें। इसका खास ध्यान रखें।

नींबू के आचार का उपयोग

नींबू का आचार बनाने की विधि सब जानते हैं। नीबू का आचार घर-घर में बनाया जाता है। यदि इसे भोजन का अंग बना, सुबह-शाम खा लें, तो बहुत लाभ होगा।

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Mamta Jain

मैं ममता जैन मीडिया क्षेत्र में मैं तीन साल से जुड़ी हुई हूं। मुझे लिखना काफी पसन्द है और अब मैने यही मेरा प्रोफेशन बना लिया है। मैं जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएट हूं। हेल्थ, स्वास्थ्य, मनोरंजन, सरकारी योजना, क्रिकेट, न्यूज़ और ब्यूटी पर लिखने में मेरा स्पेशलाइजेशन है। हेल्थ और ब्यूटी से जुड़ी जानकारी जानने के लिए मुझे फॉलो करें।

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