वसा क्या है? वसा के कार्य, वसा के प्रकार और उसके स्रोत क्या है?

वसा क्या है

वसा क्या है (Vasa Kya Hai) इसके बारे में जानते है, कहते हैं, अधिकता किसी भी वस्तु की नुकसानदेह होती है। ठीक यही बात वसा (फैट) पर भी लागू होती है। शरीर को संतुलित वसा की आपूर्ति कर आप स्वस्थ और चुस्त-दुरुस्त बने रह सकते हैं। इसके विपरीत यदि आपके शरीर में जरूरत से अधिक वसा संचित है, तो आप मोटापे से ग्रस्त होकर मधुमेह, उच्च रक्तचाप और हृदय संबंधी रोगों के शिकार हो सकते हैं।

वसा क्या है (Vasa Kya Hai)

वसा क्या है
वसा क्या है (Vasa Kya Hai)

वसा क्या है (Vasa Kya Hai)

वसा एक ऐसा कार्बनिक मिश्रण है, जो कार्बन, हाइड्रोजन और ऑक्सीजन से निर्मित होता है। आहार में ये तत्व ऊर्जा के प्रमुख स्रोत हैं। वसा को जिन तत्वों के एक विशिष्ट समूह से संबंधित माना जाता है, उन्हें ‘लिपिड्स’ की संज्ञा दी जाती है।

वसा को ठोस व तरल दोनों रूपों में ग्रहण किया जा सकता है। सभी तरह की वसा में सतृप्त (सैचुरिटेड) और असंतृप्त (अनसैचुरिटेड) फैटी एसिल का मेल होता है।

वसा का कार्य

वसा शरीर के विभिन्न अंगों की हिफाजत के लिए एक तरह से पैड का काम करती है। इस कारण जहां विभिन्न अंग अपनी जगह स्थिर रहते हैं, वहीं वे बाहरी झटकों से भी सुरक्षित रहते हैं। प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट्स के अलावा वसा आहार का ऐसा प्रमुख पोषक तत्व है, जो शरीर में केलोरी की आपूर्ति करता है।

वसा के प्रकार एवं स्रोत

वसा के कई प्रकार हैं। इनमें सैचुरिटेड, अनसैचुरिटेड और पॉलीअनसैचुरिटेड वसा प्रमुख हैं:

सैचुरिटेड फैट मक्खन, पनीर, दूध आइसक्रीम और मलाई में प्रचुर में मात्र में पायी जाती है। इसके अतिरिक्त यह वसा वनस्पति तेलों-नारियल, ताड़ और खजूर में प्रचुर मात्रा में पायी जाती है।

अनसैचुरिटेड फैट रक्त में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा को संतुलित करने में सहायक है। यद्यपि इस किस्म की वसा में अधिक मात्रा में कैलोरी पायी जाती हैं। इसलिए इसका नियंत्रित रूप से ही सेवन करना हितकर है। ज्यादातर वनस्पति तेल (नारियल, ताड़ और खजूर को छोड़कर) अनसैचुरिटेड वसायुक्त होते हैं।

पॉलीअनसैचुरिटेड वसा रक्त में केलेस्ट्रॉल की मात्रा को कम करने में सहायक है, वशर्ते कि सैचुरिटेड वसा के स्थान पर इनका प्रयोग किया जाए। सूरजमुखी और सोयाबीन के तेल में अनसैचुरिटेड वसा प्रचुर मात्रा में पायी जाती है।

ध्यान रखें

  • सैचुरिटेड वसा के अधिक मात्रा में सेवन से हृदय रोगों के होने की आशंका बढ़ जाती है। इस तरह की वसा के अधिक सेवन से शरीर में मोम की तरह मुलायम एक तत्व प्रचुर मात्रा में बनता है, जिसे कोलेस्ट्रॉल कहते हैं। यह तत्व हृदय की धमनियों में जमा हो जाता है। इस कारण धमनियां संकरी व कठोर हो जाती हैं।
  • वसा रहित दूध व कम वसा वाले डेयरी उत्पादों का प्रयोग करें। मांसाहार व अंडे का जहां तक संभव हो कम से कम सेवन करें।
  • उन खाद्य पदार्थों को ग्रहण करें, जिनमें कुदरती तौर पर वसा कम मात्रा में पायी जाती है। जैसे, अनाज, फल और शाक-सब्जियां आदि।
  • बेहद तले-भुने, फास्ट फूड्स और परिष्कृत (प्रोसेस्ट) खाद्य पदार्थों के सेवन को नियंत्रित करें। बेकरी में तैयार खाद्य पदार्थों के सेवन से जहां तक हो परहेज करें।
  • विभिन्न डिब्बाबंद खाद्य पदार्थों के लेबेल को ध्यान से देखें कि उस पर सैचुरिटेड फैट की मात्र 20 फीसदी से अधिक तो नहीं है। यदि ऐसा है, तो इन खाद्य पदार्थों से परहेज करें।
  • सामान्यतः एक वक्त के भोजन में चाय की एक चम्मचभर मात्रा से ज्यादा तेल ग्रहण करना सेहत के लिए नुकसानदेह है।
  • आपको यह जानकारी रखनी चाहिए कि अमुक खाद्य पदार्थ में किस मात्रा में वसा मौजूद है। 20 वर्ष से अधिक आयु के लोगों को डाइट कंसल्टेंट से परामर्श कर अपने कोलेस्ट्रॉल स्तर की जांच करवानी चाहिए।

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