वसा में घुलनशील विटामिन तथा उनका प्रभाव

वसा में घुलनशील विटामिन के बारे में जानकारी दी जा रही है। जब हम भोजन करते हैं तब भोजन से प्राप्त विटामिन हमारे शरीर के वसा (vasa mein ghulansheel vitamin) में जाकर अवशोषित हो जाते हैं और यह हमारे शरीर के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण होते हैं। बहुत से ऐसे विटामिन A, D, E, K है जो वसा में आसानी से खुल जाते हैं।

वसा में घुलनशील विटामिन

वसा में घुलनशील विटामिन

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वसा में घुलनशील विटामिन

  • विटामिन्स को दो श्रेणियों में बांट सकते हैं। एक वे जो पानी में घुलनशील होते हैं। ये पेशाब के साथ शरीर से बाहर निकल जाते हैं। दूसरे वे जो वसा में घुल-मिल जाते हैं तथा शरीर में ही समा जाते हैं।
  • पहले प्रकार के विटामिन्स को रोज़ाना लेना ज़रूरी है। इस श्रेणी में आते हैं विटामिन बी काम्पलेक्स तथा सी। दूसरी प्रकार के विटामिन्स को रोज़ाना भोजन में शामिल करना ज़रूरी नहीं होता। ऐसा इसलिए कि ये शरीर में मौजूद रहते हैं। पेशाब द्वारा निकलते नहीं।
  • वसा या चर्बी में घुलनशील व शरीर में रच जाने वाले विटामिन्स A, D, E तथा कK होते हैं।

विटामिन ए

शरीर में विटामिन ए की कमी होने से शरीर की त्वचा शुष्क हो जाती है। रतौंधी होने का भय रहता है। यदि यह अधिक होगा तो चिड़चिड़ापन, मितली आना, हड्डियों में दर्द और बालों का झड़ना हो सकता है। इसे हम आम, संतरा, गाजर, पपीता, कलेजी, अण्डे की जर्दी, मछली, दूध, मक्खन, शार्क ऑयल आदि से प्राप्त करते हैं। यह शरीर का विकास करता है।

विटामिन डी

यदि हमारे शरीर में विटामिन डी की कमी होगी तो- धमनियां सख्त हो जाती हैं। जोड़ों में दर्द रहता है। शरीर का भार घटने लगता है। पाचन शक्ति कमज़ोर हो जाती है। मांसपेशियों में ऐंठन रहती हैं। यदि विटामिन डी उचित मात्रा में खाएंगे तो हड्डियां मजबूत होती हैं। विटामिन ‘डी’ हमें सूर्य की किरणों से काफी मात्रा में प्राप्त हो जाता है। अण्डे की जर्दी, दूध, मक्खन तथा मछली का तेल भी विटामिन ‘डी’ देते हैं। एक मोटी-सी बात जिन पदार्थों में विटामिन ‘ए’ मिलता है उनमें डी भी अममून होता है। दूध तथा पनीर में विटामिन डी काफी रहता है। जबकि गाजर, टमाटर, गेहूं, मक्का में कुछ-कुछ।

विटामिन ई

Vitamin K को ‘टॉकेफिरोल’ नाम से भी जानते हैं। इसकी कमी होने से हमारी मांसपेशियां ढीली होने लगती हैं। महिलाओं के प्रजनन कोषों में टूट-फूट होना, लीवर में विकार आना आदि हो जाता है। विटामिन ई युवतियों का मासिक धर्म नियमित कर देता है। इसकी वजह से शरीर में आक्सीजन संगृहीत रहती है। हम इसे दूध, गेहूं का चोकर, अनाज से निकले तेल, पत्तेदार हरी सब्ज़ियों, वनस्पति तेलों, मक्खन, अण्डा, जिगर आदि से प्राप्त करते हैं।

विटामिन के

यदि हमारे शरीर में विटामिन के की कमी हो तो महिलाओं को रक्तस्राव बढ़ने का भय रहता है। चोट लगने पर अधिक खून बहता है। जिसके शरीर में विटामिन के की कमी नहीं होती, उसे चोट लगने पर भी कम खून गंवाना पड़ता है। विटामिन के हमें इन भोज्य-पदार्थों से प्राप्त होता है-अण्डे की ज़र्दी, टमाटर, गेहूं का चोकर, मक्खन, दूध आदि।

इस प्रकार हमें विटामिन ए, डी, ई तथा के की सही मात्रा प्राप्त कर, अपने शरीर को स्वस्थ रखना चाहिए। जो ज़रूरी भी होता है।

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अस्वीकरण – यहां पर दी गई जानकारी एक सामान्य जानकारी है। यहां पर दी गई जानकारी से चिकित्सा कि राय बिल्कुल नहीं दी जाती। यदि आपको कोई भी बीमारी या समस्या है तो आपको डॉक्टर या विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए। Candefine.com के द्वारा दी गई जानकारी किसी भी जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।

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