विशेषण किसे कहते हैं – परिभाषा, विशेषण के भेद कितने होते हैं और उदाहरण

विशेषण किसे कहते हैं :- संज्ञा या सर्वनाम शब्दों की विशेषता [गुण, दोष, संख्या, परिमाण आदि बताने वाले शब्दों को विशेषण कहते हैं। विशेषण एक विकारी शब्द है। जैसे- लम्बा, मोटा, काला, चार, दस आदि। ध्यान दें- संज्ञा या सर्वनाम की विशेषता बताने वाले शब्दों को विशेषण कहते हैं, जबकि जिस संज्ञा या सर्वनाम की विशेषता बतायी जाती है उसे विशेष्य कहते हैं। जैसे- सीता सुंदर है में सीता विशेष्य एवं सुंदर विशेषण है। जो शब्द विशेषण की विशेषता बताते हैं, उन्हें प्रविशेषण कहते हैं। जैसे- 1. इस पर्वतमाला में बहुत ऊँचे-ऊँचे पहाड़ हैं। इस वाक्य में बहुत प्रविशेषण है, क्योंकि यह पहाड़ के लिए प्रयुक्त विशेषण शब्द ऊँचे-ऊँचे की विशेषता बताने का कार्य कर रहा है।

विशेषण किसे कहते हैं (Visheshan Kise Kahate Hain)

विशेषण किसे कहते हैं

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विशेषण किसे कहते हैं

विशेषण शब्द विशेष्य से पूर्व (पहले) भी आते हैं और बाद में भी

पूर्व में प्रयुक्त विशेषण शब्दों के उदाहरण

  1. थोड़ा-सा पानी डालो।
  2. पच्चीस रुपये की पेन है।
  3. पहला स्थान मेरा है।
  4. एक मीटर कपड़ा दो।

उपर्युक्त वाक्य में थोड़ा-सा, पच्चीस, पहला, एक मीटर आदि विशेषण शब्द हैं।

बाद में प्रयुक्त विशेषण शब्दों के उदाहरण

  1. यह रास्ता लंबा था।
  2. घोड़ा काला है।
  3. रामू मोटा है।

उपर्युक्त वाक्य में लंबा, काला एवं मोटा विशेषण शब्द हैं।

विशेषण के भेद कितने होते हैं

विशेषण के भेद- सामान्यतः विशेषण के 4 भेद हैं।

  1. गुणवाचक विशेषण।
  2. संख्यावाचक विशेषण।
  3. परिमाणवाचक विशेषण।
  4. सार्वनामिक विशेषण/संकेतवाचक/निजवाचक विशेषण

1. गुणवाचक विशेषण

जिन विशेषण शब्दों से संज्ञा अथवा सर्वनाम शब्दों के गुण, दोष, आकार, रंग, दशा आदि का बोध हो, उन्हें गुणवाचक विशेषण कहते हैं। विशेषण के सभी भेदों में गुणवाचक विशेषणों की संख्या सबसे अधिक होती है। जो इस प्रकार हैं-

  • दिशा- पूर्वी, पश्चिमी, उत्तरी, दक्षिणी आदि ।
  • गुण- भला, बुरा, समझदार, कड़वा, मीठा, खट्टा, दानी, बुद्धिहीन, कुशाग्र, मोह, योग्य, अयोग्य, चंचल, मनोरम, खोटा, नटखट, दुश्चरित्र, अच्छा, न्यायी, सुहावना, सर्वोत्तम, सरीखा, उचित, अनुचित, सीधा, धार्मिक, झूठा, दुष्ट आदि।
  • दशा- मोटा, पतला, सूखा, गीला, भारी, गरीब, रोगी, स्वस्थ, गाढ़ा, घना आदि।
  • रंग- काला, पीला, सफेद, चमकीला, उजला, धुँधला आदि।
  • आकार- गोल, चौकोर, तिकोन, लंबा, चौड़ा, बड़ा, छोटा, सुंदर, तिरछा, नुकीला आदि ।
  • काल- नया, पुराना, सनातन, भूत, भविष्य, वर्तमान, अगला, पिछला, प्राचीन, आगामी आदि। स्थान- भीतर, बाहर, अंदर, ऊपर, दाँया, बाँया, देशीय, पंजाबी, बनारसी, गुजराती, राजस्थानी, भारतीय, अमेरिकी, इलाहाबादी आदि ।

ध्यान दें- गुणवाचक विशेषणों में सा प्रत्यय जोड़कर गुणों में हीनता का भाव लाया जाता है अर्थात् उसके गुणों में कमी की जाती है। जैसे- मोटा-सा, पतला-सा, ऊँचा-सा, बड़ा-सा, छोटी-सी आदि।

  1. बगीचे में सुंदर फूल हैं।
  2. मोटा आदमी आ रहा है।
  3. छोटी-सी ट्रेन खड़ी है।

इन वाक्यों में सुंदर, मोटा और छोटी-सी गुणवाचक विशेषण हैं।

2. संख्यावाचक विशेषण

जिन विशेषण शब्दों से संज्ञा या सर्वनाम की संख्या का बोध हो [संख्या की जानकारी मिले। उसे संख्यावाचक विशेषण कहते हैं। जैसे- चार घोड़े, दस हाथी, अनेक घोड़े आदि इन वाक्यों में चार, दस और अनेक शब्द संख्यावाचक विशेषण हैं। संख्यावाचक विशेषण भी 2 प्रकार के होते हैं।

  1. निश्चित संख्यावाचक विशेषण- ये निश्चित संख्या का बोध कराते हैं- जैसे- एक, दस, पाँच आदि।
  2. अनिश्चित संख्यावाचक विशेषण- ये अनिश्चित संख्या का बोध कराते हैं। जैसे- कई, अनेक, सब, बहुत आदि।
1. निश्चित संख्यावाचक विशेषण

– प्रयोग के आधार पर निश्चित संख्यावाचक विशेषण 5 प्रकार के होते हैं, जो कि निश्चित संख्या के बारे में जानकारी प्रदान करते हैं।

  1. गणनावाचक विशेषण।
  2. क्रमवाचक विशेषण।
  3. आवृत्तिवाचक विशेषण।
  4. समुदायवाचक विशेषण।
  5. प्रत्येक बोधक विशेषण।
1. गणनावाचक विशेषण

जो संख्यावाचक विशेषण पूर्णांक एवं अपूर्णांक के रूप में गिने जा सकें, गणनावाचक विशेषण कहलाते हैं। गणनावाचक विशेषण के भी 2 भेद होते हैं-

  1. पूर्णाक बोधक
  2. अपूर्णांक बोधक
  • पूर्णांक बोधक विशेषण – जो गणनावाचक विशेषण पूर्णांक के रूप में हों, उन्हें पूर्णांक बोधक विशेषण कहते हैं। जैसे एक, दो, तीन, चार, सात, दस आदि।
  1. पच्चीस रुपए दीजिए।
  2. दो बैल आ रहे हैं।

उपर्युक्त वाक्यों में दो और पच्चीस पूर्णांक संख्या का बोध करा रहे हैं। अतः ये पूर्णांक बोधक विशेषण हैं।

  • अपूर्णांक बोधक विशेषण – जो गणनावाचक विशेषण पूर्णांक के रूप में नहीं होते हैं, उन्हें अपूर्णांक बोधक विशेषण कहते हैं। जैसे- आधा, पौना, सवा, डेढ़, ढाई, चौथाई आदि।
  1. आधा किलो चीनी।
  2. सवा रुपये चाहिए।
2. क्रमवाचक विशेषण

जो संख्यावाचक विशेषण संख्या के क्रम को सूचित करते हैं, उन्हें क्रमवाचक विशेषण कहते हैं। जैसे- पहला, दूसरा, तीसरा, चौथा आदि।

  1. पहला लड़का यहाँ आए।
  2. दूसरा लड़का कहाँ गया।
  3. पंक्ति का तीसरा लड़का खड़ा हो जाए।

उपर्युक्त वाक्यों में पहला, दूसरा और तीसरा व्यक्ति के क्रम को दर्शा रहे हैं, अतः यहाँ क्रमवाचक विशेषण है।

3. आवृत्तिवाचक विशेषण

जो संख्यावाचक विशेषण किसी संख्या की आवृत्ति को सूचित करे, उसे आवृत्तिवाचक विशेषण कहते हैं। जैसे- दूना, तिगुना, चौगुना, दोबारा, दुगना, दोहरा आदि।

  1. मोहन तुमसे चौगुना काम करता है।
  2. मैं उससे दूना मेहनत करूँगा।
4. समुदायवाचक/समूहवाचक विशेषण

वे संख्यावाचक विशेषण जो समूह या समुदाय का बोध कराते हैं, उन्हें समुदाय/समूहवाचक विशेषण कहते हैं। जैसे- दोनों, तीनों, चारों, पाँचों आदि। समूह या समुदाय का बोध करा रहे हैं।

  1. दोनों पेड़ सूख गए।
  2. तुम तीनों घूम आओं।
  3. चारों ने भोजन कर लिया।
5. प्रत्येक बोधक विशेषण

जो संख्यावाचक विशेषण एक (अकेले का) का बोध कराता है, उसे प्रत्येक बोधक विशेषण कहते हैं। जैसे- हरेक (हर-एक), प्रत्येक, एक-एक, दो-दो आदि।

  1. हरेक ने अपना काम पूरा कर लिया।
  2. प्रत्येक को प्रसाद मिला।
  3. एक-एक करके आओ।
  4. हर-एक के घर में मोबाइल है।
2. अनिश्चित संख्यावाचक विशेषण

जिस संख्यावाचक विशेषण से अनिश्चित संख्या (बहुत्व) का बोध होता है, उसे अनिश्चित संख्यावाचक विशेषण कहते हैं। जैसे- अनेक, कितने, कई, सभी, बहुत, ढेर सारे, कुछ आदि।

  1. दादी ने ढेर सारे खिलौने खरीदे।
  2. कुछ बच्चे खेल रहे हैं।
  3. कई दर्शकगण हैं।

उपर्युक्त वाक्यों में प्रयुक्त ढेर सारे, कुछ, कई आदि शब्द अनिश्चित संख्या का बोध करा रहे हैं।

नोट- निश्चित संख्यावाचक विशेषण में पूर्णांक बोधक विशेषण के पहले लगभग या करीब शब्द एवं बाद में ओं प्रत्यय लगाने से निश्चित संख्यावाचक विशेषण, अनिश्चित संख्यावाचक विशेषण हो जाता है। जैसे

  1. लगभग चालीस लोग थे।
  2. सैकड़ों लोग मारे गए। [ सैकड़ों में ‘ओं’ प्रत्यय लगा हुआ है]

नोट- कभी-कभी वाक्य में दो पूर्णांक बोधक शब्द एक साथ आकर अनिश्चिय वाचक विशेषण बन जाते हैं। जैसे

  1. दो-चार लोग चले आओ।
  2. पचास-साठ लोग बचे हैं।

3. परिमाणवाचक/परिमाणबोधक विशेषण

जिन विशेषण शब्दों से किसी वस्तु की मात्रा अथवा माप तौल का बोध होता है, उसे परिमाणवाचक/परिमाण बोधक विशेषण कहते हैं। जैसे

  1. मुझे चार किलो चीनी दो।
  2. मुझे बहुत सारा दूध चाहिए।
  3. मेरे सूट में साढ़े तीन मीटर कपड़ा लगा।

परिमाणवाचक विशेषण के भी 2 भेद होते हैं।

  1. निश्चित परिमाणवाचक विशेषण
  2. अनिश्चित परिमाणवाचक विशेषण
1. निश्चित परिमाणवाचक विशेषण

जिन विशेषण शब्दों से किसी वस्तु की निश्चित मात्रा का बोध होता है, उसे निश्चित परिमाणवाचक विशेषण कहते हैं। जैसे

  1. अभिषेक बाजार से चार किलो जलेबी लाया।
  2. बाजार से एक तोला हींग लेते आना।
  3. गाय ने चार लीटर दूध दिया।
2. अनिश्चित परिमाणवाचक विशेषण

जिन विशेषण शब्दों से किसी वस्तु की निश्चित मात्रा का बोध न हो, उसे अनिश्चित परिमाणवाचक विशेषण कहते हैं। जैसे

  1. गिलास में थोड़ा दूध है।
  2. थोड़ा-सा दूध गरम कर दो।

नोट- निश्चित परिमाणवाचक विशेषण के पहले लगभग या करीब एवं अंत में ओं प्रत्यय लगाने से निश्चित परिमाणवाचक विशेषण, अनिश्चित परिमाणवाचक विशेषण में बदल जाता है। जैसे

  1. मेरे पास लगभग चार लीटर दूध होगा।
  2. सैकड़ों लीटर दूध खराब हो गया। [सैकड़ों में ओं प्रत्यय लगा है]

4. निजवाचक/संकेतवाचक/सार्वनामिक विशेषण

पुरुष वाचक और निजवाचक सर्वनाम (आप, अपना, अपने आप आदि) शब्दों को छोड़कर अन्य सभी सर्वनाम, संज्ञा के आगे लगकर संकेतवाचक/सार्वनामिक विशेषण बनाते हैं। जैसे

  1. वह गाय सुंदर है।
  2. ये लड़के क्या कर रहे हैं।

व्युत्पत्ति के आधार पर सार्वनामिक विशेषण के 2 भेद होते हैं-

  1. मौलिक सार्वनामिक विशेषण
  2. यौगिक सार्वनामिक विशेषण
1. मौलिक सार्वनामिक विशेषण

जो सर्वनाम बिना रुपांतर के संज्ञा के पहले विशेषण के रूप में प्रयुक्त होता है, उसे मौलिक या मूल सार्वनामिक विशेषण कहते हैं। जैसे यह, वह, कोई, कुछ आदि।

  1. वह लड़का विद्यालय जा रहा है।
  2. यह घर सुंदर है।

उपर्युक्त वाक्यों में वह, यह, कोई, कुछ मौलिक सार्वनामिक विशेषण हैं।

2. यौगिक सार्वनामिक विशेषण

जो सर्वनाम किसी प्रत्यय के योग से बनकर संज्ञा की विशेषता बताते हैं, वे यौगिक सार्वनामिक विशेषण कहलाते हैं। जैसे- ऐसा, कैसा, जैसा, कितना, इतना, जितना आदि।

  1. ऐसा आदमी मैंने नहीं देखा।
  2. कैसा घर बना है।

उपर्युक्त वाक्यों में ऐसा, कैसा, कितने, जैसा यौगिक सार्वनामिक विशेषण हैं।

सर्वनाम एवं सार्वनामिक विशेषण में अंतर

  • जिन शब्दों का प्रयोग संज्ञा शब्दों के स्थान पर होता है, उसे सर्वनाम कहते हैं, जबकि जिन शब्दों का प्रयोग संज्ञा से पहले या बाद में विशेषण के रूप में होता है, उसे सार्वनामिक विशेषण कहते हैं। आइए इसे उदाहरण के माध्यम से समझते हैं। जैसे – 1. वह सुंदर है। 2. वह गाय सुंदर है।
  • पहले वाक्य वह सुंदर है में वह शब्द सर्वनाम है क्योंकि वह शब्द किसी संज्ञा के स्थान पर आया है।
  • जबकि दूसरे वाक्य वह गाय सुंदर है में वह शब्द सार्वनामिक विशेषण है, क्योंकि इस वाक्य में वह शब्द संज्ञा (गाय) के आगे लगभग उसकी (गाय की) विशेषता बताने का कार्य। कर रहा है।

परिमाणवाचक एवं संख्यावाचक विशेषता में अंतर

  • जिन वस्तुओं को एक, दो, तीन, चार अर्थात संख्या के रूप में नहीं गिना जा सकता किन्तु उन वस्तुओं की माप-तौल की जा सकती है तो ऐसे शब्दों को परिमाणवाचक विशेषण कहते हैं। जैसे- मेरे पास थोड़ा दूध है।
  • इस वाक्य में थोड़ा शब्द मात्रा (माप-तौल) के रूप में प्रयुक्त
  • किया गया है। इसीलिए यह परिमाणवाचक विशेषण है।
  • जिन वस्तुओं की गिनती की जा सके अर्थात् जिसे संख्या के रूप में [एक, दो, तीन, चार….आदि] गिना जा सके। उन्हें संख्यावाचक विशेषण कहते हैं। जैसे- मेरे पास एक पेन है।

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