वॉलीबॉल के नियम, मैदान, सर्विस एरिया, नेट, वॉलीबॉल की पूरी जानकारी

वॉलीबॉल के नियम:- इस खेल में दोनों टीमों में छह-छह खिलाड़ी होते हैं। गेंद नेट के पार भेजी जाती है। यह विरोधी पाले (Volleyball Rules in Hindi) में नेट के पार सीमांकित क्षेत्र के भीतर ही गिरनी चाहिए। कोशिश यह की जाती है कि विरोधी टीम न तो इसे लौटा पाए और न ही इसे जमीन पर गिरने से रोक पाए। गेंद को गति देने के लिए कमर से ऊपर शरीर का कोई भी भाग इस्तेमाल किया जा सकता है।

वॉलीबॉल के नियम (Volleyball Rules in Hindi)

वॉलीबॉल के नियम

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वॉलीबॉल के नियम

मैदान

इसमें सीमा रेखाएँ भी शामिल रहती हैं। यदि गेंद इनसे परे चली जाए तो ही उसे आउट माना जाता है आक्रमण रेखाएँ (अटैक लाइन्स) किनारा रेखाओं से परे कितनी ही दूरी तक बढ़ी मानी जा सकती हैं।

सर्विस एरिया अंकन

दो लाइनें 15 सेमी० (6 इंच), लम्बी और 5 सेमी० (2 इंच) चौड़ी और सिरा रेखा से 20 सेमी० (8 इंच) पीछे और इसके लम्ब दिशा में खींची जाती है। इनमें से एक तो दाई ओर की किनारा रेखा के साथ-साथ होती है और दूसरी इसके 3 मीटर (9 फुट 10 इंच) परे । बाईं और सर्विस क्षेत्र की न्यूनतम गहराई 2 मीटर (6 फुट 6 इंच) होती है।

नेट

3 फुट 3 इंच अथवा 1 मीटर चौड़ा और 9.32 मीटर लम्बा होता है। यह जिस जाली से बना होता है उसका एक खाना 10 सेंटीमीटर (4 इंच) वर्ग का होता है। इसके ऊपरी हिस्से पर 5 सेमी अथवा 2 इंच चौड़ा सफेद कैनवस दुहराकर लगाया होता है। यह लचकीली केवल से टंगा होता है। इसमें गुजरती केवल तनी होती है नेट की दोनों तरफ लंब अथवा ऊर्ध्वाधर टेप लटकी होती है। इसके ऊपर लम्ब एरियल उभरे होते हैं।

वर्टीकल साइड मार्कर और लचकली स्टिक

किनारा रेखाओं और मध्य रेखा के वटकल अथवा लम्ब दिशा में दो सरकायी जा सकने वाली टेप लगाई जाती है। यह 5 सेमी (अथवा 2 इंच) चौड़ी और सफेद सामग्री की बनी होती है और 1 मीटर (अथवा 3 फुट 3 इंच) चौड़ी होती है।

इन टेपों के समानान्तर और उनके बाहर छूते हुए दो लचकीली स्टिकें नेट से बाँध दी जाती हैं। ये दोनों एक-दूसरे से 9 मीटर 40 सेमी अर्थात् प्रत्येक वर्टीकल साइड मार्कर के बाहरी किनारे से 20 सेमी दूर होती है। ये दोनों स्टिके 1 मीटर 80 सेमी० (6 फुट) लम्बी होती हैं और इनका व्यास (डायामीटर) 10 मिलीमीटर (चौड़ाई इंच) होता है। इन्हें फाइबरग्लास अथवा अन्य किसी सामग्री से बनाया जाता है। यह नेट से 80 सेमी० (3 फुट 1 इंच) ऊपर होती हैं। ये टेप और स्टिक नेट का भाग ही माने जाते हैं नेट जिन खम्भों पर लगाया गया होता है वे किनारा रेखाओं से 50 सेमी (20 इंच) परे होते है यह ध्यान रखा जाता है कि खिलाड़ियों अथवा अम्पायरों के लिए वे किसी प्रकार की बाधा न बनें।

तापमान

यदि तापमान 10 डिग्री सेंटीग्रेड से नीचे हो तो वालीबाल के मुकाबले नहीं होने चाहिए ।

पोशाक

खिलाड़ी अपनी टीम के रंगों में जर्सियाँ और नेकर पहनते हैं। उनकी जर्सियों के आगे अर्थात् सामने (वॉलीबॉल के नियम) की ओर तथा पीछे की ओर नम्बर होते है। मौसम ठण्डा होने पर खिलाड़ी नम्बर वाले ट्रैक सूट भी पहन सकते हैं। जूते हल्के और बिना एडी के गैर लवकीले होने चाहिए। नंगे पैर खेलने के लिए खिलाड़ियों को अनुमति लेने की जरूरत होती है। ऐसे ही सिर पर ऐसा कुछ नहीं पहना जा सकता जिससे चोट लगने का खतरा हो। खिलाड़ियों की जरसी पर 8 सेमी० से 15 सेमी आकार के अंक छाती पर और 15 सेमी आकार के पीठ पर होने चाहिए।

अधिकारी

इस खेल का नियंत्रण करने वाले अधिकारी होते हैं-

  1. रेफरी,
  2. उसकी सहायता के लिए अम्पायर,
  3. अधिकृत स्कोरर और
  4. दो लाइन्समैन ।

टीम अधिकारी

प्रशिक्षक, मैनेजर और कप्तान टीम को अनुशासित रखने के लिए उत्तरदायी होते हैं। उन्हें टाइम आउट अथवा स्थानापन्न खिलाड़ी की माँग करने का अधिकार होता है। कोच मैदान (वॉलीबॉल के नियम) में घुस तो नहीं सकता परन्तु अपने खिलाड़ियों को निर्देश अवश्य दे सकता है। कप्तान ही ऐसा खिलाड़ी होता है जिसे अधिकारियों से बात करने की अनुमति होती है। यदि किसी नियम की व्याख्या के बारे में मतभेद हो तो उसका फैसला वहीं पर रेफरी और कप्तान के बीच कर लिया जाना चाहिए । मैच के दौरान किसी फैसले के विरुद्ध किसी प्रकार की अपील नहीं की जा सकती।

पोजीशन अथवा स्थिति

सर्विस के समय खिलाड़ी निर्धारित पोजीशन ही ले सकते हैं परन्तु सर्विस के बाद नेट के अपने तरफ के कोर्ट में वे कहीं भी आ-जा सकते है। जगह अर्थात् पोजीशन संबंधी (वॉलीबॉल के नियम) कोई भी गलती ‘फल्ट’ होती है और ऐसी गलती करने वाला पक्ष इस गलती की हालत में जितने भी अंक बनाता है वे खो देता है। परन्तु विरोधी पक्ष के सभी अंक रहते हैं। पोजीशन संबंधी गलती पकड़ने जाने पर तत्काल ही ठीक पोजीशन ली जानी चाहिए।

यदि गलती करने वाली टीम सर्विस कर रही हो तो उसकी सर्विस रद्द कर दूसरी टीम को दी जाएगी। अन्यथा विरोधी टीम को अंक दिया जाएगा। सर्विस बदलने पर सर्विस जिस टीम ने करनी होती है उसके खिलाड़ी घड़ी की सुई के घूमने की दिशा में एक-एक स्थान घूम जाते हैं और तब सर्विस करते हैं। हर सेट में घूमने अथवा आवर्तन (रोटेशन) का क्रम वही बना रहता है।

गेंद

यह सुनम्य चमड़े की बनी होती है। इसके अन्दर एक ब्लैडर होता है। यह रबर अथवा अन्य किसी संश्लिष्ट पदार्थ (सिंथेटिक मैटीरियल) की भी बनी हो सकती है। इसका रंग एक ही होना चाहिए। इसकी परिधि 60-68 सेमी के बीच और वजन 260-280 ग्राम के बीच होना चाहिए । गेंद का दाब 0.48 व 0.52 किलो सेमी होना चाहिए।

खेल अवधि – मैच पाँच सेट अथवा गेम में पूरा होता है।

विश्राम काल

दो गेम अथवा सेट के बीच विश्राम काल की अवधि दी जाती है। पहली तीन विश्राम काल अवधियाँ दो-दो मिनट की होती है। और चौथे और पाँचवें सेट के बीच की अवधि पाँच मिनट तक की हो सकती है। खिलाड़ियों को चोट आदि लग जाए तो तीन मिनट तक खेल रोका जा सकता है।

मौसम खराब होने के कारण खेल बीच में ही बन्द करना पड़े तो इसे उसी कोर्ट पर पुनः चालू किया जा सकता है। परन्तु शर्त (वॉलीबॉल के नियम) यह है कि खेल रुके हुए चार घंटे की अवधि से ज्यादा न बीता हो। खेल जिस हालत में रुका था उसी हालत से शुरू किया जाता है। यदि ऐसा न हो तो जिस सेट को अधूरा छोड़ दिया गया हो उसे फिर से खेला जाता है।

साइड अथवा तरफ

खेल शुरू होने से पहले दोनों टीमों के कप्तान टास करके फैसला करते है कि किस टीम ने साइड चुननी है और किसने पहले सर्विस लेनी है। हर सेट के बाद टीमें साइड बदलती हैं। निर्णायक सेट से पहले ऐसा नहीं किया जाता। तब दुबारा टास करके फैसला किया जाता है कि किस टीम को कौन-सी साइड लेनी है अथवा सर्विस करनी है।

निर्णायक सेट में एक टीम के 8 अंक बना लेने पर साइडें बदली जाती है। ऐसा बिना खेल रोके किया जाता है। उस समय खिलाड़ियों को कोई निर्देश नहीं दिए जाते।

स्कोरिंग अर्थात् अंक

अगर कोई टीम नेट के पार गेंद ठीक लौटाने में सफल नहीं होती तो उसके विरुद्ध ‘फाल्ट’ अंकित हो जाती है। यदि (दंडित) फाल्ट करने वाली टीम सर्विस कर रही होती है तो वह सर्विस खो देती है। यदि दंडित टीम सर्विस नहीं कर रही होती तो जिस टीम ने सर्विस को होती है उसे अंक मिल जाता है। केवल सर्विस करने वाली टीम के ही अंक बनते हैं। सेट अथवा गेम उस समय जीत ली जाती है जब एक टीम 15 अंक बना लेती है और दूसरी ट्रीम उससे कम-से-कम दो अंक पिछड़ी होती है। यदि 14-14 पर दोनों टीमें बराबर हों तो खेल तब तक चलता रहता है जब तक एक टीम दूसरी से दो अधिक नहीं बना लेती।

सर्विस

रेफरी की सीटी के बाद पीछे दाएँ किनारे खड़ा खिलाड़ी गेंद को खेल में डालता है। अर्थात् सर्विस करता है। सर्विस करने वाला सर्विस क्षेत्र में खड़ा होता है। और अपने हाथ (खुले अथवा बन्द) से गेंद पर प्रहार करता है। सर्विस करने पर गेंद यदि नेट को नेट एरियल अथवा इसके काल्पनिक विस्तार अथवा सर्विस करने वाली टीम के खिलाड़ी से छू जाए अथवा कोर्ट से बाहर गिरे तो ‘फाल्ट’ मानी जाती है। सर्विस रोटेशन से प्रत्येक खिलाड़ी को करनी होती है। एक नम्बर के खिलाड़ी के बाद 6 नम्बर का खिलाड़ी सर्विस करेगा। तब खिलाड़ियों की स्थिति होगी। 345/216 इसी क्रम से घूमते खिलाड़ी सर्विस करेंगे।

जब तक ‘फाल्ट’ नहीं होता टीम सर्विस करना जारी रखती है। फाल्ट होने पर ‘साइड आउट’ बोला जाता है; तब दूसरी टीम को सर्विस का अवसर मिलता है। नयी गेम में वह टॉम सर्विस शुरू करती है जिसने पिछली गेम में सर्विस नहीं की होती परन्तु ठीक खिलाड़ी द्वारा ही सर्विस की जानी चाहिए।

गेंद खेलना

नेट के पार भेजने के पहले हर टीम तीन बार गेंद छू सकती है। कमर से ऊपर शरीर के किसी भी भाग से गेंद भेजी जा सकती है। पर शर्त यह है कि गेंद पर प्रहार साफ होना चाहिए। गेंद पकड़ी नहीं जानी चाहिए न ही उसे स्कूप किया जाना चाहिए और न ही किसी तरह से उसे ‘कैरी’ किया जाना चाहिए। ‘बझक’ करने की हालत को छोड़कर गेंद एक साथ छू लेते हैं तो इसे दो स्पर्श (डबल-टच) माना जाता है। तब शेष बचे एक स्पर्श में ही गेंद नेट के पार जानी चाहिए यदि कोई खिलाड़ी को छू रहा होता है तो उस हालत में भी गेंद खेली जा सकती है।

परन्तु शर्त यह है कि वह अपने साथी का किसी तरह सहारा न ले। यदि दो खिलाड़ी इकट्ठे ही गेंद की ओर लपके और उनमें से केवल एक ही उसे छुए तो एक ही स्पर्श माना जाएगा। यदि परस्पर विरोधी खिलाड़ी एक साथ ही गलती करें तो इसे ‘डबल फाल्ट’ कहा जाएगा और इस अंक को पुनः खेला जाएगा।

यदि सर्विस के अलावा और किसी प्रहार से गेंद नेट को छू जाती है तो उसे ठीक माना जाएगा; शर्त यह है कि गेंद दूसरी तरफ गिरे। मैदान के अन्दर ही गेंद यदि जमीन छू ले अथवा मैदान से बाहर चली जाए या कुछ छू ले तो खेल से बाहर मानी जाती है।

ब्लाक करना

नेट के पार आती गेंद को कमर के ऊपर शरीर के किसी भाग से रोकने की कोशिश करना ब्लाक कहलाता है। अगली लाइन वाले एक या दो खिलाड़ी ब्लाक कर सकते हैं; परन्तु नेट के ऊपर हाथ उठाकर पहले उनको अपना इरादा जाहिर करना होता है। ब्लाक करने वाले खिलाड़ी को दुबारा भी गेंद को खेलने का अधिकार होता है (यह उसकी टीम का दूसरा स्पर्श माना जाएगा। यदि ब्लाक कर रहे एक से अधिक खिलाड़ी को गेंद स्पर्श करती है और यह स्पर्श एक साथ भी नहीं होता तो भी इसे एक ही स्पर्श माना जाता है।

ब्लाक करने वाले खिलाड़ी नेट के ऊपर पहुँच सकते हैं; परन्तु यदि उनके विरोधी गेंद नेट पार न भेज रहे हों तो इसे छूना नहीं चाहिए । यदि दो विरोधी खिलाड़ी एक साथ नेट के ऊपर गेंद छूते हैं तो वह जिस टीम के तरफ गिरती है ऐसा माना जाता है कि आखिरी बार उसकी विरोधी टीम ने गेंद छुई थी। गिरती गेंद को सामान्य नियमों के मुताबिक खेला जाता है। यदि गेंद पकड़ ली जाए तो इसे ‘डबल फाल्ट’ माना जाता है।

बैकलाइन खिलाड़ी उनको आक्रमण रेखा से पीछे रह कर किसी भी तरह के प्रहार से गेंद विरोधी टीम के क्षेत्र में भेजने की अनुमति होती; परन्तु वे गेंद पर प्रहार तभी कर सकते हैं जबकि उसकी ऊँचाई नेट की ऊंचाई से कम हो। विरोधी कोर्ट में गेंद भेजने के लिए वे किसी भी नियमानुसार ढंग से गेंद पर प्रहार कर सकते है।

स्थानापन खिलाड़ी

सेट में प्रत्येक टीम छह खिलाड़ियों को बदल सकती है परन्तु खिलाड़ी तभी बदला जा सकता है जबकि गेंद खेल में न हो। खिलाड़ी कप्तान अथवा प्रशिक्षक के अनुरोध पर ही बदले जा सकते हैं। खेल में शामिल होने से पहले स्थानापन्न खिलाड़ी के लिए ‘स्कोरर’ को सूचित करना जरूरी होता है। स्थानापन्न खिलाड़ी जब खेल नहीं रहे होते तो उसको रैफरी के सामने अपने कोच के साथ बैठना चाहिए।

खिलाड़ी बदलने में यदि देर हो तो उसके लिए ‘टाइम आउट’ लिया जाता है। यदि टीम पहले ही अपने टाइम आउट ले चुकी है तो उसे या तो अपनी सर्विस खोनी होगी और या एक अंक । सेट शुरू होने के समय का खिलाड़ी खेल से बाहर जाकर पुनः खेल में शामिल हो सकता है । पर ऐसा एक बार ही कर सकता है। परन्तु उसे अपनी पहले वाली रोटेशनल स्थिति पर आना होगा । स्थानापन्न खिलाड़ी एक बार हट जाने के बाद पुनः उस सेट में नहीं खेलता।

स्थानापन्न खिलाड़ी के बदले वही पहले वाला खिलाड़ी आ सकता है जिसकी जगह वह स्थानापन्न खिलाड़ी आता है। यदि छह खिलाड़ी बदले जा चुके हों और उसके बाद किसी एक खिलाड़ी को चोट लग जाती है तो उसे भी बदला जा सकता है। (वॉलीबॉल के नियम) यदि छह खिलाड़ी बदले जा चुके हो और उसके बाद एक खिलाड़ी को खेल से बाहर भेज दिया जाए तो टीम वह गेम हार जाती है परन्तु जो अंक उसने बनाए होते हैं वे उसी के रहते हैं। खिलाड़ी बदलने के साथ ही खेल पुनः शुरू हो जाना चाहिए। खिलाड़ी बदला जा रहा हो तो उस समय किसी को मैदान में खड़े खिलाड़ियों को सलाह देने की अनुमति नहीं होती।

अन्तर्राष्ट्रीय मुकाबलों में मैच का फैसला पाँच सेट अथवा गेम में होता है

फाउल

खिलाड़ी निम्नलिखित हालतों में नियमों का उल्लंघन करते हैं और तब टीम सर्विस अथवा अंक खोती है—

  1. यदि खिलाड़ी विरोधी टीम के पाले के ऊपर गेंद को स्पाइक करता है,
  2. यदि खिलाड़ी नेट के लम्ब-तल (वर्टीकल प्लेन) को पार करता है और विरोधी को अथवा मैदान को छू लेता है,
  3. यदि विरोधी के खेल में किसी तरह की रुकावट डालता है,
  4. यदि गेंद जमीन पर जा गिरती है,
  5. यदि कोई टीम लगातार तीन बार से अधिक गेंद को छू लेती हैं,
  6. यदि गेंद खिलाड़ी की कमर से नीचे छू जाती है,
  7. यदि गेंद खिलाड़ी से दो बार लगातार छू जाती है।
  8. यदि सर्विस के समय टीम के खिलाड़ी अपने-अपने स्थानों पर नहीं खड़े रहते,
  9. यदि गेंद को पकड़ा अथवा धकेला जाए.
  10. यदि खिलाड़ी नेट को अथवा खड़े खम्भे को छू लेता है। हाँ, यदि गेंद की टक्कर के बाद झूलकर नेट खिलाड़ी को छू जाए तो यह फाउल नहीं होता। खेल जब चल रहा हो तो कोई खिलाड़ी सेंटर लाइन को पार करे तो भी फाउल होता है।
  11. यदि आक्रमण क्षेत्र में से बैक-लाइन खिलाड़ी नेट की तुलना में अधिक ऊँचाई से गेंद लौटाता है,
  12. यदि गेंद लम्ब खम्भों और वर्टीकल पोल के बीच से नेट को पार नहीं करती,
    13 यदि गेंद मैदान से बाहर जमीन छू जाती है,
  13. यदि गेंद लौटाते समय टीम के किसी साथी का सहारा लिया जाता है,
  14. यदि किसी खिलाड़ी को चेतावनी दी जाती है.
  15. यदि प्रशिक्षण अथवा स्थानापन्न खिलाड़ी चेतावनी के बावजूद और खिलाड़ियों को निर्देश देना जारी रखता है,
  16. यदि खिलाड़ी नेट के नीचे से हाथ निकालकर विरोधी खिलाड़ी अथवा गेंद को छू लेता है, खेल में बार-बार देर की जाती है,
  17. यदि स्थानापन्न खिलाड़ी गलत तरीके से खेल में शामिल होता है,
  18. यदि चेतावनी के बावजूद टीम तीसरी चार टाइम आउट के लिए अनुरोध करती है और यदि कोई टीम दूसरे टाइम आउट में 30 सेकंड से अधिक समय लेती है या दो बार टाइम आउट लेने के बाद टीम स्थानापन्न खिलाड़ी लेने में देरी करती है, 20. यदि टीम दो बार टाइम आउट लेने के बाद एवजी खिलाड़ी को लेने में देरी करती है। यदि खिलाड़ी रैफरी की अनुमति के बिना कोर्ट से चले जाते हैं। यदि कोई खिलाड़ी विरोधी खिलाड़ी को डराता-धमकाता है। यदि ब्लाक गैरकानूनी तरीके से किया जाता है। यदि सर्विस नियम विरुद्ध तरीके से की जाती है।

डिसक्वालीफिकेशन

यदि खिलाड़ी, एवजी खिलाड़ी अथवा कोच लगातार दुर्व्यवहार करेंगे तो भी उनको शेष सेट अथवा मैच में बाहर निकाला जा सकता है। टाइम आउट हर सेट में तीस-तीस सेकंड के दो टाइम आउट लिए जा सकते है परन्तु इसके लिए अनुरोध केवल उसी समय किया जा सकता है जबकि गेंद खेल में डेड होती है। ये लगातार एक के बाद एक करके लिए जा सकते है अथवा ऐसा हो सकता है कि एवजी खिलाड़ी शामिल करने के बाद टाइम आउट लिया जाए अथवा टाइम आउट के बाद एवजी खिलाड़ी को लिया जाए कप्तान अथवा कोच को यह स्पष्ट कर देना चाहिए कि वह टाइम आउट चाहता है अथवा एवजी खिलाड़ी लाना चाह रहा है।

टाइम आउट के समय कोई खिलाड़ी मैदान नहीं छोड़ सकता (वॉलीबॉल के नियम) और सलाह केवल कोच ही दे सकता है। यदि कोई टीम तीसरी बार टाइम आउट मोगे तो रैफरी को उसे चेतावनी देनी होती है। और तब यदि उसी सेट में फिर टाइम आउट का अनुरोध किया जाता है तो फाल्ट भान करके दण्ड दिया जाता है।

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Kamlesh Kumar

मेरा नाम कमलेश कुमार है। मैं मास्टर इन कंप्यूटर एप्लीकेशन (Master in Computer Application) में स्नातकोत्तर हूं और CanDefine.com में एडिटर के रूप में कार्य करता हूँ। मुझे इस क्षेत्र में 3 वर्ष का अनुभव है और मुझे हिंदी भाषा में काफी रुचि है। मेरे द्वारा स्वास्थ्य, कंप्यूटर, मनोरंजन, सरकारी योजना, निबंध, जीवनी, क्रिकेट आदि जैसी विभिन्न श्रेणियों पर आर्टिकल लिखता हूँ और आपको आर्टिकल में सारी जानकारी प्रदान करना मेरा उद्देश्य है।

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